2029 में ही लागू हो सकता है महिला आरक्षण, 50% सीटें बढ़ाने का फॉर्मूला तैयार!

भारत सरकार महिला आरक्षण अधिनियम को 2034 के बजाय 2029 से लागू करने की योजना बना रही है. इसके तहत लोकसभा और विधानसभा सीटों में 50% की वृद्धि प्रस्तावित है, जिससे महिलाओं के लिए 33% आरक्षण तय होगा. गृह मंत्री अमित शाह ने कई पार्टियों के साथ इस पर चर्चा की है.

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पहले ये बिल 2034 में लागू करने का प्लान था. (File Photo: ITG) पहले ये बिल 2034 में लागू करने का प्लान था. (File Photo: ITG)

अमित भारद्वाज

  • नई दिल्ली,
  • 25 मार्च 2026,
  • अपडेटेड 9:48 AM IST

बीजेपी सरकार 2034 के बजाय, देश में महिला आरक्षण अधिनियम को 2029 से लागू करने के बारे में सोच रही है. केंद्र (लोकसभा) और राज्य विधानसभाओं में महिला आरक्षण लाने पर विचार-विमर्श जारी है.

इंडिया टुडे/आज तक को सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, सीटों में बढ़ोतरी के लिए 50% 'स्ट्रेट जैकेट फॉर्मूला' प्रस्तावित है. गृह मंत्री अमित शाह 'नारी शक्ति वंदन अधिनियम' को लागू करने की प्रक्रियाओं को पारित कराने के लिए पार्टियों के छोटे समूहों के साथ बैठकें कर रहे हैं. 

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23 मार्च को, गृह मंत्री ने NCP-SP, शिवसेना (UBT), AIMIM और YSRCP के सदस्यों के साथ बैठक की. BRS आखिरी समय में सूचना मिलने के कारण बैठक में शामिल नहीं हो सकी.

सुप्रिया सुले, अरविंद सावंत, असदुद्दीन ओवैसी और मिधुन रेड्डी उन सदस्यों में शामिल थे जिन्होंने गृह मंत्री के साथ बैठक में भाग लिया. सरकार तीन बड़े संशोधन की तैयारी में है. सरकार की राय है कि 2034 की समय सीमा के बजाय, महिला आरक्षण को 2029 के लोकसभा चुनावों से ही लागू किया जाना चाहिए.

सदस्यों को बताया गया कि केंद्र को 2027 तक जनगणना पूरी होने की उम्मीद थी. इससे 2028 तक परिसीमन प्रक्रिया पूरी हो जाती और दूसरी प्रक्रियाएं उसके बाद होतीं. हालांकि, अब 2011 की जनगणना को आधार माना जा सकता है.

 50% सीटें बढ़ाने का फॉर्मूला तैयार!

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इसके तहत 50% स्ट्रेट जैकेट फॉर्मूला, महिलाओं के लिए वर्टिकल आरक्षण हो. अहम बात ये है कि सरकार ने लोकसभा और विधानसभा सीटों में सीधे 50% की बढ़ोतरी करने का प्रस्ताव दिया है. इससे लोकसभा की वर्तमान संख्या में 50% का इजाफा हो सकता है और संबंधित राज्यों में विधानसभाओं की संख्या में भी 50% की बढ़ोतरी की जाएगी।

महिला आरक्षण लागू होने के बाद लोकसभा की बढ़ी हुई संख्या (लगभग 813/814) में से 33% सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित होंगी. इन 33% आरक्षित सीटों के भीतर एससी/एसटी (SC/ST) आरक्षण को अलग से लागू किया जाएगा.

संवैधानिक संशोधनों के पारित होने के बाद लोकसभा और विधानसभा सीटों की परिसीमन प्रक्रिया शुरू हो सकती है. यूबीटी, एनसीपी-एसपी, वाईएसआरसीपी जैसी पार्टियों के सदस्यों को सूचित किया गया कि देश में परिसीमन की प्रक्रिया लंबित है. पिछले परिसीमन के 25 साल पूरे होने के बाद, सीटों के परिसीमन (और पुनरीक्षण) की प्रक्रिया शुरू की जानी थी.

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2029 में लागू हो सकता है 'नारी शक्ति वंदन अधिनियम'

लोकसभा और विधानसभा के लिए परिसीमन प्रक्रिया एक साथ शुरू की जा सकती है. बैठक में शामिल सदस्यों ने राज्यों पर प्रभाव, विधानसभा और लोकसभा क्षेत्रों के परिसीमन के मानदंडों के संबंध में कई सवाल उठाए. सूत्रों ने बताया कि एनसीपी-एसपी ने पूछा कि क्या ये बदलाव 2029 के लोकसभा चुनावों से पहले होने वाले विधानसभा चुनावों में भी लागू किए जाएंगे?

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कहा जा रहा है कि वाईएसआरसीपी ने आंध्र प्रदेश में लोकसभा और विधानसभा सीटों के इजाफे के बारे में इन बदलावों के प्रभाव पर सवाल उठाए हैं. एआईएमआईएम ने उस फॉर्मूले पर चिंता जाहिर की जिसका इस्तेमाल नए निर्वाचन क्षेत्रों को बनाने के लिए किया जा सकता है, विशेष रूप से उन मामलों में जहां आदिवासी, एससी और मुस्लिम मतदाताओं की संख्या काफी ज्यादा है.

दक्षिण भारत का परिसीमन पर ऐतराज

दक्षिण भारत के राजनीतिक दलों को जनसंख्या से जुड़े लोकसभा और विधानसभा सीटों के परिसीमन पर कड़ा ऐतराज रहा है. डीएमके, टीडीपी, वाईएसआरसीपी जैसी पार्टियों की राय है कि केंद्र सरकार के परिवार नियोजन कार्यक्रमों के बेहतर तरीके से लागू करने के लिए दक्षिण के राज्यों को सजा नहीं दी जानी चाहिए.

इसके अलावा, तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन और उनकी पार्टी डीएमके ने 2026 के जनसंख्या आधारित परिसीमन योजनाओं का विरोध करने के लिए JAC (संयुक्त कार्रवाई समिति) मंच बनाया था. सीएम स्टालिन ने इस पर विचार-विमर्श के लिए पंजाब के सीएम भगवंत मान सहित गैर-बीजेपी हितधारकों को बुलाया था.

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महिला आरक्षण को लागू करने के लिए सीटों में 50 प्रतिशत की सीधी बढ़ोतरी का फॉर्मूला और उससे जुड़ी परिसीमन प्रक्रिया इन चिंताओं को कम कर सकती है. दक्षिण के राज्यों के एक वरिष्ठ नेता ने कहा, 'अगर ये जनसंख्या से जुड़ा नहीं है, तो दक्षिण के राज्यों और क्षेत्रीय दलों को परिसीमन का विरोध नहीं करना चाहिए. वरना आपने हमें बेहतर परिवार नियोजन के लिए सजा नहीं दी होती. हालांकि, परिसीमन फॉर्मूले के लागू होने से जुड़े सवाल अभी भी बने हुए हैं.'

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