उत्तर प्रदेश सरकार की स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) ने राम मंदिर ट्रस्ट द्वारा पिछले दो साल में आयोजित विभिन्न कार्यक्रमों पर हुए ₹124 करोड़ से ज्यादा के खर्च की जांच शुरू कर दी है. सूत्रों के मुताबिक, इस जांच में जनवरी 2024 का प्राण-प्रतिष्ठा समारोह, 2025 के महाकुंभ की व्यवस्थाएं और नवंबर 2025 में हुआ ध्वजारोहण समारोह शामिल हैं.
सूत्रों ने बताया कि SIT ट्रस्ट के पिछले दो सालों के फाइनेंशियल रिकॉर्ड का ऑडिट कर रही है. जांचकर्ताओं ने ऑडिट रिपोर्ट, पेमेंट वाउचर, बिल, चार्टर्ड अकाउंटेंट के रिकॉर्ड और खर्च के स्टेटमेंट की जांच की है, ताकि ये पता लगाया जा सके कि फंड का इस्तेमाल ट्रस्ट की तय फाइनेंशियल प्रक्रियाओं और मंजूरी के अनुसार किया गया था या नहीं. जांचकर्ताओं ने इस भारी-भरकम राशि के वित्तीय लेन-देन का ऑडिट करने के लिए चार्टर्ड अकाउंटेंट (सीए) के रिकॉर्ड, भुगतान वाउचर, बिल और व्यय विवरणों को अपने कब्जे में ले लिया है.
'प्राण प्रतिष्ठा पर खर्च हुए 113 करोड़'
SIT की जांच के दायरे में सबसे बड़ा खर्च 22 जनवरी 2024 को आयोजित रामलला का प्राण प्रतिष्ठा समारोह है, जिसमें लगभग 8000 मेहमान शामिल हुए थे और कुल 113 करोड़ रुपये खर्च हुए थे.
अक्षत पूजन अभियान पर बहा पैसा
ऑडिट रिकॉर्ड के मुताबिक, ट्रस्ट ने शेड और टेंट सिटी के बुनियादी ढांचे पर 35.97 करोड़, अक्षत पूजन अभियान पर 30.85 करोड़, प्रचार और विज्ञापनों पर 21.77 करोड़ तथा सजावट व लाइटिंग पर 14.62 करोड़ रुपये खर्च किए थे. इसके अलावा अन्न क्षेत्र (भोजन) पर 5.11 करोड़ और धार्मिक अनुष्ठानों पर 1.06 करोड़ खर्च हुए थे.
ध्वजारोहण समारोह पर खर्च हुए 10 करोड़
जांच के दायरे में दूसरा सबसे बड़ा आयोजन 25 नवंबर 2025 को हुआ राम मंदिर का ध्वजारोहण समारोह है, जिसका कुल खर्च ट्रस्ट के रिकॉर्ड के अनुसार 10.12 करोड़ रुपये आया था. इस कार्यक्रम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी समेत लगभग 6000 मेहमानों ने शिरकत की थी.
सूत्रों के मुताबिक, एसआईटी इस बात की बारीकी से जांच कर रही है कि प्रति मेहमान औसतन लगभग 16 हजार रुपये का ये खर्च ट्रस्ट के वित्तीय नियमों और स्वीकृतियों के अनुरूप था या नहीं.
दान मिले सोने-चांदी का भी होगा मिलान
एसआईटी केवल खर्चों की ही नहीं, बल्कि भक्तों द्वारा रामलला को दान में दिए गए कीमती धातुओं और आभूषणों के रिकॉर्ड का भी फिजिकल वेरिफिकेशन कर रही है.
ट्रस्ट के रिकॉर्ड के अनुसार, नवंबर 2024 से फरवरी 2025 के बीच भक्तों ने 2.3 किलोग्राम सोना और 83.3 किलोग्राम चांदी दान की थी. इसके अलावा महाकुंभ के दौरान अलग से 1.5 किलोग्राम सोना और 28 किलोग्राम चांदी चढ़ावे के रूप में मिली थी, जिसके भंडारण और वर्तमान स्थिति की जांच चल रही है.
जांचकर्ता इन दानों से जुड़े कागजात की दोबारा जांच कर रहे हैं, जिसमें इन्वेंट्री रिकॉर्ड, रखने की व्यवस्था और उनकी मौजूदा स्थिति शामिल है. सूत्रों ने बताया कि SIT इस बात की भी जांच कर रही है कि क्या इन बड़े कार्यक्रमों से जुड़े विस्तृत वित्तीय ब्योरे ट्रस्ट की बैठकों में पेश किए गए थे.
समर्थ श्रीवास्तव