रेलवे की जमीन पर लगातार बढ़ रहा अतिक्रमण, पांच साल में 32% इजाफा, RTI से खुलासा

भारतीय रेलवे की जितनी जमीन अतिक्रमणकारियों के कब्जे में है, उतनी जमीन पर दुनिया के सबसे बड़े क्रिकेट मैदान नरेंद्र मोदी स्टेडियम जैसे 42 मैदान बन जाएंगे.

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रेलवे बोर्ड ने दी है 5 साल की जानकारी (Photo: PTI) रेलवे बोर्ड ने दी है 5 साल की जानकारी (Photo: PTI)

अशोक उपाध्याय

  • नई दिल्ली,
  • 13 जुलाई 2026,
  • अपडेटेड 3:29 PM IST

भारतीय रेलवे की जमीन पर अतिक्रमण के मामले लगातार बढ़ रहे हैं. सूचना का अधिकार अधिनियम (RTI) के तहत रेलवे बोर्ड ने यह जानकारी दी है कि मार्च, 2025 में रेलवे की 1068.54 हेक्टेयर जमीन पर अतिक्रमण था. रेलवे बोर्ड की ओर से इंडिया टुडे को मिली जानकारी के मुताबिक रेलवे की जितनी जमीन पर अतिक्रमण है, उतनी जमीन पर दुनिया के सबसे बड़े क्रिकेट स्टेडियम नरेंद्र मोदी स्टेडियम जैसे 42 स्टेडियमों का निर्माण हो सकता है .

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फीफा के मानकों के अनुरूप करीब 1396 फुटबॉल स्टेडियम का निर्माण इतनी जमीन में हो जाएगा. इंडिया टुडे ने आरटीआई के तहत रेलवे की जमीन पर अतिक्रमण का पिछले 25 वर्ष का रिकॉर्ड मांगा था. हालांकि, रेलवे बोर्ड ने पिछले पांच वर्ष का रिकॉर्ड ही उपलब्ध कराया. रेलवे बोर्ड की ओर से दी गई जानकारी के मुताबिक 2020-21 तक रेलवे की 810.31 हेक्टेयर जमीन पर अतिक्रमण था.

साल 2024-25 के मार्च में अतिक्रमण का शिकार हुई रेलवे की जमीन का आंकड़ा 1068.54 हेक्टेयर पहुंच गया. आंकड़ों के लिहाज से देखें तो अतिक्रमण की जद में आई जमीन का क्षेत्रफल इन पांच वर्षों में 32 फीसदी के करीब बढ़ा है. रेलवे बोर्ड की ओर से उपलब्ध कराए गए यह आंकड़े 27 मार्च 2026 को संसद में सरकार की ओर से दी गई जानकारी से भी मेल खाते हैं.

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सरकार ने संसद में यह जानकारी दी थी कि रेलवे के पास 1 अप्रैल 2025 तक 4.99 लाख हेक्टेयर जमीन थी. इसमें से लगभग 1068 हेक्टेयर जमीन अतिक्रमणकारियों के कब्जे में है. अब रेलवे बोर्ड की ओर से मिले आंकड़े भी यही कहानी बयान कर रहे हैं.

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पिछले पांच साल का ट्रेंड क्या

रेलवे की ओर से अतिक्रमण को लेकर जो आंकड़े दिए गए हैं, उनके मुताबिक वित्तीय वर्ष 2021-22 इकलौता ऐसा वर्ष रहा, जब अतिक्रमण का निगेटिव ट्रेंड नजर आता है. वित्तीय वर्ष 2021-22 में अतिक्रमण की गई जमीन का क्षेत्रफल घटकर 782.81 हेक्टेयर पर आ गया था, लेकिन अगले ही वर्ष इसमें बड़ा इजाफा देखने को मिला. 2023-24 में ही अतिक्रमणकारियों के कब्जे वाला एरिया बढ़कर 1078.55 हेक्टेयर पहुंच गया. 2024-25 में मामूली कमी आई, लेकिन ट्रेंड इजाफे का ही है.

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