लाल किला धमाके के आरोपी लखनऊ में करने वाले थे सीरियल ब्लास्ट, NIA का बड़ा खुलासा

लाल किला कार धमाका मामले की जांच में NIA को बड़ा सुराग मिला है. आरोपियों ने लखनऊ में विधानसभा समेत कई अहम और भीड़भाड़ वाले इलाकों को निशाना बनाकर सिलसिलेवार धमाकों की साजिश रची थी. जांच में रेकी, विस्फोटक केमिकल और गुप्त ठिकाने की तलाश तक के कई चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं.

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NIA raids schools, ex-JeI chief’s house in Kashmir terror funding probe. (File Photo) NIA raids schools, ex-JeI chief’s house in Kashmir terror funding probe. (File Photo)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 25 मई 2026,
  • अपडेटेड 7:24 PM IST

दिल्ली के लाल किला कार धमाका मामले की जांच में राष्ट्रीय जांच एजेंसी को एक बेहद चौंकाने वाला सुराग मिला है. आरोपियों ने लखनऊ में सिलसिलेवार आतंकी हमले करने की साजिश रची थी. इस साजिश के तहत विधानसभा, बापू भवन और कई भीड़भाड़ वाले इलाकों को निशाना बनाने की तैयारी की जा रही थी.

NIA ने सोमवार को बताया कि इस आतंकी साजिश के दो मुख्य आरोपी डॉ. मुजम्मिल शकील और डॉ. शाहीन सईद 25 से 30 अगस्त 2025 के बीच हरियाणा के फरीदाबाद से लखनऊ पहुंचे थे. जांच में सामने आया है कि यह यात्रा कोई सामान्य दौरा नहीं, बल्कि सोची समझी साजिश थी, जिसके तहत रेकी की गई थी. 

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सूत्रों के मुताबिक, डॉ. मुजम्मिल शकील ने उत्तर प्रदेश सरकार के प्रतीक माने जाने वाले कई संवेदनशील इलाकों की रेकी की थी. इनमें विधानसभा, बापू भवन (सिविल सचिवालय), इमामबाड़ा, लाल बाग और अमीनाबाद जैसे भीड़भाड़ वाले इलाके शामिल थे. आरोपियों को ये जगहें अपने मिशन के लिए उपयुक्त लगी थीं. 

आरोपियों की योजना इन इमारतों के पास विस्फोटकों से भरी कार में धमाका करने की थी. जांच में यह भी खुलासा हुआ है कि मुजम्मिल ने अपने मोबाइल फोन से लखनऊ में उन केमिकल दुकानों की तलाश की थी, जहां 'ट्राईएसीटोन ट्राईपरऑक्साइड' (TATP) बनाने के लिए जरूरी प्रीकर्सर केमिकल मिल सकते थे. 

TATP एक बेहद खतरनाक और अस्थिर विस्फोटक है, जिसे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर 'मदर ऑफ सैटन' के नाम से जाना जाता है. इसी विस्फोटक का इस्तेमाल पिछले साल 10 नवंबर को दिल्ली के लाल किला कार धमाके में किया गया था. मुजम्मिल के कहने पर शाहीन ने इन दुकानों के नाम एक कागज पर लिखे थे. 

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इसे बाद में NIA ने शाहीन के फोन से यह लिस्ट बरामद किया था. जांच में यह भी सामने आया है कि दोनों आरोपी लखनऊ में शाहीन के एक रिश्तेदार के घर पर रुके थे. शाहीन का पुश्तैनी घर लाल बाग के खंडारी बाजार इलाके में बताया गया है, जहां उसके पिता अलग रहते हैं.

इसके बाद मुजम्मिल ने एक स्थानीय व्यक्ति को अपने साथ लिया, जो लखनऊ का रहने वाला था और शहर से अच्छी तरह वाकिफ था. आरोप है कि मुजम्मिल ने उसे उन केमिकल दुकानों पर भेजा, ताकि वह बिना शक पैदा किए यह पता लगा सके कि वहां बड़ी मात्रा में ये केमिकल उपलब्ध हैं या नहीं. 

जांच एजेंसियों का मानना है कि बाहरी व्यक्ति होने की वजह से मुजम्मिल खुद ऐसी पूछताछ करने से बचना चाहता था. यह भी पता चला कि आरोपियों ने शहर के किसी दूरदराज इलाके में ऐसी जगह तलाशने की कोशिश की थी, जहां चोरी-छिपे बम बनाने का काम किया जा सके. 

बताया गया है कि वे फरीदाबाद के खोरी जमालपुर स्थित किराए के मकान की तरह ही लखनऊ में भी एक गुप्त ठिकाना बनाना चाहते थे. NIA ने कई चश्मदीद गवाहों के बयान, तकनीकी विश्लेषण और पैसों के लेन-देन के सुरागों के आधार पर लखनऊ यात्रा की पूरी कड़ी जोड़ ली है. 

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यह पूरा खुलासा NIA द्वारा 14 मई को दाखिल की गई 7,500 पन्नों की विशाल चार्जशीट का हिस्सा है. इसमें कहा गया है कि 'अंसार गजवत-उल-हिंद' के आतंकी मॉड्यूल, जिसका संबंध 'अल-कायदा इन द इंडियन सबकॉन्टिनेंट' से बताया गया है, का मकसद लखनऊ में एक गुप्त ठिकाना बनाना था. 

इसके जरिए लाल किला धमाके जैसी तकनीक का इस्तेमाल कर सिलसिलेवार धमाकों को अंजाम देने की योजना थी. हालांकि, जांच एजेंसियों ने समय रहते इस मॉड्यूल का भंडाफोड़ कर दिया, जिससे उनकी योजना नाकाम हो गई. इस मॉड्यूल को "व्हाइट-कॉलर" मॉड्यूल कहा जाता था.

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