मोदी सरकार के आधा दर्जन मंत्रियों की 2026 में होगी अग्निपरीक्षा? राज्यसभा में नहीं हुई वापसी तो...

मोदी सरकार के आधा दर्जन मंत्रियों के लिए साल 2026 किसी अग्निपरीक्षा से कम नहीं है. हरदीप पुरी से लेकर रामदास अठावले, बीएल वर्मा और रवनीत सिंह बिट्टू सहित आधा दर्जन मंत्री हैं, जिनका राज्यसभा का कार्यकाल 2026 में खत्म हो रहा है. ऐसे में उन्हें राज्यसभा का एक और मौका नहीं मिला तो फिर कैबिनेट से छुट्टी हो जाएगी.

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मोदी सरकार के आधा दर्जन मंत्रियों की 2026 में होगा इम्तिहान (Photo-ITG) मोदी सरकार के आधा दर्जन मंत्रियों की 2026 में होगा इम्तिहान (Photo-ITG)

कुबूल अहमद

  • नई दिल्ली,
  • 26 दिसंबर 2025,
  • अपडेटेड 12:03 PM IST

पांच दिन बाद नया साल 2026 दस्तक देने जा रहा है. 2026 का साल चुनाव लिहाज से काफी अहम होने वाला है. देश के पांच राज्यों में विधानसभा चुनाव हैं तो संसद के उच्च सदन यानी राज्यसभा की 75 सीटों पर चुनावी घमासान होगा. ऐसे में राज्यसभा का समीकरण ही नहीं बदलेगा बल्कि मोदी सरकार के मंत्रिमंडल के कई चेहरे भी बदल सकते हैं. 

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मोदी सरकार में आधा दर्जन मंत्रियों का राज्यसभा का कार्यकाल 2026 में समाप्त हो जाएगा है. इस फेहरिश्त में केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी, केंद्रीय मंत्री बीएल वर्मा, केद्रीय मंत्र रवनीत सिंह बिट्टू, केंद्रीय जॉर्ज कुरियन, केंद्रीय मंत्री रामदास अठावले और केंद्रीय मंत्री रामनाथ ठाकुर के नाम शामिल है.

2026 में जिन आधा दर्जन केंद्रीय मंत्रियों का राज्यसभा का कार्यकाल समाप्त हो रहा है, उसमें चार बीजेपी के सांसद हैं तो एक जेडीयू के सांसद है. इसके अलावा एक रामदास अठावले हैं, जो बीजेपी के समर्थन से राज्यसभा सांसद हैं. ऐसे में पार्टी जिसे भी दोबारा मौका नहीं देगी तो उसकी फिर मोदी कैबिनेट से उनकी छुट्टी हो जाएगी.

6 मंत्रियों का कब खत्म हो रहा कार्यकाल

मोदी सरकार के आधा दर्जन केंद्रीय मंत्रियों का कार्यकाल अप्रैल, जून और नवंबर 2026 में खत्म हो रहा है. इस फेहरिश्त में सबसे पहले केंद्रीय रामदास अठावले का राज्यसभा कार्यकाल 2 अप्रैल 2026 को खत्म हो रहा है. इसके अलावा जेडीयू नेता और मोदी सरकार में मंत्री रामनाथ ठाकुर का राज्यसभा कार्यकाल 9 अप्रैल 2026 को पूरा हो रहा है.

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केंद्रीय मंत्री जॉर्ज कुरियन और केंद्रीय मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू का राज्यसभा कार्यकाल 21 जून 2026 को खत्म हो रहा है. साल के आखिर में केंद्रीय मंत्री हरदीप पुरी और बीएल वर्मा का कार्यकाल नवंबर 2026 में खत्म होगा. इन दोनों सदस्यों के राज्यसभा में छह-छह साल का कार्यकाल खत्म हो रहा. ऐसे में देखना होगा कि बीजेपी एक और मौका देती है कि नहीं?

अठावले को तीसरा मौका बीजेपी देगी?

महाराष्ट्र की सात राज्यसभा सीटें अप्रैल 2026 में खाली हो रही हैं. इसमें शरद पवार, प्रियंका चतुर्वेदी और केंद्रीय मंत्री रामदास अठावले समेत कई प्रमुख नेताओं का कार्यकाल खत्म हो रहा है. 2024 के विधानसभा चुनावों के बाद महाराष्ट्र की राजनीति बदल गई है, जिससे शरद पवार और प्रियंका चतुर्वेदी की संसद में वापसी काफी मुश्किल है.

विधानसभा में बीजेपी की स्थिति मजबूत हुई है, जिसके चलते चार सीटें बीजेपी आसानी से जीत सकती जबकि एक-एक सीट एकनाथ शिंदे की शिवेसना और एक अजित पवार की एनसीपी को मिल सकती है. विपक्ष के सभी जल मिलकर एक साथ वोट करते हैं तो एक सीट उनके खाते में जा सकती है.

बीजेपी रामदास अठावले को दो बार राज्यसभा भेज चुकी है. 2024 के लोकसभा में उनकी पार्टी को एक भी सीट नहीं मिली थी, ऐसे में देखना होगा कि बीजेपी अठावले को मौका देती है कि नहीं. अगर बीजेपी अठावले को राज्यसभा नहीं भेजती है तो मंत्री पद से 2026 में छुट्टी हो जाएगी?

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बिट्टू और कुरियन को मिलेगा फिर मौका?

केंद्रीय मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू और जॉर्ज कुरियन को पीएम मोदी ने 2024 में अपने कैबिनेट में मंत्री बनाया था. 2024 के लोकसभा चुनाव में रवनीत सिंह बिट्टू पंजाब में अपनी सीट से नहीं जीत सके थे, जिसके बाद भी उन्हें मंत्रिमंडल में शामिल किया था. ऐसे में बीजेपी ने बिट्टू को राजस्थान की उस सीट से राज्यसभा सदस्य बनाया था, जो कांग्रेस के संगठन महामंत्री केसी वेणुगोपाल के लोकसभा चुनाव जीतने के बाद इस्तीफे से खाली हुई थी. अब बिट्टू का कार्यकाल पूरा हो रहा है.

राजस्थान की तीन राज्यसभा सीटें जून में खाली हो रही है, जिसमें दो सीटें बीजेपी और एक कांग्रेस के खाते में है. राज्यसभा चुनाव होते हैं तो बीजेपी के दो उम्मीदवार आसानी से जीत जाएंगे और एक सीट कांग्रेस के खाते में जा सकती है. ऐसे में बीजेपी क्या रवनीत सिंह बिट्टू को एक और मौका देगी या फिर नहीं. अगर राज्यसभा का कार्यकाल नहीं मिलता है तो फिर उन्हें मंत्री पद छोड़ना पड़ सकता है.

केंद्रीय मंत्री जॉर्ज कुरियन मध्य प्रदेश से राज्यसभ सदस्य हैं और उनका कार्यकाल 26 जून को पूरा हो रहा है. कुरियन 2024 में राज्यसभा के सदस्य एमपी से चुने गए थे. जॉर्ज कुरियन उस सीट पर आए हैं जो ज्योतिरादित्य सिंधिया के इस्तीफे के बाद खाली हुई थी. ऐसे में जॉर्ज कुरियन को बीजेपी अगर 2026 में राज्यसभा भेजने का फैसला करती है तभी उनका मंत्री पद बचा रहेगा नहीं तो छुट्टी हो जाएगी.

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रामनाथ ठाकुर को नीतीश देंगे मौका

बिहार में 9 अप्रैल को राज्यसभा की पांच सीटें खाली हो रही है और मार्च तक चुनाव होने की संभावना है. 2026 में आरजेडी के प्रेम चंद गुप्ता और अमरेंद्र धारी सिंह, जेडीयू के हरिवंश नारायण सिंह और केंद्रीय मंत्री रामनाथ ठाकुर तथा राष्ट्रीय लोक मोर्चा (RLM) के उपेंद्र कुशवाहा का कार्यकाल खत्म हो रहा है. जेडीयू से जिन दोनों नेताओं का कार्यकाल पूरा हो रहा है उसमें हरिवंश नारायण सिंह राज्यसभा के उपसभापति हैं तो रामनाथ ठाकुर मंत्री. दोनों नेता को नीतीश दो-दो कार्यकाल दे चुके हैं.

2005 के बिहार विधानसभा के बाद सियासी समीकरण बदल गए हैं. बीजेपी और जेडीयू दोनों ही आसानी से दो-दो राज्यसभा सीटें जीत सकती हैं, जबकि एक सीट विपक्ष को मिलने की उम्मीद है. रामनाथ ठाकर पूर्व सीएम कर्पूरी ठाकुर के बेटे हैं. जेडीयू उन्हें दो बार राज्यसभा भेज चुकी है. अब देखना है कि 2026 में तीसरी बार राज्यसभा भेजती है कि नहीं. जेडीयू अगर रामनाथ ठाकुर को मौका नहीं देती है तो मंत्री पद छोड़ना पड़ सकता है.

हरदीप पुरी और बीएल वर्मा में किसकी कुर्सी रहेगी?

मोदी सरकार में केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी और बीएल वर्मा दोनों उत्तर प्रदेश से राज्यसभा सदस्य हैं. इन दोनों मंत्री नवंबर 2020 में राज्यसभा सदस्य चुने गए थे और इनका 6 साल का कार्यकाल 25 नवंबर 2026 में पूरा हो रहा है. यूपी में 10 राज्यसभा सदस्यों का कार्यकाल नवंबर 2026 तक समाप्त हो रहा, जिसमें बीजेपी के पास आठ जबकि सपा और बसपा के पास एक-एक राज्यसभा सीट है.

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2026 में रिटायर होने वाले राज्यसभा सांसदों में बृजलाल, सीमा द्विवेदी, चंद्रप्रभा उर्फ गीता, हरदीप सिंह पुरी, रामजी, दिनेश शर्मा, नीरज शेखर, अरुण सिंह और बीएल वर्मा का नाम शामिल हैं. सपा से प्रोफेसर रामगोपाल यादव हैं. विधानसभा में बीजेपी की मजबूत स्थिति है.

इसलिए माना जा रहा है कि वह आठ सीटें जीत सकती है जबकि सपा को दो सीटें मिल सकती है. ऐसे में देखना होगा कि मोदी सरकार के मंत्री हरदीप पुरी और बीएल वर्मा में किसे फिर एक मौका मिलता है. राज्यसभा का कार्यकाल जिसे नहीं मिलेगा, उसे मंत्री पद छोड़ना पड़ सकता है?

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