15 बार लूटने की कोशिश, फिर चाबी खोने से मचा हड़कंप... जानें- जगन्नाथ पुरी के रत्न भंडार में कितना सोना-चांदी

पुरी के भगवान जगन्नाथ मंदिर के रत्न भंडार को 48 साल बाद फिर से खोला गया है. इस ऐतिहासिक खजाने में सोने, चांदी और कीमती आभूषण शामिल हैं, जिनकी जांच और डॉक्यूमेंटेशन की जा रही है। रत्न भंडार का इतिहास 12वीं सदी से जुड़ा है और इसे राजा इंद्रद्युम्न का शाही खजाना माना जाता है.

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जगन्नाथ मंदिर में खजाने की इन्वेंट्री जारी है जगन्नाथ मंदिर में खजाने की इन्वेंट्री जारी है

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 26 मार्च 2026,
  • अपडेटेड 6:53 PM IST

ओडिशा के पुरी में मौजूद भगवान जगन्नाथ मंदिर का खजाना चर्चा में है. इसे रत्न भंडार के नाम से जाना जाता है. रत्न भंडार में मौजूद संपत्ति का डॉक्टूमेंटेशन किया जा रहा है, जिससे तकरीबन 48 साल बाद ये सामने आएगा कि रत्न भंडार में कितना सोना-चांदी है. इस तरह पुरी के इस प्रसिद्ध मंदिर के खजाने को लेकर दिलचस्पी बढ़ गई है. बुधवार को दोपहर 12 बजे के बाद से शुभ मुहूर्त में रत्न भंडार में क्या-क्या और कितना है इसकी जांच शुरू की गई है. 

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लेकिन क्या आप जानते हैं कि जगन्नाथ पुरी के रत्न भंडार का इतिहास क्या है?

क्या है रत्नभंडार का इतिहास?
पुरी के श्रीमंदिर में रत्न भंडार की मौजूदगी मंदिर के निर्माण के समय से ही है. यानी इसे भी 12वीं सदी के आसपास का माना जा सकता है. जगन्नाथ मंदिर से जुड़ी कहानियों में दो राजाओं इंद्रद्युम्न और राजा गालु माधव का जिक्र कई बार होता है. कहते हैं कि रत्न भंडार राजा इंद्रद्युम्न का ही शाही खजाना था, जिसे उन्होंने जन कल्याण के लिए भगवान नीलमाधव (जगन्नाथ महाप्रभु ) पर न्योछावर कर दिया था. तब देवी लक्ष्मी ने उन्हें वरदान दिया था कि वह खुद इस क्षेत्र में निवास करेंगी. उनकी कृपा से रत्न भंडार कभी खाली नहीं होगा.

किसने दिया सोना-चांदी
रत्न भंडार के दो कक्ष हैं, भीतर भंडार (आंतरिक खजाना) और बाहरी भंडार (बाहरी खजाना). ओडिशा मैग्जीन (राज्य सरकार की प्रकाशित पत्रिका) के अनुसार, राजा अनंगभीम देव ने भगवान जगन्नाथ के आभूषण तैयार करने के लिए बहुत बड़ी मात्रा में सोना दान किया था. बाहरी खजाने में भगवान जगन्नाथ के सोने से बने मुकुट, सोने के तीन हार (हरिदाकंठी माला) हैं, जिनमें से हर एक का वजन 120 तोला है. 

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भगवान के कौन-कौन से जेवर, क्या-क्या है रत्न भंडार में
रिपोर्ट में भगवान जगन्नाथ और बलभद्र के सोने से बने श्रीभुजा और श्रीपयार का भी जिक्र किया गया है. इसके मुताबिक आंतरिक खजाने में सोने के 74 आभूषण हैं, जिनमें से हरएक का वजन 100 तोला से अधिक है. सोने, हीरे, मूंगा और मोतियों से बनी प्लेटें हैं. इसके अलावा 140 से ज्यादा चांदी के आभूषण भी खजाने में रखे हुए हैं. भगवान जगन्नाथ की निधि होने के कारण पुरी मंदिर के रत्न भंडार को लेकर भक्तों में भी गहरी आस्था का भाव है. यह रत्न भंडार भगवान जगन्नाथ को चढ़ाए गए बहुमूल्य सोने और हीरे के आभूषणों का घर है.

कब-कब खोला गया रत्न भंडार?
रत्न भंडार को 48 साल पहले 13 मई 1978 को खोला गया था. तब ये प्रक्रिया 23 जुलाई 1978 तक चली थी. तब हुई गिनती में 454 सोने-मिश्रित वस्तुएं (128.38 किलो), 293 चांदी की वस्तुएं (221.53 किलो) और कई कीमती रत्न दर्ज किए गए थे. रत्न भंडार को 1905 और 1926 में भी खोला गया था. साल 2018 में रत्नभंडार की जानकारी को लेकर विधान सभा में बताया गया कि, रत्न भंडार में 12,831 भरी (एक भरी 11.66 ग्राम के बराबर) से ज्यादा सोने के जेवर हैं. इनमें कीमती पत्थर लगे हैं. साथ ही 22,153 भरी चांदी के बर्तन और दूसरे कीमती सामान भी हैं. 

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साल 2018... जब खो गई थी चाबी
ओडिशा हाईकोर्ट ने 2018 में राज्य सरकार को रत्न भंडार खोलने के लिए निर्देश दिए थे. 4 अप्रैल 2018 को कोर्ट के आदेश पर 16 लोगों की टीम रत्न भंडार तक पहुंची थी, लेकिन रत्न भंडार नहीं खोला जा सका, क्योंकि अचानक सामने आया कि इस भंडार की चाबी खो गई है.  तब सीएम थे नवीन पटनायक. उन्होंने 4 जून 2018 को न्यायिक जांच के आदेश दिए. जांच कमेटी ने 29 नवंबर 2018 को चाबी से जुड़ी अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंप दी, लेकिन सरकार ने इसे सार्वजनिक नहीं किया और चाबी का कुछ पता नहीं चल सका था.

भगवान लोकनाथ करते हैं सुरक्षा
अब दो साल बाद बुधवार को रत्न भंडार खोला गया है. इसे खोलने से पहले जरूरी परंपराओं का पालन किया गया है. भगवान जगन्नाथ और लोकनाथ से अनुमति ली गई है. लोकनाथ मंदिर जगन्नाथ मंदिर से ही दो किलोमीटर की दूरी पर है. यह एक शिवमंदिर है, जो रत्न भंडार के रखवाले भी हैं. बाबा लोकनाथ के रूप में शिवजी के गण ही श्रीरत्न क्षेत्र की रक्षा-सुरक्षा करते हैं. कहा जाता है कि रत्नभंडार की सुरक्षा दो दिव्य नाग पद्म और महापद्म करते हैं. रत्न भंडार में सांपों की मौजूदगी और अंजान सुरंग की भी काफी तरह की बातें सामने आती रही हैं, लेकिन कभी कुछ क्लियर नहीं हुआ.

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अब 48 साल बाद खुल रहे इस रत्न भंडार से न सिर्फ खजाने का सच सामने आएगा, बल्कि आस्था और इतिहास के कई नए रहस्य भी उजागर हो सकते हैं.

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