कैसे निकलेगा किसान आंदोलन का हल, सरकार का क्या है प्लान? कृषि मंत्री अर्जुन मुंडा से खास बातचीत

कृषि मंत्री अर्जुन मुंडा ने कहा कि शांति व्यवस्था कायम रखते हुए बातचीत करने से ही मुद्दों का समाधान निकलेगा. कोई और दूसरा तरीका नहीं है. उन्होंने कहा कि हम सब एक ही परिवार के सदस्य हैं, कोई अलग नहीं है. किसान हमारे भाई-बंधु हैं.

Advertisement
केंद्रीय कृषि मंत्री अर्जुन मुंडा. (File Photo/PTI) केंद्रीय कृषि मंत्री अर्जुन मुंडा. (File Photo/PTI)

अशोक सिंघल

  • नई दिल्ली,
  • 16 फरवरी 2024,
  • अपडेटेड 12:58 PM IST

प्रदर्शनकारी किसानों और तीन केंद्रीय मंत्रियों (पीयूष गोयल, अर्जुन मुंडा और नित्यानंद राय) के बीच कल चंडीगढ़ में हुई तीसरे दौर की बातचीत सकारात्मक रही. केंद्रीय कृषि मंत्री अर्जुन मुंडा ने आज तक से क​हा, 'बातचीत बहुत सकारात्मक रही और हमने (किसानों और सरकार के प्रतिनिधि) रविवार शाम को फिर से मिलने का फैसला किया है'. केंद्रीय कृषि मंत्री ने कहा, मैं बिल्कुल स्पष्ट कर देना चाहता हूं कि हमारी सरकार किसानों के हितों का ध्यान रखने वाली सरकार है. उन्होंने किसानों से कानून हाथ में नहीं लेने और ऐसे परिस्थितियों का निर्माण करने से बचने के लिए कहा, जिससे आमजन को परेशानी का सामना करना पड़े.

Advertisement

कृषि मंत्री अर्जुन मुंडा ने कहा कि शांति व्यवस्था कायम रखते हुए बातचीत करने से ही मुद्दों का समाधान निकलेगा. कोई और दूसरा तरीका नहीं है. उन्होंने कहा कि हम सब एक ही परिवार के सदस्य हैं, कोई अलग नहीं है. किसान हमारे भाई-बंधु हैं. जब हम मिल-बैठकर गंभीरता से मुद्दों पर विचार-विमर्श करेंगे तो समाधान जरूर निकलेगा. एमएसपी गारंटी कानून के मुद्दे पर उन्होंने कहा कि इसकी इकोनॉमिक फिजिबिलिटी (आर्थिक व्यवहार्यता) का विश्लेषण करने की जरूरत है. सरकार हर पहलू पर विचार किए बिना एमएसपी की कानूनी गारंटी का ऐलान नहीं कर सकती. हम इस मामले में लगातार चर्चा कर रहे हैं. हमने किसानों से भी कहा कि वे इस पर सोचकर हमें बताएं.

'हमने किसानों के मुद्दों को सुना और उन्हें गंभीरता से लिया'

अर्जुन मुंडा ने कहा कि किसानों के साथ तीसरे दौर की बैठक के दौरान हमने उनके सभी मुद्दों को सुना और उन्हें गंभीरता से लिया है. हमने किसानों से कहा है कि हम आपकी सभी बातों को ध्यान में रखकर अपनी वार्ता जारी रखेंगे और समाधान का रास्ता ढूंढेंगे. आपसी समझ से ही हम मुद्दों का समाधान निकाल सकते हैं, अव्यवस्था फैलाकर कोई व्यवस्था नहीं बनाई जा सकती. किसानों को दिल्ली आने से रोकने के लिए रास्ते में कंटीले तार बिछाना, उन पर आंसू गैस के गोले दागना, वॉटर कैनन चलाना क्या उचित है? इसके जवाब में केंद्रीय कृषि मंत्री ने कहा, 'देखिए देश एक है और प्रदेश अनेक हैं. सभी राज्यों की यह जिम्मेदारी होती है कि वे यहां कानून-व्यवस्था बनाए रखें'.

Advertisement

'कोई राजनीतिक बयानबाजी न करे, यह सबके लिए बेहतर'

अर्जुन मुंडा ने कहा, 'मैं मानता हूं कि राज्यों में हो सकता है कुछ इस तरह की बातें हुई होंगी, लेकिन हमें इस बात को ध्यान में रखना है कि इस तरह की स्थिति आने ही क्यों दें. हम बातचीत करते रहें, समस्या के समाधान के लिए रास्ता ढूंढते रहें. आखिर कोई कहीं नहीं जा रहा, हम सब इस देश के ही रहने वाले हैं'. कुछ किसान नेताओं के ऐसे बयान सामने आए हैं, जिनमें वे कह रहे हैं कि राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा के बाद पीएम मोदी का ग्राफ बहुत बढ़ गया है, इसे रोका जाना चाहिए. इस बारे में केंद्रीय कृषि मंत्री ने कहा, 'मैं तो यह कहूंगा कि हम किसान संगठनों और किसानों के मुद्दों पर ध्यान देना चाहते हैं. कोई राजनीतिक बयानबाजी न करे यह सबके लिए बेहतर होगा. इस देश के किसानों ने हमेशा से मेहनत किया है, देश का पेट भरा है. उनकी देश के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका है'.

चुनाव से ठीक पहले किसान आंदोलन शुरू होने के बारे में अर्जुन मुंडा ने कहा, 'भारत दुनिया का बड़ा लोकतंत्र है. चुनाव लोकतंत्र का उत्सव है. इस उत्सव में देश की जनता स्वेच्छा और स्वतंत्रता के साथ मतदान करे और सरकार बनाए. यह लोकतंत्र की सबसे बड़ी ताकत है. पिछले 10 वर्षों में अगर देखें तो एमएसपी में लगातार वृद्धि हुई है. पहले की तुलना में ज्यादा खरीद एमएसपी पर हो रही है. देश में 80 प्रतिशत छोटे और लघु किसान हैं. उनको लाभ पहुंचाने के लिए किसान सम्मान निधि बनाया गया है. किसान संगठनों की बात को निश्चित रूप से संज्ञान में लेकर गंभीरता से विचार करेंगे और समाधान निकालने की कोशिश करेंगे'.

Advertisement

किसानों और सरकार के बीच तीसरी बैठक में क्या हुआ?

सूत्रों के मुताबिक किसानों और सरकार के बीच बातचीत में 3 मुद्दों पर सहमति बनाने के प्रयास अब भी जारी हैं. ये मुद्दे हैं, एमएसपी गारंटी कानून, एमएसपी = सी2+50% फॉर्मूला और किसान आंदोलन 1.0 के दौरान किसानों पर दर्ज मुकदमे वापस लिए जाएं. किसानों ने सरकार से कहा कि एमएसपी गारंटी कानून का मुद्दा पिछले 2 साल से लंबित है. एमएसपी सी2+50 फॉर्मूला लागू करने का मुद्दा काफी लंबे समय से चला आ रहा है.  सरकार के साथ बैठक में किसान नेताओं ने कहा कि जब तक C2+50 फॉर्मूला लागू नहीं होता, हमें एमएसपी गारंटी दें.किसान नेताओं ने सरकार से कहा कि वह रविवार की बैठक में एमएसपी पर रूपरेखा के साथ आए. किसानों की ऋण माफी की मांग पर सरकार का रुख सकारात्मक नहीं है. वहीं सूत्रों की मानें तो किसान भी ऋण माफी की मांग पर लचीला रुख अपनाने के लिए तैयार हैं.

किसान आंदोलन 1.0 के दौरान लाल किला पर हुई हिंसा के मामले को मौजूदा बातचीत से दूर रखा गया है. संयुक्त किसान मोर्चा (अराजनीतिक) और किसान मजदूर मोर्चा, किसान आंदोलन 1.0 के दौरान किसानों के खिलाफ दर्ज मामलों की सूची सरकार को प्रदान करेंगे. भारत सरकार इन मामलों को वापस लेने पर विचार करने के लिए तैयार है, क्योंकि ऐसे कई मामले पहले ही विभिन्न राज्य सरकारों द्वारा वापस ले लिए जा चुके हैं. बिजली संशोधन विधेयक पर सरकार ने कृषि संगठनों को बताया कि किसानों को बिजली विधेयक में छूट दी गई है. सूत्रों के मुताबिक किसानों के लिए पेंशन की मांग जैसे मुद्दे बहुत महत्वपूर्ण नहीं हैं. ऐसे मुद्दे सरकार और किसानों के बीच चल रही बातचीत पर बिल्कुल भी असर नहीं डालेंगे. (अमित भारद्वाज के इनपुट के साथ)

---- समाप्त ----

Read more!
Advertisement

RECOMMENDED

Advertisement
Latest News in Hindi »