देश के खिलाफ युद्ध छेड़ने की सजा, कश्मीरी अलगाववादी आसिया अंद्राबी को मिली उम्रकैद

दिल्ली की एक विशेष अदालत ने कश्मीरी अलगाववादी नेता आसिया अंद्राबी को उम्रकैद और उनकी सहयोगियों को 30-30 साल की सजा सुनाई है. तीनों को यूएपीए और आईपीसी की विभिन्न धाराओं के तहत दोषी ठहराया गया.

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कश्मीर की कट्टरपंथी अलगाववादी नेता आसिया अंद्राबी (दाहिनी ओर) और उनकी तीन अन्य साथी. (File Photo:ITG) कश्मीर की कट्टरपंथी अलगाववादी नेता आसिया अंद्राबी (दाहिनी ओर) और उनकी तीन अन्य साथी. (File Photo:ITG)

अनीषा माथुर

  • नई दिल्ली,
  • 24 मार्च 2026,
  • अपडेटेड 5:30 PM IST

दिल्ली की एक विशेष अदालत ने मंगलवार को कश्मीरी अलगाववादी आसिया अंद्राबी को गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (UAPA) के तहत आतंक से जुड़े एक मामले में आजीवन कारावास की सजा सुनाई. उनकी सहयोगी सोफी फहमीदा और नाहिदा नसरीन को 30-30 साल की सजा दी गई. अदालत ने तीनों को इस साल 14 जनवरी को प्रतिबंधित संगठन दुख्तरान-ए-मिल्लत (DeM) से जुड़ी गतिविधियों में शामिल होने का दोषी ठहराया था. 

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यह संगठन जम्मू-कश्मीर को भारत से अलग करने की मांग करता रहा है और इसकी स्थापना आसिया अंद्राबी ने ही की थी. अदालत ने आसिया को यूएपीए की कई धाराओं के तहत दोषी पाया, जिनमें धारा 18 (साजिश) और धारा 38 (आतंकी संगठन की सदस्यता) शामिल हैं. इसके अलावा उन्हें भारतीय दंड संहिता (IPC) की उन धाराओं में भी दोषी ठहराया गया, जो आपराधिक साजिश और देश के खिलाफ युद्ध छेड़ने से संबंधित हैं. 

राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने अदालत से अंद्राबी के लिए उम्रकैद की सजा की मांग की थी. एजेंसी का कहना था कि उन्होंने भारत के खिलाफ युद्ध छेड़ा और ऐसी गतिविधियों को रोकने के लिए कड़ा संदेश देना जरूरी है. एनआईए के अनुसार, आरोपियों ने अपने प्रतिबंधित संगठन दुख्तरान-ए-मिल्लत के जरिए जम्मू-कश्मीर में अशांति फैलाने और अलगाववाद को बढ़ावा देने का काम किया. एजेंसी ने अदालत को यह भी बताया कि अंद्राबी के खिलाफ जम्मू-कश्मीर में कुल 33 एफआई दर्ज हैं, जबकि फहमीदा और नसरीन के खिलाफ क्रमशः 9 और 5 मामले दर्ज हैं. 

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यह भी पढ़ें: 1990 के J-K एयरफोर्स हमला मामले में हुई गवाही, चश्मदीद ने अलगाववादी यासीन मलिक की पहचान की

कौन हैं आसिया अंद्राबी?

आसिया ने दुख्तरान-ए-मिल्लत की शुरुआत एक रूढ़िवादी इस्लामिक संगठन के रूप में की थी, लेकिन इसके पीछे वह अलगाववादी गतिविधियों में संलिप्त थीं. केंद्र सरकार ने 2018 में इसे आतंकवादी संगठन घोषित कर प्रतिबंध लगा दिया. 1963 में जन्मी अंद्राबी ने श्रीनगर के एक कॉलेज से होम साइंस में स्नातक किया. आगे की पढ़ाई के लिए दार्जिलिंग जाने की योजना थी, लेकिन उन्हें अनुमति नहीं मिली. बाद में उन्होंने इस्लामिक साहित्य की ओर रुख किया और जमात-ए-इस्लामी के महिला विंग से जुड़ीं, जिस पर 2019 में प्रतिबंध लगा दिया गया.

आसिया ने 1985 में जमात-ए-इस्लामी से अलग होकर दुख्तरान-ए-मिल्लत की स्थापना की. 1991 में इस संगठन ने कश्मीर में पर्दा प्रथा लागू करने के अभियान को लेकर सुर्खियां बटोरीं. 1990 में उन्होंने अलगाववादी नेता आशिक हुसैन फक्तू  से शादी की, जो फिलहाल 1992 में कश्मीरी पंडित नेता एच.एन. वांचू की हत्या के मामले में उम्रकैद की सजा काट रहे हैं. आसिया अंद्राबी दो बच्चों की मां हैं और 1993 में पहली बार गिरफ्तार हुई थीं, इसके बाद उन्हें कई बार हिरासत में लिया गया.

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