'मैंने पुलिस पर भरोसा किया, उन्होंने मुझे ही दोषी बना दिया', CM बनने के बाद पहली बार करूर पहुंचे विजय का बड़ा बयान

करूर भगदड़ के पीड़ित परिवारों से मिलने पहुंचे मुख्यमंत्री विजय ने पुलिस पर भीड़ की जानकारी समय पर नहीं देने का आरोप लगाया. उन्होंने कहा कि हालात बिगड़ने पर रैली रद्द की जा सकती थी. विजय ने डीएमके पर त्रासदी का राजनीतिक लाभ उठाने का भी आरोप लगाया.

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काले लिबास में पहुंचे सीएम विजय बोले- करूर मेरे दिल से कभी नहीं निकलेगा (Photo-ITG) काले लिबास में पहुंचे सीएम विजय बोले- करूर मेरे दिल से कभी नहीं निकलेगा (Photo-ITG)

अनघा

  • चेन्नई,
  • 10 जुलाई 2026,
  • अपडेटेड 1:38 PM IST

तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय ने शुक्रवार को करूर पहुंचकर अपनी पार्टी तमिलगा वेत्री कड़गम (टीवीके) की रैली में पिछले साल हुई भगदड़ पीड़ित परिवारों से मुलाकात की. करूर की इस त्रासदी को दर्दनाक बताते हुए मुख्यमंत्री विजय भावुक हो गए. उन्होंने कहा, 'मैंने भीड़ को नियंत्रित करने के लिए पुलिस पर भरोसा किया था, फिर भी मौतों के लिए मुझे ही दोषी ठहराया गया.'

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उन्होंने करूर की जनता से एक बड़ा वादा करते हुए ऐलान करते हुए कहा, 'करूर की यह घटना एक ऐसा जख्म है जो मेरे दिल और यादों में हमेशा रहेगा. करूर मेरे दिल से कभी नहीं निकल सकता. इस हादसे में जान गंवाने वाले 41 निर्दोष लोगों के सम्मान में TVK करूर जिले में एक भव्य और स्थायी स्मारक (Memorial) का निर्माण करेगी. यह स्मारक उन पीड़ितों को हमारी तरफ से एक सच्ची और स्थायी श्रद्धांजलि होगा.'

काले कपड़े पहनकर पहुंचे विजय ने इसे 41 मृतकों के प्रति श्रद्धांजलि और उनके परिवारों के प्रति एकजुटता का प्रतीक बताया. पीड़ित परिवारों से मुलाकात के बाद मुख्यमंत्री विजय ने करूर भगदड़ को "ऐसी घटना जिसे कभी भुलाया नहीं जा सकता" बताते हुए पुलिस और विपक्षी डीएमके पर तीखा हमला बोला.

मुख्यमंत्री के तौर पर करूर की अपनी पहली यात्रा के दौरान पीड़ितों के परिवारों के सदस्यों को नियुक्ति पत्र सौंपने के लिए आयोजित एक सभा को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि पेरंबलूर में जब भीड़ अधिक होने की सूचना पुलिस ने दी थी तो उन्होंने तुरंत कार्यक्रम छोड़ दिया था. विजय ने सवाल उठाया, "अगर करूर में भीड़ इतनी बढ़ गई थी तो पुलिस ने हमें पहले क्यों नहीं बताया? अगर हालात नियंत्रण से बाहर थे तो रैली रद्द कर सकते थे. पुलिस के पास ऐसा करने का पूरा अधिकार था."

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विजय ने आरोप लगाया कि पुलिस ने उन्हें सीधे हाईवे से करूर लाने की बजाय "एक नाटक" किया. उन्होंने कहा, "मैंने तो करूर पुलिस का धन्यवाद किया था, लेकिन मुझे नहीं पता था कि पर्दे के पीछे क्या चल रहा है. आखिर इसके लिए जिम्मेदार कौन था?"

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 'परिसीमन' के खिलाफ खोला मोर्चा

मुख्यमंत्री विजय ने न केवल स्थानीय मुद्दों पर बात की, बल्कि केंद्र की भाजपा सरकार की नीतियों के खिलाफ भी अपना सबसे बड़ा राजनीतिक स्टैंड साफ कर दिया. लोकसभा सीटों के परिसीमन (Delimitation) का कड़ा विरोध करते हुए मुख्यमंत्री ने साफ लफ्जों में कहा कि उनकी सरकार केंद्र सरकार के इस फैसले और इस कवायद का किसी भी कीमत पर समर्थन नहीं करेगी. विजय ने आरोप लगाया कि यह कदम दक्षिण भारतीय राज्यों के हितों को प्रभावित कर सकता है और उनकी सरकार इसका विरोध जारी रखेगी.

मुख्यमंत्री ने कहा कि वह लोगों की सेवा करने के लिए राजनीति में आए हैं और करूर की घटना के लिए उन्हें दोषी ठहराया गया, जबकि इस हादसे ने उन्हें भी गहरा दुख पहुंचाया. उन्होंने कहा, "मेरे लिए पैसे नहीं, लोग सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण हैं. मैं लोगों का साथ कभी नहीं छोड़ूंगा."

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विजय ने डीएमके पर इस हादसे का राजनीतिक लाभ उठाने का आरोप लगाया. उन्होंने कहा कि विधानसभा में भी इस मुद्दे पर राजनीति की गई और सरकार लोगों की भावनाओं के बजाय राजनीतिक फायदे पर ध्यान दे रही है.

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DMK पर निशाना

उन्होंने भ्रष्टाचार के मुद्दे पर भी डीएमके और एआईएडीएमके दोनों को निशाने पर लिया. विजय ने दावा किया कि उनकी सरकार आने के बाद सरकारी दफ्तरों में रिश्वतखोरी लगभग खत्म हो गई है और अब लोगों को सम्मान के साथ सेवाएं मिल रही हैं. उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि चेन्नई में एक फ्लाईओवर निर्माण के लिए वास्तविक लागत से लगभग दोगुनी कीमत का टेंडर जारी किया गया था, जिसे उनकी सरकार ने रद्द कर दिया.

करूर दौरे के मद्देनज़र पूरे जिले में सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे और लगभग 5,000 पुलिसकर्मी तैनात किए गए थे. इस बीच करूर भगदड़ मामले की जांच अभी भी जारी है और इस घटना को लेकर तमिलनाडु की राजनीति में आरोप-प्रत्यारोप का दौर लगातार तेज होता जा रहा है.
 

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