Exclusive: दरभंगा एम्स का सच, शिलान्यास के बाद भी क्यों अटका है काम?

दरभंगा एम्स की घोषणा के 11 साल और शिलान्यास के डेढ़ साल बाद भी मुख्य अस्पताल और अकादमिक ब्लॉक का निर्माण कार्य अब तक शुरू नहीं हो सका है. प्रोजेक्ट का बजट 59 फीसदी बढ़कर ₹2006 करोड़ हो गया है, लेकिन अब तक इसमें से 1% राशि भी खर्च नहीं की जा सकी है.

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आरटीआई में दरभंगा एम्स की खुली पोल (Photo: X/drshamamohd) आरटीआई में दरभंगा एम्स की खुली पोल (Photo: X/drshamamohd)

अशोक उपाध्याय

  • नई दिल्ली,
  • 28 मई 2026,
  • अपडेटेड 10:57 AM IST

बिहार में दूसरे एम्स की घोषणा को एक दशक और दरभंगा को इसका केंद्र चुने छह साल हो चुके हैं. इस बीच, 'इंडिया टुडे' के हाथ लगी एक आरटीआई रिपोर्ट ने इस प्रस्तावित प्रोजेक्ट के निर्माण कार्य पर गंभीर सवालिया निशान लगा दिए हैं. इसमें सबसे बड़ा सवाल उस 'मुख्य द्वार' को लेकर है, जो अस्पताल बनने से पहले ही इस पूरी परियोजना की लेती-लतीफी का चेहरा बन चुका है.

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मुख्य प्रवेश द्वार से संबंधित खर्च और मंजूरियों का विवरण मांगने वाली 'इंडिया टुडे' की एक आरटीआई के जवाब में, एम्स दरभंगा के निर्माण कार्य के लिए नियुक्त सरकारी कंपनी एचएससीसी लिमिटेड ने कहा कि काम अभी "प्रक्रिया के अधीन" है और "मुख्य द्वार के लिए कोई अलग टेंडर या स्वीकृति पत्र नहीं है.'

समय के साथ, यह गेट खुद इस परियोजना में हो रही देरी का प्रतीक बन गया. जहां एक तरफ मुख्य अस्पताल भवन, शैक्षणिक ब्लॉक और आवासीय बुनियादी ढांचे का निर्माण अभी शुरू होना बाकी है, वहीं यह गेट प्रस्तावित एम्स से जुड़ी सबसे आसानी से पहचानी जाने वाली संरचना बना रहा. आरटीआई के इस जवाब ने अब नए सवाल खड़े कर दिए हैं, क्योंकि इससे यह संकेत मिलता है कि यह गेट भी कोई अलग से स्वीकृत या स्वतंत्र रूप से टेंडर किया गया हिस्सा नहीं है.

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विशेष रूप से, एचएससीसी (HSCC) का यह जवाब इस बात को स्पष्ट नहीं करता है कि आखिर उस गेट की संरचना की कल्पना किसने की या उसे मंजूरी किसने दी, जो अंततः एम्स दरभंगा के इर्द-गिर्द राजनीतिक और सार्वजनिक विमर्श का मुख्य केंद्र बन गया.

2015 में घोषणा, 2020 में मंज़ूरी

पटना के बाद बिहार के दूसरे एम्स के रूप में 2015 में 'एम्स दरभंगा' की घोषणा की गई थी, जिसे मिथिलांचल क्षेत्र के लिए स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में एक बड़े वरदान के रूप में देखा गया था. इस परियोजना को 2020 में केंद्रीय कैबिनेट की मंजूरी मिली, जबकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 13 नवंबर 2024 को इसकी आधारशिला रखी. 187 एकड़ से अधिक भूमि पर प्रस्तावित इस संस्थान के लिए शुरुआत में 1,264 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए थे. हालांकि, हालिया आरटीआई से मिले जवाब के अनुसार, अब इस परियोजना की संशोधित लागत बढ़कर 2,006 करोड़ रुपये हो चुकी है, जो कि इसके मूल अनुमान से लगभग 59 प्रतिशत अधिक है.

मुख्य बुनियादी ढांचे का काम शुरू होना अभी बाकी

आरटीआई के जवाब से यह भी पता चला है कि परियोजना के प्रमुख बुनियादी ढांचागत हिस्सों का निर्माण कार्य अभी तक शुरू नहीं हो पाया है. अस्पताल भवन, शैक्षणिक ब्लॉक, आवासीय परिसर और अन्य प्रमुख सुविधाओं की स्थिति को लेकर पूछे गए सवालों के जवाब में एचएससीसी ने कहा कि "उक्त कार्य मंजूरी मिलने के बाद ही शुरू किए जाने हैं."

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यह जवाब इशारा करता है कि शिलान्यास समारोह होने और इस परियोजना का सार्वजनिक रूप से बार-बार जिक्र किए जाने के बावजूद, मुख्य सिविल निर्माण कार्यों को अभी भी मंजूरियों का इंतजार है.

एचएससीसी ने जानकारी दी है कि एम्स दरभंगा के जुलाई 2029 में चालू  होने की संभावना है. आरटीआई के जवाब के अनुसार, अब तक हुए खर्च में वित्तीय वर्ष (FY) 2024-25 के दौरान 21.33 लाख रुपये और वित्तीय वर्ष 2025-26 के दौरान 19.18 करोड़ रुपये शामिल हैं. कुल मिलाकर, अब तक लगभग 19.39 करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं, जो कि 2,006 करोड़ रुपये की संशोधित परियोजना लागत का 1 प्रतिशत से भी कम है.

एक तरफ जहां मुख्य बुनियादी ढांचे के कामों को अभी भी मंजूरी मिलना बाकी है, वहीं दूसरी तरफ अब तक संशोधित लागत का 1 फीसदी से भी कम हिस्सा खर्च हुआ है. ऐसे में, जुलाई 2029 की समयसीमा पर गंभीर सवाल उठना तय है, खासकर तब जब इस बात को लेकर संशय बढ़ रहा है कि क्या यह महत्वाकांक्षी स्वास्थ्य परियोजना वास्तव में अगले तीन वर्षों के भीतर चालू हो पाएगी.

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