'सतलुज' को लेकर दिलजीत दोसांझ पर बरसे केंद्रीय मंत्री, इतिहास तोड़-मरोड़कर दिखाने का आरोप लगाया

केंद्रीय मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू ने दिलजीत दोसांझ की फिल्म 'सतलुज' को लेकर उनपर कई आरोप लगाए हैं. उन्होंने दिलजीत की विदेश में सुरक्षा और फिल्म की फंडिंग को लेकर भी सवाल उठाए हैं. केंद्रीय मंत्री ने दावा किया कि फिल्म में दिलजीत के पैसे लगे हैं.

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रवनीत सिंह बिट्टू ने दिलजीत दोसांझ पर गंभीर आरोप लगाए. (Photo- PTI) रवनीत सिंह बिट्टू ने दिलजीत दोसांझ पर गंभीर आरोप लगाए. (Photo- PTI)

कमलजीत संधू

  • नई दिल्ली,
  • 08 जुलाई 2026,
  • अपडेटेड 4:59 PM IST

एक्टर और सिंगर दिलजीत दोसांझ की फिल्म सतलुज को लेकर विवाद जारी है. बॉलीवुड से लेकर राजनीति तक में इसे लेकर बयानबाजी चल रही है. अब केंद्रीय मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू ने सतलुज को लेकर दिलजीत दोसांझ पर निशाना साधा है और उनपर कई आरोप लगाए हैं. 

केंद्रीय मंत्री बिट्टू ने दिलजीत की फिल्म, उनके विदेश में रहने और सुरक्षा को लेकर दिए जा रहे बयानों पर कई सवाल खड़े किए हैं. उन्होंने दिलजीत की सुरक्षा के दावों को लेकर कहा कि वो विदेश में सुरक्षित बैठकर अपनी और अपने परिवार की जान का खतरा बता रहे हैं. 

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रवनीत बिट्टू ने दावा किया कि दिलजीत दोसांझ की इस नई फिल्म में खुद उनके पैसे लगे हुए हैं. उन्होंने आरोप लगाया कि फिल्म को लेकर पहले तो सेंसर बोर्ड के साथ एक लंबी लड़ाई दिखाई गई और फिर उन्होंने खुद ही फिल्म को डाउनलोड करने की बातें कहीं.

इतिहास को तोड़-मरोड़कर पेश करने के आरोप

रवनीत बिट्टू ने इतिहास की कुछ अहम तारीखों और घटनाओं का भी जिक्र किया. उन्होंने बताया कि 31 अगस्त को पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री बेअंत सिंह शहीद हुए थे. इसके बाद 6 सितंबर को पुलिस ने जसवंत सिंह खालड़ा को गिरफ्तार किया था. बिट्टू ने कहा कि जब जसवंत सिंह खालड़ा की गिरफ्तारी हुई, तब बेअंत सिंह न तो पंजाब के मुख्यमंत्री पद पर थे और न ही इस दुनिया में थे. उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि तथ्यों को तोड़-मरोड़कर पेश नहीं किया जाना चाहिए.

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क्या है पूरा मामला?

दरअसल दिलजीत दोसांझ स्टारर फिल्म सतलुज को 3 जुलाई को ओटीटी प्लेटफॉर्म जी5 पर रिलीज किया गया था. लेकिन रिलीज के दो दिन बाद ही इसे ओटीटी से हटा दिया गया. जिसे लेकर काफी हंगामा हो रहा है.

बता दें कि सतलुज पंजाब में मानवाधिकार कार्यकर्ता जसवंत सिंह खालड़ा के जीवन पर बनी फिल्म है. खालड़ा ने पंजाब में उग्रवाद के दौर में पुलिस के किए कई अवैध हत्याओं और गुप्त रूप से शवों का अंतिम संस्कार किए जाने के मामलों का पर्दाफाश किया था.

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