'एक नहीं, 6 पीड़ित दिखाएंगे', E20 फ्यूल पर प्रदर्शनकारियों ने स्वीकार की गडकरी की चुनौती, पर रखी ये शर्त

केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने एथेनॉल मिश्रित ईंधन (E20) से प्रभावित एक भी गाड़ी या पीड़ित का नाम सामने लाने की चुनौती दी थी. अब सामाजिक कार्यकर्ता तहसीन पूनावाला ने कहा है कि वो एक नहीं, बल्कि 6 पीड़ितों को सामने लाएंगे. हालांकि, पूनावाला ने शर्त रखी है कि गडकरी को पीड़ितों से प्रेस के सामने मिलना होगा.

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प्रदर्शनकारियों ने नितिन गडकरी से मिलने का समय मांगा. (Photo- X/PTI) प्रदर्शनकारियों ने नितिन गडकरी से मिलने का समय मांगा. (Photo- X/PTI)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 09 जुलाई 2026,
  • अपडेटेड 9:44 PM IST

केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने चुनौती दी थी कि एथेनॉल मिश्रित ईंधन से प्रभावित एक भी गाड़ी या पीड़ित का नाम सामने लाया जाए. इस चुनौती के ठीक एक दिन बाद, प्रदर्शनकारियों ने उनकी चुनौती स्वीकार कर ली है और कहा कि वो एक नहीं, बल्कि ऐसे छह पीड़ितों को सामने लाने के लिए तैयार हैं.

प्रदर्शनकारियों की अगुवाई कर रहे सामाजिक कार्यकर्ता और इंडस्ट्रलिस्ट तहसीन पूनावाला ने एक वीडियो शेयर करते हुए नितिन गडकरी की चुनौती स्वीकार की. हालांकि, उन्होंने एक शर्त रखी है कि गडकरी इन पीड़ितों से मीडिया के सामने मिलें और इस बातचीत को लाइव-स्ट्रीम किया जाए.

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'टीम भारत' के बैनर तले पिछले रविवार को नई दिल्ली के जंतर-मंतर पर E20 फ्यूल के खिलाफ पहला विरोध प्रदर्शन शुरू हुआ था. पूनावाला ने बताया कि वो पहले इन पीड़ितों को लेकर केंद्रीय मंत्री के घर पर जाने वाले थे. लेकिन दिल्ली पुलिस ने उनसे संपर्क कर मंत्री के घर न जाने की हिदायत दी.

एक नहीं, 6 पीड़ित पेश करने के लिए तैयार पूनावाला

पूनावाला ने वीडियो में कहा, 'हमने नितिन गडकरी की चुनौती स्वीकार कर ली है. हमारे पास ऐसे छह लोग हैं जिनकी गाड़ियों में E20 फ्यूल की वजह से खराबी आई है. लेकिन हम गडकरी के घर नहीं जा सकते, क्योंकि वहां जाने पर हमें हिरासत में ले लिया जाएगा या गिरफ्तार कर लिया जाएगा. या तो दिल्ली पुलिस हमारी बैठक की व्यवस्था कराए या मंत्री हमें समय दें.'

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क्या है E20 पेट्रोल और क्यों हो रहा विरोध?

दरअसल भारत सरकार ने देश में 20% एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल (E20) की बिक्री को अनिवार्य कर दिया है. सरकार ने राष्ट्रीय जैव ईंधन नीति 2018 के तहत 2030 तक E20 लागू करने का लक्ष्य रखा था, जिसे समय से पांच साल पहले दिसंबर 2025 में ही हासिल कर लिया गया. साल 2026 में इसे देश के सभी फ्यूल स्टेशनों पर पूरी तरह लागू कर दिया गया है.

E20 फ्यूल का विरोध कर रहे लोगों का दावा है कि देश की करीब 80% गाड़ियां सिर्फ E10 (10% एथेनॉल) फ्यूल के ही अनुकूल हैं. लोगों का कहना है कि E20 पेट्रोल के इस्तेमाल से गाड़ियों का माइलेज कम हो रहा है और उनके इंजन और कल-पुर्जों में खराबी आ रही है.

यह भी पढ़ें: ज्यादा एथेनॉल वाले पेट्रोल पर अब नहीं लगेगी एक्साइज ड्यूटी, सरकार ने किया ऐलान

हालांकि केंद्र सरकार और विशेषज्ञों ने इन दावों को खारिज करते हुए कहा है कि E20 ईंधन से E10 गाड़ियों को कोई नुकसान नहीं होता है. इंडिया टुडे को दिए एक हालिया इंटरव्यू में नितिन गडकरी ने कहा था कि एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल से किसी भी गाड़ी को नुकसान होने की बात साबित नहीं हुई है. अगर ऐसा कोई मामला आता है, तो लोग डीलर या मंत्रालय में शिकायत दर्ज करा सकते हैं, जिसकी जांच कर राहत दी जाएगी.

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