हॉस्पिटल में ड्यूटी और रैंप पर कैटवॉक... अमृतसर की डॉ. शिवांशी ने 'मिसेज इंडिया' के टॉप-10 में बनाई जगह

अक्सर जिम्मेदारियों के बीच सपने पीछे छूट जाते हैं, लेकिन अमृतसर की सरकारी डॉक्टर डॉ. शिवांशी ने इस धारणा को गलत साबित कर दिया है. गुरु नानक देव अस्पताल की सीनियर रेजिडेंट डॉ. शिवांशी ने प्रतिष्ठित ‘मिसेज इंडिया’ प्रतियोगिता के टॉप-10 में जगह बना ली है. अब वे जयपुर में होने वाले ग्रैंड फिनाले की तैयारी कर रही हैं.

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जयपुर में होगा मिसेज इंडिया का ग्रैंड फिनाले. (Photo: Screengrab) जयपुर में होगा मिसेज इंडिया का ग्रैंड फिनाले. (Photo: Screengrab)

अमित शर्मा

  • अमृतसर,
  • 12 जून 2026,
  • अपडेटेड 4:28 PM IST

डॉ. शिवांशी तरफ अस्पताल में मरीजों का इलाज करती हैं, सर्जरी करती हैं और सफेद कोट पहनकर जिंदगी बचाने का काम करती हैं, वहीं दूसरी तरफ उन्होंने ग्लैमर की दुनिया में भी अपनी अलग पहचान बना ली है. अमृतसर की रहने वाली डॉ. शिवांशी ने प्रतिष्ठित 'मिसेज इंडिया' प्रतियोगिता में टॉप-10 में जगह बनाकर यह साबित कर दिया है कि सपनों की कोई उम्र नहीं होती और न ही कोई तय पेशा.

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अक्सर हम सुनते हैं कि शादी के बाद, नौकरी मिलने के बाद या जिम्मेदारियां बढ़ने के बाद इंसान अपने शौक पीछे छोड़ देता है. खासकर महिलाओं के मामले में तो यह बात और ज्यादा कही जाती है. लेकिन डॉ. शिवांशी की कहानी इन तमाम धारणाओं को चुनौती देती है. गुरु नानक देव अस्पताल, अमृतसर में जनरल सर्जरी विभाग की सीनियर रेजिडेंट के तौर पर काम करने वाली डॉ. शिवांशी का दिन आम लोगों से काफी अलग होता है.

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अस्पताल की लंबी ड्यूटी, मरीजों की चिंता, ऑपरेशन थिएटर का दबाव और मेडिकल प्रोफेशन की लगातार चुनौतियां... यह सब उनकी रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा है. लेकिन इसी व्यस्त दिनचर्या के बीच उन्होंने अपने एक और सपने को जिंदा रखा.

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वह सपना था खुद को एक ऐसे मंच पर देखने का, जहां केवल खूबसूरती नहीं, बल्कि आत्मविश्वास, व्यक्तित्व, सोच और संघर्ष की कहानी को भी पहचान मिलती है. इसी सपने ने उन्हें 'मिसेज इंडिया' के मंच तक पहुंचाया. कहते हैं कि बड़े सपने देखने से ज्यादा मुश्किल उन्हें पूरा करने की तैयारी होती है.

डॉ. शिवांशी के लिए भी यह सफर आसान नहीं था. अस्पताल की ड्यूटी खत्म होने के बाद जब कई लोग आराम करते हैं, तब वे अपनी प्रतियोगिता की तैयारी करती थीं. समय निकालना सबसे बड़ी चुनौती थी, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी. उनकी मेहनत रंग लाई और वे प्रतियोगिता के टॉप-10 प्रतिभागियों में अपनी जगह बनाने में सफल रहीं.

डॉ. शिवांशी का मानना है कि महिलाओं को अपने सपनों के लिए अपराधबोध महसूस करने की जरूरत नहीं है. परिवार, करियर और व्यक्तिगत आकांक्षाओं के बीच संतुलन बनाया जा सकता है. जरूरी सिर्फ इतना है कि खुद पर भरोसा बना रहे.

उनके मुताबिक, 'मिसेज इंडिया' जैसा मंच महिलाओं को अपनी प्रतिभा दिखाने के साथ-साथ समाज तक पॉजिटिव मैसेज पहुंचाने का मौका देता है. यह मंच बताता है कि महिलाओं की पहचान सिर्फ किसी रिश्ते या पेशे तक सीमित नहीं है.

अब उनका अगला लक्ष्य और बड़ा है. 12 जुलाई को जयपुर में 'मिसेज इंडिया' का ग्रैंड फिनाले होने जा रहा है. देशभर से चुनी गई प्रतिभागियों के बीच डॉ. शिवांशी भी खिताब के लिए मुकाबला करेंगी. इसके लिए उन्होंने तैयारियां तेज कर दी हैं.

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अस्पताल की ड्यूटी अभी भी जारी है, मरीज भी पहले की तरह उनके लिए उतने ही महत्वपूर्ण हैं, लेकिन अब उनके दिन का एक हिस्सा ग्रैंड फिनाले की तैयारी को भी समर्पित है. वे लगातार खुद को बेहतर बनाने में जुटी हैं ताकि मंच पर अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन कर सकें.

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