देश में मेफेड्रोन ड्रग्स के बढ़ते जाल को तोड़ने के लिए केंद्र सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया है. नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB) के मुताबिक, सरकार ने मेफेड्रोन ड्रग बनाने में इस्तेमाल होने वाले केमिकल '2-ब्रोमो-4-मिथाइलप्रोपियोफेनोन' को अब 'कंट्रोल सब्सटेंस' (नियंत्रित पदार्थ) घोषित कर दिया है.
NCB ने सोमवार को जानकारी दी कि केंद्र सरकार ने इसे एंटी-नारकोटिक्स कानून के तहत नियंत्रित पदार्थ घोषित किया है. ऐसा इसलिए किया गया है क्योंकि इस केमिकल का इस्तेमाल मेफेड्रोन (एक साइकोट्रोपिक ड्रग) बनाने में बढ़ रहा है.
बता दें, मेफेड्रोन एक सिंथेटिक स्टिमुलेंट ड्रग है, जिसे 'M-CAT', 'म्याऊ-म्याऊ' और MD जैसे नामों से भी जाना जाता है.
NCB ने एक बयान में कहा कि अब इस केमिकल के इस्तेमाल पर नजर रखी जाएगी. बयान के अनुसार, वित्त मंत्रालय के तहत राजस्व विभाग ने 11 मार्च को यह नोटिफिकेशन जारी किया था.
इसमें कहा गया है कि जो भी व्यक्ति या संस्था '2-ब्रोमो-4-मिथाइलप्रोपियोफेनोन' के निर्माण, वितरण, बिक्री, खरीद, कब्जे, भंडारण, खपत, आयात, निर्यात, या बिक्री के लिए इसकी पेशकश करने, या इसकी बिक्री व खरीद में मध्यस्थता करने (किसी भी वेबसाइट, सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म या अन्य इलेक्ट्रॉनिक माध्यमों सहित) के काम में शामिल हैं, उन्हें NCB से रजिस्ट्रेशन नंबर लेना होगा.
न्यूज एजेंसी पीटीआई के मुताबिक, इसमें यह भी बताया गया है कि जिन संस्थाओं के पास इस केमिकल का स्टॉक है, उन्हें 30 जून 2026 तक के मौजूद स्टॉक की जानकारी तय फॉर्म का इस्तेमाल करके 10 जुलाई या उससे पहले संबंधित NCB ऑफिस में देनी होगी.
बयान में कहा गया, 7 सितंबर 2026 के बाद NDPS एक्ट, 1985 के प्रावधानों का उल्लंघन करते हुए इस पदार्थ का लेन-देन करने वाला कोई भी व्यक्ति या संस्था NDPS एक्ट की धारा 25A (उल्लंघन के लिए सजा) के तहत दंडात्मक कार्रवाई का भागीदार होगा.
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