क्या केजरीवाल की गिरफ्तारी कांग्रेस के लिए जमीन वापस पाने का मौका हो सकती है?

दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को शराब घोटाले से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग केस में ईडी ने गिरफ्तार कर लिया है. केजरीवाल की गिरफ्तारी के बाद बीजेपी आक्रामक है तो वहीं, कांग्रेस के लिए भी यह जमीन वापस पाने का मौका बताया है. जानिए कैसे?

Advertisement
अरविंद केजरीवाल सरकार की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं अरविंद केजरीवाल सरकार की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं

बिकेश तिवारी

  • नई दिल्ली,
  • 22 मार्च 2024,
  • अपडेटेड 6:55 PM IST

देश में लोकसभा चुनाव चल रहे हैं और दिल्ली में राजनीति गर्म है. केंद्र शासित प्रदेश दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने गिरफ्तार कर लिया है. ईडी के एक्शन के बाद आम आदमी पार्टी के कार्यकर्ता सड़कों पर उतर प्रदर्शन कर रहे हैं तो वहीं विपक्षी इंडिया ब्लॉक के नेता भी इसे लेकर केंद्र सरकार पर हमला बोल रहे हैं. इन सबके बीच भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने भी आम आदमी पार्टी और अरविंद केजरीवाल के खिलाफ हल्ला बोल दिया है.

Advertisement

बीजेपी को केजरीवाल के खिलाफ ईडी के एक्शन से आम आदमी पार्टी को भ्रष्टाचार की पिच पर घेरने का मौका मिल गया है. कांग्रेस केजरीवाल की गिरफ्तारी के विरोध में आम आदमी पार्टी के साथ खड़ी नजर आ रही है लेकिन बीजेपी के नेता उसी के नेताओं के पुराने बयान दिखा रहे हैं जिसमें वह शराब घोटाले में दिल्ली के सीएम पर एक्शन की डिमांड कर रहे थे. बीजेपी भ्रष्टाचार को लेकर जीरो टॉलरेंस की बात करते हुए आक्रामक है. वहीं केजरीवाल की गिरफ्तारी को कांग्रेस के लिए भी जमीन वापस पाने का मौका भी बताया जा रहा है.

अब सवाल उठ रहे हैं कि आम आदमी पार्टी और कांग्रेस, दोनों ही दल दिल्ली में गठबंधन कर लोकसभा चुनाव लड़ रहे हैं फिर एक सहयोगी की मुश्किल दूसरे के लिए मौका कैसे? कांग्रेस केजरीवाल के साथ खड़ी जरूर है लेकिन शराब घोटाले में बीजेपी के हमलों का केंद्र आम आदमी पार्टी ही है. सरकार आम आदमी पार्टी की है, मुख्य विपक्षी पार्टी बीजेपी है तो सत्ताधारी और विपक्षी पार्टी की यह लड़ाई खोई जमीन वापस पाने की जुगत में जुटी कांग्रेस के लिए मौका हो सकता है. इसे आम आदमी पार्टी के उदय से पहले यानी 2013 के पहले और इसके बाद के चुनाव नतीजों से भी समझा जा सकता है.

Advertisement

AAP मजबूत होती गई, कांग्रेस कमजोर

केंद्र शासित प्रदेश दिल्ली में विधानसभा की 70 सीटें हैं और 1998 से 2013 तक कांग्रेस की सरकार रही. आम आदमी पार्टी 2013 चुनाव में अपने सियासी उभार के बाद चुनाव दर चुनाव मजबूत होती गई और कांग्रेस का वोट शेयर गिरता ही चला गया. अपने पहले ही चुनाव में आम आदमी पार्टी 29.7 फीसदी वोट शेयर के साथ 28 सीटें जीतकर 31 सीटें जीतने वाली बीजेपी के बाद दूसरी सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरी. कांग्रेस को 24.7 फीसदी वोट शेयर के साथ मात्र आठ सीटों से संतोष करना पड़ा. बीजेपी को 33.3 और बसपा को 5.4 फीसदी वोट मिले थे.

अब इससे ठीक पहले वाले यानि 2008 के दिल्ली चुनाव नतीजों की बात करें तो कांग्रेस को 40.3 फीसदी वोट शेयर के साथ 43, बीजेपी को 36.3 फीसदी वोट शेयर के साथ 23 सीटें मिली थीं. तब बहुजन समाज पार्टी (बसपा) दो सीटें जीत सकी थी लेकिन पार्टी को 14 फीसदी वोट मिले थे. लोक जनशक्ति पार्टी को 1.3 फीसदी वोट शेयर के साथ एक और 3.9 फीसदी वोट निर्दलीय उम्मीदवारों को भी मिले थे.

40 से 4 फीसदी वोट पर आई कांग्रेस

साल 2008 के दिल्ली चुनाव के मुकाबले 2013 में कांग्रेस का वोट शेयर करीब 16 फीसदी, बीजेपी का वोट शेयर तीन फीसदी और बसपा का वोट शेयर नौ फीसदी कम हुआ. इन तीन पार्टियों का वोट शेयर कुल मिलाकर करीब 28 फीसदी कम हुआ और आम आदमी पार्टी को 29.7 फीसदी वोट मिले.

Advertisement

दिल्ली के पिछले दो विधानसभा चुनावों में आम आदमी पार्टी का वोट शेयर 50 फीसदी के पार रहा तो वहीं पिछले लोकसभा चुनाव में बीजेपी ने यह लैंडमार्क पार किया. आम आदमी पार्टी के उदय के बाद भी बीजेपी का वोट शेयर 32 से 38 फीसदी के बीच रहा है और कांग्रेस 40 से 4 फीसदी पर आ गई.

कांग्रेस के लिए मौका कैसे

राजनीतिक विश्लेषक अमिताभ तिवारी ने कहा कि दिल्ली में तीन तरह के वोटर हैं. एक बीजेपी का वोट बैंक, दूसरा एंटी बीजेपी वोटर और तीसरी कैटेगरी है फ्लोटिंग वोटर्स यानी ऐसे वोटर्स जिनकी आस्था किसी एक दल के साथ नहीं है. विधानसभा से लोकसभा चुनाव तक यह परिणाम पर भी नजर आता है. जरूरी नहीं है कि ऐसा हो ही, लेकिन केजरीवाल की गिरफ्तारी के बाद अगर आम आदमी पार्टी कमजोर होती है तो ऐसे वोटर्स के सामने कांग्रेस के अलावा कोई मजबूत विकल्प नहीं रहेगा और ग्रैंड ओल्ड पार्टी के लिए यह अपने छिटके वोटर्स को फिर से साधने का सबसे मुफीद मौका होगा.

गौरतलब है कि दिल्ली कांग्रेस के नेता आम आदमी पार्टी के साथ गठबंधन का मुखर विरोध कर रहे थे. लोकल यूनिट के विरोध को दरकिनार कर पार्टी नेतृत्व ने केजरीवाल की अगुवाई वाली पार्टी के साथ गठबंधन का ऐलान किया तो इसके पीछे भी अपने छिटके वोटर्स को हाथ के साथ जोड़ने की रणनीति बताई गई. दूसरी तरफ, आम आदमी पार्टी भी केजरीवाल की गिरफ्तारी के विरोध में आंदोलन खड़ा कर सहानुभूति उत्पन्न करने की रणनीति पर बढ़ती नजर आ रही है. केजरीवाल की गिरफ्तारी से दिल्ली में हाथ मजबूत होता है या कमल, या झाड़ू की रफ्तार बढ़ती है? यह आने वाला वक्त बताएगा.

---- समाप्त ----

Read more!
Advertisement

RECOMMENDED

Advertisement
Latest News in Hindi »