कर्नाटक की सत्ता में बदलाव के बीच कांग्रेस नेतृत्व और पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धारमैया के बीच लगातार मंथन जारी है. मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देने के एक दिन बाद शुक्रवार को सिद्धारमैया ने दिल्ली में राहुल गांधी, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और पार्टी के वरिष्ठ नेताओं से मुलाकात की. इस दौरान नई सरकार के गठन, कैबिनेट में प्रतिनिधित्व और उनके समर्थकों को जगह देने जैसे मुद्दों पर चर्चा हुई.
सूत्रों के मुताबिक राहुल गांधी ने सिद्धारमैया की तारीफ करते हुए कहा कि उन्होंने पार्टी के वादे और संगठन के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दिखाकर दूसरे नेताओं के लिए मिसाल कायम की है. राहुल गांधी ने उनसे कहा, 'आपने कुर्सी छोड़कर पार्टी और विचारधारा के प्रति अपनी निष्ठा दिखाई है. इसे देखकर मुझे बेहद खुशी हो रही है.'
दिल्ली में हुई बैठकों के दौरान सिद्धारमैया ने हाईकमान के सामने साफ किया कि नई सरकार में सामाजिक संतुलन बनाए रखना बेहद जरूरी है. उन्होंने कहा कि यदि अनुसूचित जाति (SC), अनुसूचित जनजाति (ST), ओबीसी और लिंगायत समुदायों को उचित प्रतिनिधित्व नहीं मिलता है तो सरकार में डिप्टी सीएम पद रखने का कोई मतलब नहीं है. सूत्रों के अनुसार सिद्धारमैया ने कहा कि अगर इन समुदायों को बराबरी से जगह नहीं दी जाती तो डिप्टी सीएम बनाने की आवश्यकता ही नहीं है.
बताया जा रहा है कि कांग्रेस हाईकमान ने सिद्धारमैया को आश्वासन दिया है कि उनके बेटे यतींद्र सिद्धारमैया को सरकार या संगठन में महत्वपूर्ण जिम्मेदारी दी जाएगी. सिद्धारमैया अभी तक अपने खेमे के नेताओं के नाम कैबिनेट के लिए अंतिम रूप नहीं दे पाए हैं. माना जा रहा है कि वे शनिवार को कांग्रेस विधायक दल (CLP) की बैठक से पहले अपनी सूची रणदीप सुरजेवाला को सौंप सकते हैं.
दिल्ली में राहुल गांधी से मुलाकात के दौरान सिद्धारमैया ने यह भी कहा कि उन्होंने पार्टी नेतृत्व के निर्देश के अनुसार मुख्यमंत्री पद छोड़ दिया है. सूत्रों के अनुसार उन्होंने राज्यसभा भेजे जाने के प्रस्ताव को भी ठुकरा दिया और साफ कहा कि वह कर्नाटक की राजनीति में ही सक्रिय रहना चाहते हैं.
उधर, डीके शिवकुमार ने संकेत दिए हैं कि शनिवार को बेंगलुरु में होने वाली कांग्रेस विधायक दल की बैठक में नए मुख्यमंत्री के नाम पर औपचारिक मुहर लग सकती है. बैठक में केसी वेणुगोपाल और रणदीप सुरजेवाला भी मौजूद रहेंगे.
कांग्रेस नेताओं का कहना है कि पार्टी बेहद अनुशासित तरीके से सत्ता परिवर्तन की प्रक्रिया को आगे बढ़ा रही है. वहीं राजनीतिक जानकारों का मानना है कि सिद्धारमैया सामाजिक समीकरणों को ध्यान में रखते हुए नई कैबिनेट में अपने समर्थकों और विभिन्न समुदायों के नेताओं के लिए मजबूत हिस्सेदारी सुनिश्चित करना चाहते हैं.
नागार्जुन