क्रूरता की हदें पार... पाकिस्तान ने PoK में लगाया 'अघोषित कर्फ्यू', 30 लाख लोग दाने-दाने को मोहताज, इंटरनेट भी ठप

जेकेएचआरओ की रिपोर्ट में PoK में 5 जून से 14 जुलाई के बीच मानवाधिकार उल्लंघन के गंभीर आरोप लगाए गए हैं. रावलाकोट में 39 दिनों से कर्फ्यू जैसे हालात हैं. रिपोर्ट में 50 से अधिक मौतों का दावा है, जिनमें से 34 की पुष्टि हुई है. हजारों गिरफ्तारियां, इंटरनेट बंदी और जरूरी सेवाओं में रुकावट के आरोप भी शामिल हैं.

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PoK में कानून-व्यवस्था से आगे बढ़ा मानवीय संकट (Photo: Reuters) PoK में कानून-व्यवस्था से आगे बढ़ा मानवीय संकट (Photo: Reuters)

अरविंद ओझा

  • नई दिल्ली,
  • 16 जुलाई 2026,
  • अपडेटेड 2:54 PM IST

पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) संकट पर जम्मू-कश्मीर ह्यूमन राइट्स ऑब्जर्वेटरी (जेकेएचआरओ) की रिपोर्ट में गोलीबारी, गिरफ्तारियों और इंटरनेट बंदी के गंभीर आरोप लगाए गए हैं. जेकेएचआरओ ने पाकिस्तान अधिकृत जम्मू-कश्मीर की स्थिति पर एक नई रिपोर्ट जारी की है. यह रिपोर्ट 5 जून से 14 जुलाई तक की अवधि को कवर करती है. रिपोर्ट में कहा गया है कि रावलाकोट में 39 दिनों से ज्यादा समय से कर्फ्यू जैसे हालात बने हुए हैं और 60,000 से अधिक लोग आंदोलन में शामिल हुए हैं.

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रिपोर्ट के मुताबिक, इस दौरान प्रदर्शनकारियों पर अत्यधिक बल का इस्तेमाल किया गया. मनमानी गिरफ्तारियां हुईं और कई लोगों को हिरासत में लिया गया. कुछ लोगों के लापता होने की शिकायतें भी सामने आई हैं. 

आरोप है कि मृतकों के शव उनके परिजनों को सौंपने में जानबूझकर देरी की गई. घरों पर छापे मारे गए, संपत्तियों को नुकसान पहुंचाया गया और लोगों के खिलाफ आर्थिक कार्रवाई भी की गई. इंटरनेट, मोबाइल और अन्य संचार सेवाओं पर रोक लगाई गई, जिससे भोजन, दवाइयां, शिशु आहार, परिवहन और स्वास्थ्य सेवाओं तक लोगों की पहुंच प्रभावित हुई.

रिपोर्ट में 50 से अधिक मौतों का दावा किया गया है. हालांकि जेकेएचआरओ ने बताया कि उसने स्वयंसेवकों, स्थानीय पत्रकारों और निवासियों की मदद से अभी तक 34 मौतों की ही पुष्टि की है. 

यह भी पढ़ें: PoK का बवाल थमा भी नहीं कि इमरान की पार्टी ने मुनीर-शहबाज को दे दिया नया टेंशन

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रिपोर्ट के अनुसार, सैकड़ों लोग घायल हुए हैं और हजारों लोगों को गिरफ्तार या हिरासत में लिया गया है. संगठन का कहना है कि इन प्रतिबंधों से 30 लाख से ज्यादा लोग प्रभावित हो सकते हैं.

रिपोर्ट में कुछ खास घटनाओं का भी जिक्र किया गया है. 5 जुलाई को डडियाल में गोलीबारी हुई. 9 जुलाई को कोटेरी में कार्रवाई की गई. 11 जुलाई को जंदाला क्रॉस में फायरिंग हुई और 14 जुलाई को बलोच बस स्टैंड तथा मुत्यालमेरा में कार्रवाई हुई. इन सभी घटनाओं में नागरिकों की मौत और उनके घायल होने के आरोप लगाए गए हैं.

जेकेएचआरओ ने कई मांगें भी रखी हैं. संगठन चाहता है कि एक स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच आयोग बनाया जाए. मृतकों, घायलों, हिरासत में लिए गए और लापता लोगों की आधिकारिक सूची जारी करने की मांग भी की गई है. 

साथ ही मानवीय सहायता और स्वास्थ्य सेवाओं तक बिना रुकावट पहुंच सुनिश्चित करने, इंटरनेट और संचार सेवाएं बहाल करने, स्वतंत्र पत्रकारों और मानवाधिकार संगठनों को क्षेत्र में जाने देने और प्रदर्शनकारियों तथा प्रशासन के बीच स्वतंत्र मध्यस्थता से बातचीत शुरू कराने की मांग की गई है.

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