Mathura case: मुस्लिम पक्ष के वकील बोले- मंदिर ट्रस्ट को आपत्ति नहीं, बाहरी लोग डाल रहे याचिका

मथुरा कृष्ण जन्मभूमि मंदिर और शाही ईदगाह मस्जिद से जुड़ी एक याचिका पर आज सिविल कोर्ट में सुनवाई हुई. इससे पहले मुस्लिम पक्ष के वकील का बयान आया है.

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मथुरा में श्री कृष्ण जन्मभूमि मंदिर और शाही ईदगाह मस्जिद का एक दृश्य (PTI) मथुरा में श्री कृष्ण जन्मभूमि मंदिर और शाही ईदगाह मस्जिद का एक दृश्य (PTI)

अनीषा माथुर

  • नई दिल्ली,
  • 25 मई 2022,
  • अपडेटेड 1:01 PM IST
  • 3.37 एकड़ भूमि के मालिकाना हक का विवाद है
  • मथुरा कोर्ट ने कहा था कि सिविल कोर्ट याचिकाओं को सुनेगा

मथुरा की शाही ईदगाह मस्जिद से जुड़े मामले पर मुस्लिम पक्ष के वकील ने बड़ी बात कही है. वह बोले कि 1968 के पुराने समझौते पर मंदिर ट्रस्ट ने कभी आपत्ति नहीं जताई है और इस मामले पर बाहरी लोग याचिका दायर कर रहे हैं. इस मामले पर आज मथुरा कोर्ट में सुनवाई हुई. कोर्ट ने फिलहाल सुनवाई को 31 मई तक के लिए टाल दिया है.

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जिला जज ने मामला संजय चौधरी (एडिशनल जिला जज) के समक्ष भेजा था. मथुरा केस पर कल भी सुनवाई होनी है, उस याचिका पर सिविल जज सीनियर डिविजन सुनवाई करेंगे.

सुनवाई से पहले आजतक से बात करते हुए मुस्लिम पक्ष के वकील तनवीर अहमद ने कहा कि मथुरा के मामले में कई याचिकाएं दायर हो चुकी हैं. उन्होंने कहा कि जिला जज ने सिविल कोर्ट में इस मामले को इसलिए ट्रांसफर किया है क्योंकि पहले इसे बिना सुनवाई के खारिज कर दिया गया था.

यह भी पढ़ें - काशी-मथुरा में मंदिर के लिए कानूनी लड़ाई, 1991 का एक्ट बन रहा है अड़चन, क्या होगा आगे का रास्ता?

मथुरा की शाही ईदगाह ट्रस्ट के एडवोकेट तनवीर अहमद ने कहा कि यह बेहद अजीब है कि कृष्ण जन्मभूमि ट्रस्ट और संस्थान (Krishna Janmabhoomi trust) ने अबतक इस मामले पर कोई स्टैंड नहीं लिया है, जबकि हिंदू याचिकाकर्ताओं ने उनको पार्टी बनाया हुआ है. जब याचिकाकर्ता मीडिया से बात कर रहे हैं तो ऐसा लगता है कि वे ट्रस्ट की तरफ से बोल रहे हैं.

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मथुरा कोर्ट ने स्वीकार की थी याचिका

पिछले हफ्ते 19 मई को इस मामले पर मथुरा कोर्ट में सुनवाई हुई थी. मथुरा कोर्ट ने ईदगाह से जुड़ी इस याचिका को सुनने योग्य मानते हुए स्वीकार किया था. कोर्ट ने कहा था कि इस मामले की सुनवाई सिविल कोर्ट करेगा.

मथुरा कोर्ट ने स्वीकार की थी याचिका

पिछले हफ्ते 19 मई को इस मामले पर मथुरा कोर्ट में सुनवाई हुई थी. मथुरा कोर्ट ने ईदगाह से जुड़ी इस याचिका को सुनने योग्य मानते हुए स्वीकार किया था. कोर्ट ने कहा था कि इस मामले की सुनवाई सिविल कोर्ट करेगा.

इस याचिका में कृष्ण जन्मभूमि के पास मौजूद शाही ईदगाह मस्जिद को हटाने की मांग हुई है. याचिका में कहा गया था कि शाही ईदगाह मस्जिद कृष्ण जन्मभूमि के ऊपर बनी है, इसलिए उसे हटाया जाना चाहिए.

इस मामले में अधिवक्ता रंजना अग्निहोत्री (जोकि खुद के कृष्ण भक्त होने का दावा करती हैं) समेत 6 वादी हैं. ये अपील साल 2020 में दायर की गई थी, जिसमें शाही ईदगाह की जमीन पर मालिकाना हक मिलने का दावा किया गया था.

मथुरा कृष्ण जन्मभूमि और ईदगाह विवाद क्या है?

यह 13.37 एकड़ भूमि के मालिकाना हक का विवाद है. इसमें 10.9 एकड़ जमीन श्री कृष्ण जन्मस्थान के पास और 2.5 जमीन शाही ईदगाह मस्जिद के पास है. सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता हरिशंकर जैन, विष्णु शंकर जैन, रंजना अग्निहोत्री ने वाद दायर किया था.

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हिंदुओं का दावा है कि काशी और मथुरा में औरंगजेब ने मंदिर तुड़वाकर वहां मस्जिद बनवाई थी. औरंगजेब ने 1669 में काशी में विश्वनाथ मंदिर तुड़वाया था और 1670 में मथुरा में भगवा केशवदेव का मंदिर तोड़ने का फरमान जारी किया था.

फिर काशी में ज्ञानवापी मस्जिद और मथुरा में शाही ईदगाह मस्जिद बनी थी. मथुरा में इस विवाद की चर्चा पिछले साल शुरू हुई थी, तब अखिल भारत हिंदू महासभा ने ईदगाह मस्जिद के अंदर भगवान श्रीकृष्ण की मूर्ति स्थापित करने और उसका जलाभिषेक करने का ऐलान किया था. हालांकि, हिंदू महासभा ऐसा कर नहीं सकी थी. इसके बाद उत्तर प्रदेश चुनाव में 'मथुरा की बारी है...' जैसे नारे भी खूब लगे थे.

 

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