डंकी रूट का वह खतरनाक वीडियो, जिसके जरिए अमेरिका गए थे अवैध प्रवासी

भारतीय अधिकारियों के अनुसार, अमेरिका से निर्वासित अवैध भारतीय प्रवासियों में पंजाब, हरियाणा, गुजरात, उत्तर प्रदेश, गोवा, महाराष्ट्र, राजस्थान, हिमाचल प्रदेश और जम्मू-कश्मीर के निवासी शामिल हैं. इनमें से ज्यादातर की उम्र 18 से 30 साल के बीच है. अमेरिका से डिपोर्ट किए गए लोगों में अधिकतर पंजाब, गुजरात और हरियाणा के रहने वाले हैं.

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अमेरिका से डिपोर्ट किए गए अवैध भारतीय प्रवासी डंकी रूट से वहां तक पहुंचे थे. (Photo: Aajtak) अमेरिका से डिपोर्ट किए गए अवैध भारतीय प्रवासी डंकी रूट से वहां तक पहुंचे थे. (Photo: Aajtak)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 18 फरवरी 2025,
  • अपडेटेड 7:35 AM IST

अमेरिका से निर्वासित 112 अवैध भारतीय प्रवासियों को लेकर तीसरा विशेष विमान 16 फरवरी को अमृतसर अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर लैंड हुआ. इससे पहले अमेरिकी सैन्य विमान से 5 और 15 फरवरी को, क्रमश: 104 और 116 निर्वासित अवैध प्रवासियों के दो बैच अमृतसर में लैंड हुए थे. ये सभी वे भारतीय हैं जो लाखों रुपये खर्च करके एजेंट्स की मदद से अवैध मार्गों, जिन्हें 'डंकी रूट' कहा जाता है, उसके जरिए अमेरिका में प्रवेश करने के प्रयास में बॉर्डर पर पकड़े गए थे. उन्हें अमेरिकी अधिकारियों ने हिरासत में लेकर डिटेंशन कैम्प में रखा था और वापस भारत डिपोर्ट कर दिया.

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भारतीय अधिकारियों के अनुसार, अमेरिका से निर्वासित अवैध भारतीय प्रवासियों में पंजाब, हरियाणा, गुजरात, उत्तर प्रदेश, गोवा, महाराष्ट्र, राजस्थान, हिमाचल प्रदेश और जम्मू-कश्मीर के निवासी शामिल हैं. इनमें से ज्यादातर की उम्र 18 से 30 साल के बीच है. अमेरिका से डिपोर्ट किए गए लोगों में अधिकतर पंजाब, गुजरात और हरियाणा के रहने वाले हैं. अमेरिका से उन्हें वापस भेजे जाने के कारण उनके परिजन सदमे में हैं. क्योंकि अधिकतर अवैध अप्रवासियों ने लोन लेकर, जमीन और जेवर बेचकर अमेरिका जाने के लिए पैसों का इंतजाम किया था.

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अमेरिका से वापस भारत भेजे गए कुछ अवैध प्रवासियों ने उन डंकी रूट के वीडियो शेयर किए हैं, जिनके जरिए उन्हें एजेंट्स अमेरिका लेकर पहुंचे थे. इन वीडियो में भारतीयों के एक समूह को अवैध रूप से अमेरिका में प्रवेश करने के लिए अमेजन के जंगलों में पैदल यात्रा करते, नदी पार करते और तंबू में रहते, जंगलों में लकड़ी जलाकर खाना पकाते हुए देखा जा सकता है. अमेरिका से डिपोर्ट होकर अमृतसर पहुंचे लोगों में भारतीय सेना से रिटायर फौजी 38 वर्षीय मंदीप सिंह भी शामिल थे. वह अमृतसर के मकबूलपुरा के रहने वाले हैं.

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उन्होंने न्यूज एजेंसी एएनआई से अपने अनुभव साझा किए. मंदीप सिंह ने कहा कि मैं अमेरिका तो पहुंच गया, लेकिन अपनी सारी कमाई लुटा बैठा. फौज से रिटायरमेंट के बाद जो पैसे मिले थे, सब अमेरिका जाने के फितूर में गंवा बैठा. उन्होंने बताया कि मैक्सिको बॉर्डर से अमेरिका में प्रवेश करते समय वह पकड़ लिए गए थे. मंदीप को डिटेंशन सेंटर में रखा गया था. इस रिटायर्ड फौजी ने कहा, 'डंकी रूट के जरिए अमेरिका जाने का मेरा फैसल गलत था. यह एक तरह से मौत का रास्ता है. डंकी रूट से अमेरिका पहुंचने के लिए पहले फ्लाइट,​ फिर गाड़ियों से लंबी पात्रा करके कई देश पार करने पड़ते हैं.'

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मंदीप सिंह ने बताया कि वह भी पनामा के रास्ते 13 दिन पैदल चलकर अमेरिकी बॉर्डर तक पहुंचे थे. इस दौरान उन्हें घने जंगल, नदियां, दलदल और पहाड़ भी पार करने पड़े. कई दिनों तक भूखे-प्यासे रहना पड़ा. मंदीप के मुताबिक रात के अंधेरे में जंगलों से गुजरना, नदी और पहाड़ पार करना एक ऐसा डरावना अनुभव है, जिसे शब्दों में नहीं बयां किया जा सकता. एजेंट्स ने उनसे अमेरिका पहुंचाने के लिए 40 लाख रुपये लिए थे. अब उनके पास कुछ नहीं बचा. उन्होंने राज्य और केंद्र सरकार से उन एजेंट्स के खिलाफ कार्रवाई की मांग की, जो लोगों को अमेरिका में सेटल होने के सपने दिखाकर, उन्हें डंकी रूट फॉलो करवाते हैं और मोटे पैसे ऐंठते हैं.

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अमृतसर के घनश्यामपुर गांव के रहने वाले 21 वर्षीय हरप्रीत सिंह ने बताया कि उनके परिवार ने उन्हें अमेरिका भेजने के लिए अपनी जमीन बेच दी. एजेंट ने उन्हें इटली, स्पेन, ग्वाटेमाला और अन्य देशों से होते हुए 24 जनवरी को मैक्सिको बॉर्डर की दीवार पार करके अमेरिका में दाखिल करवाया. हरप्रीत ने बताया कि उन्हें एजेंट ने पहले से नहीं बता रखा था कि डंकी रूट के जरिए अमेरिका जाना पड़ेगा. उसने कहा था कि फ्लाइट से ले जाएंगे, कोई समस्या नहीं आएगी. स्पेन पहुंचने पर एजेंट ने हरप्रीत को बताया कि डंकी रूट लेना पड़ेगा. हरप्रीत ने बताया कि उनके माता-पिता ने जमीन बेचकर और कुछ कर्ज लेकर उन्हें अमेरिका भेजने के लिए 40 लाख रुपये का इंतजाम किया था. 

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हरप्रीत ने बताया कि अमेरिका में एंट्री करते ही उन्हें बॉर्डर पर गिरफ्तार कर लिया गया और डिटेंशन कैम्प में रखा गया. फिर 13 फरवरी को जहाज में बिठाया गया, मगर ये नहीं बताया गया कि कहां लेकर जा रहे हैं. हरप्रीत के मुताबिक अमेरिकी अधिकारियों में एक पाकिस्तानी मूल का था, जिसने बताया कि हमें वापस भारत भेजा जा रहा है. अमेरिका से निर्वासित पंजाब के गुरजिंदर सिंह (27) के एक रिश्तेदार ने खुलासा किया कि परिवार ने उन्हें विदेश भेजने के लिए लगभग 50-55 लाख रुपये खर्च किए थे, लेकिन उनकी उम्मीदें टूट गईं. पंजाब के एनआरआई मामलों के मंत्री कुलदीप सिंह धालीवाल ने अमृतसर हवाई अड्डे पर कुछ निर्वासित लोगों से मुलाकात की और उन्हें राज्य सरकार के समर्थन का आश्वासन दिया. उन्होंने पीड़ितों से उन्हें धोखा देने वाले ट्रैवल एजेंटो्स के खिलाफ शिकायत दर्ज करने का आग्रह किया और कहा कि सरकार उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई करेगी.

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