कैसे होता है किडनी ट्रांसप्लांट? एक Kidney के साथ कैसा होता है जीवन?

लंबे समय से बीमार लालू यादव की किडनी ट्रांसप्लांट की सर्जरी हो गई है. उन्हें उनकी दूसरी बेटी रोहिणी आचार्य ने किडनी डोनेट की. लालू यादव के बेटे तेजस्वी यादव ने बताया था कि सारी जांच के बाद रोहिणी की किडनी सबसे बेहतर मैच हुई. जानते हैं कि क्या एक किडनी के सहारे जिंदगी गुजारना कैसा होता है?

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दुनिया में 750 में से एक व्यक्ति एक ही किडनी के साथ पैदा होता है. (फाइल फोटो) दुनिया में 750 में से एक व्यक्ति एक ही किडनी के साथ पैदा होता है. (फाइल फोटो)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 05 दिसंबर 2022,
  • अपडेटेड 2:05 PM IST

राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के प्रमुख लालू प्रसाद यादव की किडनी ट्रांसप्लांट की सर्जरी हो गई. लालू यादव लंबे समय से बीमार हैं और डॉक्टरों ने किडनी ट्रांसप्लांट की सलाह दी थी. लालू यादव को उनकी ही बेटी रोहिणी आचार्य ने किडनी डोनेट की. रोहिणी उनकी दूसरी बेटी हैं.

ये ऑपरेशन सिंगापुर के एक निजी अस्पताल में हुआ. लालू यादव अपने परिवार के साथ 25 नवंबर को सिंगापुर रवाना हो गए थे. जानकारी के मुताबिक, लालू यादव और उनकी बेटी रोहिणी को रविवार को अस्पताल में भर्ती किया गया था. 

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इससे पहले शनिवार को रोहिणी ने अपने पिता के साथ तस्वीर साझा की थी. इसके साथ उन्होंने लिखा था, 'मैंने भगवान को नहीं देखा, लेकिन भगवान के रूप में अपने पिता को देखा है.'

रोहिणी ही क्यों डोनेट कर रहीं किडनी?

लालू यादव के बेटे तेजस्वी यादव ने कुछ हफ्तों पहले बताया था कि डॉक्टरों ने सलाह दी थी कि परिवार से ही कोई सदस्य किडनी डोनेट करे तो बेहतर है. मेरी बहन रोहिणी ने जांच कराई तो सबसे अच्छा मैच उन्हीं से हुआ.

ट्रांसप्लांटेशन ऑफ ह्यूमन ऑर्गन्स एंड टिशू एक्ट के मुताबिक, आमतौर पर डोनर और रिसीवर के बीच खून का रिश्ता होता है. जैसे- माता-पिता, भाई-बहन, बच्चे, दादा-दादी और नाती. पत्नी को भी इसमें शामिल किया जाता है और वो भी जिंदा रहते हुए पति को अंग दान कर सकती है.

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इसके अलावा अगर मरीज का कोई दोस्त या करीबी अपनी मर्जी से अंग दान करना चाहता है तो उसे भी इसकी इजाजत रहती है.

अगर आप जिंदा हैं और अंग दान करना चाहते हैं तो इसके लिए आपकी उम्र 18 साल से ज्यादा होनी चाहिए. किडनी और लिवर 70 साल की उम्र तक डोनेट किए जा सकते हैं. 

कैसे होता है किडनी ट्रांसप्लांट?

सबसे पहले तो सारी जरूरी जांचें की जाती हैं. सबसे ज्यादा समय किडनी ट्रांसप्लांट में लगता है. क्योंकि, इसमें सिर्फ ब्लड ग्रुप का ही मैच जरूरी नहीं होता, बल्कि टिशूज का मैच होना भी जरूरी है. अगर सही मैच हो जाता है तो बेहतर रिजल्ट मिलते हैं.

ट्रांसप्लांट में सर्जरी के जरिए एक व्यक्ति से अंग निकाला जाता है और दूसरे व्यक्ति में लगाया जाता है. इसकी जरूरत तब पड़ती है जब मरीज का वो अंग काम नहीं करता या फिर किसी चोट या बीमारी से क्षतिग्रस्त हो जाता है.

सर्जरी के दौरान डोनर के शरीर से किडनी निकालकर मरीज के शरीर में ट्रांसप्लांट की जाती है. ऐसे में मरीज के शरीर में तीन किडनी हो जाती है और डोनर के पास एक ही रहती है.

क्या एक किडनी पर जीना संभव है?

नेशनल ऑर्गन एंड टिशू ट्रांसप्लांट ऑर्गनाइजेशन (NOTTO) के मुताबिक, किडनी एक ऐसा अंग है जिसे जीवित व्यक्ति सबसे ज्यादा डोनेट करते हैं. क्योंकि एक स्वस्थ व्यक्ति के लिए एक किडनी भी काफी है. और वो बाकी लोगों की तरह ही सामान्य जीवन बिता सकता है.

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इसके अलावा, मृत व्यक्ति की किडनी को दूसरे मरीज के शरीर में ट्रांसप्लांट करने पर कई बार उतने बेहतर रिजल्ट सामने नहीं आता, लेकिन जीवित व्यक्ति की किडनी से मरीज का जीवन भी सामान्य हो जाता है.

ऑस्ट्रेलिया स्थित किडनी हेल्थ ऑर्गनाइजेशन के मुताबिक, 750 में से एक व्यक्ति एक ही किडनी के साथ पैदा होता है. इसके अलावा बीमारियों या फिर दूसरी वजहों से भी कई बार एक किडनी निकाल दी जाती है. 

दोनों किडनियां बराबर यानी 50-50 फीसदी काम करती हैं. लेकिन जब कोई व्यक्ति एक ही किडनी के साथ पैदा होता है या किसी कारण से दूसरी किडनी हटा दी जाती है तो वो 75 फीसदी तक काम कर सकती है. इसलिए एक किडनी होने पर भी जीवन सामान्य होता है. 

किडनी ऑर्गनाइजेशन के मुताबिक, अगर बचपन से ही एक किडनी है तो 25 साल की उम्र के बाद थोड़ी परेशानियां आ सकती हैं, लेकिन 25 साल के बाद अगर एक किडनी डोनेट करते हैं या हटाई जाती है तो कोई समस्या नहीं आती है. हालांकि, एक किडनी वाले लोगों को कराटे या किकबॉक्सिंग जैसे खेल न खेलने की सलाह दी जाती है.

 

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