बीट रिपोर्ट: पाकिस्तान की हर चाल होगी नाकाम! अमित शाह ने बॉर्डर पर बिछा दिया सुरक्षा का अचूक जाल

केंद्र सरकार ने सीमावर्ती क्षेत्रों की सुरक्षा मजबूत करने के लिए नया बहुस्तरीय सुरक्षा मॉडल तैयार किया है. इसमें अवैध निर्माण, हवाला फंडिंग, फर्जी पहचान पत्र, म्यूल अकाउंट, घुसपैठ और नशीले पदार्थों की तस्करी पर एक साथ कार्रवाई की जाएगी. BSF, NIA, ED, NCB और अन्य एजेंसियां मिलकर काम करेंगी.

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सीमा सुरक्षा को आर्थिक और सामाजिक नेटवर्क से जोड़कर केंद्र ने तैयार किया नया सुरक्षा मॉडल (Photo: ITG) सीमा सुरक्षा को आर्थिक और सामाजिक नेटवर्क से जोड़कर केंद्र ने तैयार किया नया सुरक्षा मॉडल (Photo: ITG)

जितेंद्र बहादुर सिंह

  • नई दिल्ली,
  • 01 जून 2026,
  • अपडेटेड 5:21 PM IST

भारत की अंतरराष्ट्रीय सीमाओं की सुरक्षा को और मजबूत बनाने के लिए केंद्र सरकार ने एक व्यापक और बहुस्तरीय रणनीति तैयार की है. केंद्रीय गृह और सहकारिता मंत्री अमित शाह द्वारा राजस्थान के बीकानेर में आयोजित उच्चस्तरीय सुरक्षा समीक्षा बैठक के बाद सीमावर्ती क्षेत्रों में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए हैं. इन निर्णयों का उद्देश्य केवल सीमा की निगरानी बढ़ाना नहीं, बल्कि उन सभी गतिविधियों पर लगाम लगाना भी है जो राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा बन सकती हैं.

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सरकार का मानना है कि सीमा से सटे इलाकों में होने वाले अवैध निर्माण, फर्जी पहचान पत्रों का उपयोग, हवाला नेटवर्क, नशीले पदार्थों की तस्करी, अवैध घुसपैठ और आतंकी फंडिंग जैसे मुद्दे आपस में जुड़े हुए हैं. इसी कारण अब इन सभी पहलुओं पर एक साथ कार्रवाई करने की रणनीति बनाई गई है.

MHA की बैठक में 360 डिग्री सुरक्षा मॉडल पर जोर

गृह मंत्रालय ने सीमावर्ती जिलों के लिए एक '360 डिग्री सुरक्षा ग्रिड' विकसित करने का निर्णय लिया है. इस मॉडल के अंतर्गत सीमा सुरक्षा बल (BSF), राज्य पुलिस, जिला प्रशासन, खुफिया एजेंसियां और स्थानीय नागरिक मिलकर सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करेंगे.

इस सुरक्षा ढांचे का उद्देश्य केवल सीमा पर निगरानी बढ़ाना नहीं, बल्कि सीमा से जुड़े जिलों में सामाजिक, आर्थिक और प्रशासनिक गतिविधियों पर भी नजर रखना है, ताकि किसी भी संदिग्ध गतिविधि का प्रारंभिक स्तर पर ही पता लगाया जा सके.

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अमित शाह ने साफ किया है कि सीमा सुरक्षा केवल सुरक्षा बलों की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि इसमें स्थानीय प्रशासन और सीमावर्ती क्षेत्रों के नागरिकों की भी महत्वपूर्ण भूमिका होगी.

15 किलोमीटर क्षेत्र में अवैध निर्माणों पर सख्त कार्रवाई

सरकार ने अंतरराष्ट्रीय सीमा से 15 किलोमीटर के दायरे में बने संदिग्ध और अवैध निर्माणों को हटाने का निर्णय लिया है. सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार ऐसे कई निर्माण ऐसे स्थानों पर विकसित हुए हैं, जहां उनकी आवश्यकता या वैधता पर प्रश्नचिह्न है.

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सूत्रों के अनुसार राजस्थान के पाकिस्तान सीमा से जुड़े जिलों में लगभग 26,000 ऐसे निर्माणों की पहचान की गई है, जिनकी जांच की जाएगी. यदि इनमें कोई भी निर्माण सुरक्षा मानकों या कानूनी प्रक्रियाओं का उल्लंघन करता पाया गया, तो उसे हटाने की कार्रवाई की जाएगी.

राजस्थान के जैसलमेर, बाड़मेर, बीकानेर, श्रीगंगानगर, फलौदी और जालौर जिलों को इस अभियान के केंद्र में रखा गया है. जिला प्रशासन को इन क्षेत्रों का भौतिक सत्यापन कर विस्तृत रिपोर्ट तैयार करने के निर्देश दिए गए हैं.

राजस्थान बॉर्डर जिलों के कलेक्टरों को मिला विशेष दायित्व

राज्य सरकार और गृह मंत्रालय ने सीमावर्ती जिलों के जिला कलेक्टरों तथा पुलिस अधीक्षकों को विशेष जिम्मेदारियां सौंपी हैं. उन्हें अगले दो महीने के भीतर अपने-अपने क्षेत्रों में मौजूद संदिग्ध निर्माणों का सर्वेक्षण कर कार्रवाई करनी होगी.

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अधिकारियों को केवल अवैध निर्माणों की पहचान तक सीमित नहीं रखा गया है, बल्कि उन्हें इन निर्माणों से जुड़े वित्तीय स्रोतों की भी जांच करनी होगी. प्रशासन को यह पता लगाना होगा कि निर्माण कार्यों में उपयोग हुआ धन कहां से आया और उसके पीछे कौन-कौन लोग शामिल हैं.

साथ ही बड़े व्यावसायिक प्रतिष्ठानों, वित्तीय लेनदेन और स्थानीय व्यापारिक गतिविधियों का भी सत्यापन किया जाएगा, ताकि किसी प्रकार की अवैध फंडिंग का पता लगाया जा सके.

म्यूल अकाउंट और शेल कंपनियों पर शिकंजा

सुरक्षा एजेंसियों की जांच में कई बार यह सामने आया है कि सीमा क्षेत्रों में होने वाली संदिग्ध गतिविधियों के पीछे फर्जी बैंक खाते, म्यूल अकाउंट और शेल कंपनियां महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं.

म्यूल अकाउंट ऐसे बैंक खाते होते हैं, जिनका उपयोग अवैध धन के लेनदेन के लिए किया जाता है. कई बार खाताधारक खुद भी इस बात से अनजान होते हैं कि उनके खाते का उपयोग अपराधी गतिविधियों के लिए किया जा रहा है.

गृह मंत्रालय ने निर्देश दिए हैं कि ऐसे खातों की पहचान कर उनके माध्यम से होने वाले लेनदेन की गहन जांच की जाए. इसके लिए प्रवर्तन निदेशालय (ED), केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (CBDT), वित्तीय खुफिया इकाइयों और बैंकों को सक्रिय भूमिका निभानी होगी.

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फेक आइडेंटिटी कार्ड की होगी जांच

सीमावर्ती क्षेत्रों में फर्जी आधार कार्ड, नकली दस्तावेजों और गलत पहचान के माध्यम से निवास करने वाले लोगों की पहचान भी सरकार की प्राथमिकता में शामिल है.

प्रशासन को निर्देश दिए गए हैं कि वे सीमा क्षेत्रों में रहने वाले संदिग्ध व्यक्तियों के दस्तावेजों का सत्यापन करें. जिन लोगों की पहचान या नागरिकता संबंधी जानकारी संदिग्ध होगी, उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी.

यह कदम विशेष रूप से अवैध घुसपैठ और फर्जी पहचान के माध्यम से देश में रह रहे लोगों की पहचान करने के उद्देश्य से उठाया गया है.

BSF, NCB, CBDT, NIA और ED की संयुक्त रणनीति

सरकार ने सीमा सुरक्षा को केवल सैन्य या पुलिस दृष्टिकोण तक सीमित नहीं रखा है. इसके बजाय बहु-एजेंसी समन्वय मॉडल अपनाया जा रहा है.

BSF सीमा पर निगरानी और घुसपैठ रोकने का कार्य करेगी. नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB) नशीले पदार्थों की तस्करी पर नजर रखेगा. CBDT संदिग्ध वित्तीय गतिविधियों और कर चोरी से जुड़े मामलों की जांच करेगा, जबकि ED अवैध फंडिंग, हवाला नेटवर्क और मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े मामलों की जांच करेगा.

इन एजेंसियों के बीच सूचनाओं का आदान-प्रदान बढ़ाने और संयुक्त कार्रवाई सुनिश्चित करने के लिए विशेष समन्वय तंत्र तैयार किया जा रहा है.

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नो-मूवमेंट जोन की विशेष निगरानी

राजस्थान के संवेदनशील सीमा क्षेत्रों में जीरो लाइन से तीन किलोमीटर तक के क्षेत्र को विशेष निगरानी क्षेत्र के रूप में चिह्नित किया गया है.

इन क्षेत्रों में अनधिकृत गतिविधियों और संदिग्ध आवाजाही को रोकने के लिए प्रशासन ने विशेष अधिकारियों की तैनाती की है. नौ वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों को विभिन्न सीमा क्षेत्रों में नियुक्त किया गया है, जो नियमित रूप से जमीन पर जाकर निरीक्षण करेंगे.

उनकी जिम्मेदारी होगी कि किसी भी प्रकार के अस्थायी या स्थायी अवैध निर्माण, संदिग्ध गतिविधि अथवा नियमों के उल्लंघन की सूचना तुरंत संबंधित एजेंसियों को उपलब्ध कराएं.

आतंकी फंडिंग और हवाला नेटवर्क पर फोकस

खुफिया एजेंसियों के अनुसार सीमा क्षेत्रों में सक्रिय कई अवैध नेटवर्क हवाला चैनलों, नकली कंपनियों और तस्करी से प्राप्त धन का उपयोग करते हैं. इन्हीं माध्यमों से आतंकवादी संगठनों तक आर्थिक सहायता पहुंचाने की कोशिश की जाती है. इसलिए अब निर्माण गतिविधियों और आर्थिक लेनदेन को राष्ट्रीय सुरक्षा के दृष्टिकोण से भी देखा जा रहा है. सरकार का उद्देश्य केवल अपराधियों को पकड़ना नहीं, बल्कि उन आर्थिक नेटवर्कों को समाप्त करना है जो ऐसी गतिविधियों को बढ़ावा देते हैं.

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साइबर अपराध और वित्तीय धोखाधड़ी पर निगरानी

सीमा सुरक्षा के साथ-साथ साइबर अपराधों को भी राष्ट्रीय सुरक्षा का महत्वपूर्ण हिस्सा माना गया है. गृह मंत्रालय ने राज्यों को निर्देश दिए हैं कि साइबर अपराधों की शिकायतों के लिए उपलब्ध 1930 हेल्पलाइन का प्रभावी उपयोग सुनिश्चित किया जाए. डिजिटल भुगतान, ऑनलाइन बैंकिंग और वित्तीय धोखाधड़ी से जुड़े मामलों पर भी विशेष निगरानी रखी जाएगी. संदिग्ध बैंक खातों, ऑनलाइन फंड ट्रांसफर और डिजिटल वित्तीय नेटवर्क की जांच को सीमा सुरक्षा अभियान से जोड़ा जा रहा है.

व्यापक सुरक्षा ढांचे की ओर बढ़ता भारत

MHA द्वारा तैयार किया जा रहा नया सीमा सुरक्षा ढांचा केवल सीमाओं की रक्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि यह राष्ट्रीय सुरक्षा के आर्थिक, सामाजिक और प्रशासनिक पहलुओं को भी समाहित करता है. अवैध निर्माणों को हटाने, फर्जी पहचान पत्रों की जांच, हवाला नेटवर्क पर कार्रवाई, म्यूल अकाउंट्स की पहचान, नारकोटिक्स तस्करी पर नियंत्रण और बहु-एजेंसी समन्वय जैसे कदम इस व्यापक रणनीति का हिस्सा हैं.

आने वाले महीनों में राजस्थान सहित अन्य सीमावर्ती राज्यों में इस मॉडल को लागू किया जाएगा. यदि यह योजना प्रभावी ढंग से लागू होती है, तो न केवल सीमा सुरक्षा मजबूत होगी बल्कि अवैध गतिविधियों के पूरे नेटवर्क को भी कमजोर करने में महत्वपूर्ण सफलता मिल सकती है.

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