'एल्गोरिदम सिर्फ एंगेजमेंट बढ़ा सकते हैं, न्यूजरूम इंसानी सूझबूझ से ही चलेंगे...', AI पर बोलीं कली पुरी

SPIEF 2026 में, इंडिया टुडे ग्रुप की वाइस-चेयरपर्सन और एडिटर-इन-चीफ कली पुरी ने इस बात पर जोर दिया कि एआई (AI) को न्यूज़रूम के निर्णय और सूझबूझ को सहारा देना चाहिए, न कि उसकी जगह लेनी चाहिए. रूस और चीन के अन्य वक्ताओं ने भी अंतरात्मा, साइबर सुरक्षा और अनियंत्रित ऑटोमेशन के जोखिमों को लेकर अपनी चिंताएं जताईं.

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SPIEF 2026 में इंडिया टुडे ग्रुप की वाइस-चेयरपर्सन और एग्जीक्यूटिव एडिटर-इन-चीफ कली पुरी (Photo-ITG) SPIEF 2026 में इंडिया टुडे ग्रुप की वाइस-चेयरपर्सन और एग्जीक्यूटिव एडिटर-इन-चीफ कली पुरी (Photo-ITG)

aajtak.in

  • नई दिल्ली ,
  • 04 जून 2026,
  • अपडेटेड 2:30 PM IST

ऐसे समय में जब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) पत्रकारिता समेत कई क्षेत्रों की सूरत बदल रहा है, उद्योग जगत के दिग्गजों के सामने एक बड़ा सवाल यह है कि मानवीय रचनात्मकता को नुकसान पहुंचाए बिना बेहतर AI का इस्तेमाल कैसे किया जाए. यह मुद्दा सेंट पीटर्सबर्ग इंटरनेशनल इकोनॉमिक फोरम (SPIEF) 2026 में चर्चा के केंद्र में रहा. जिसमें इंडिया टुडे ग्रुप की वाइस-चेयरपर्सन और एग्जीक्यूटिव एडिटर-इन-चीफ कली पुरी समेत कई विशेषज्ञों ने बताया कि एआई और इंसानी हस्तक्षेप के बीच संतुलन बनाना समय की आवश्यकता है.

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'द लिमिट्स ऑफ एआई इन द मीडिया' सत्र में बोलते हुए, कली पुरी ने नैतिक सुरक्षा उपायों, फैक्ट-चेकिंग और इंसानी फैसलों की आवश्यकता पर जोर दिया. कली पुरी ने एक महत्वपूर्ण अंतर बताते हुए कहा कि न्यूज़रूम संयम और संतुलन का पालन करते हैं, जबकि एल्गोरिदम ऐसा नहीं करते. इसी बीच, सत्र की सह-पैनलिस्ट और रूसी विदेश मंत्रालय के प्रेस विभाग की निदेशक मारिया जाखारोवा ने भी इस बात को रेखांकित किया कि एआई को इंसानी क्षमताओं को सहारा देने वाला एक उपकरण बने रहना चाहिए, न कि उसका विकल्प. 

द एआई सैंडविच मॉडल 

कली पुरी ने तर्क दिया कि एल्गोरिदम मुख्य रूप से एंगेजमेंट और मुनाफे से संचालित होते हैं, इसी वजह से इनमें उस संतुलन और सटीकता की कमी होती है, जो पारंपरिक पत्रकारिता प्रदान करती है.

उन्होंने आगे कहा, "न्यूज़रूम खबरों को संतुलित और संयमित करते हैं. एल्गोरिदम ऐसा नहीं करते क्योंकि वे मुनाफे और एंगेजमेंट की वैल्यू पर आधारित होते हैं." उन्होंने कहा कि यही वजह है कि मूल रिपोर्टिंग और मानवीय सूझबूझ को सुरक्षित रखने के लिए इंडिया टुडे ग्रुप ने "हैंडक्राफ्टेड बाय एडिटर्स" नाम से एक पहल शुरू की है.

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कली पुरी ने कहा, "हमने एडिटर्स और रिपोर्टर्स द्वारा 'हैंडमेड' कंटेंट का एक पूरा सब-सेक्शन बनाने की कोशिश की है, जिसमें इस बात पर ध्यान केंद्रित किया जाता है कि उन्होंने क्या देखा और क्या सुना, बजाय इसके कि एक साधारण या नीरस रिपोर्ट पेश की जाए." कली पुरी ने कहा कि यह न केवल रिपोर्टिंग को अधिक गंभीर और विश्वसनीय बनाता है, बल्कि पाठकों के साथ एक गहरा जुड़ाव स्थापित करने में भी मदद करता है. 

कली पुरी ने कहा कि भविष्य में एआई और मानवीय रचनात्मकता एक साथ सह-अस्तित्व में रहेंगे. इसके लिए, उन्होंने एक 'एआई सैंडविच' मॉडल का जिक्र किया, जिसका इस्तेमाल इंडिया टुडे के न्यूज़रूम संचालन में पहले से ही किया जा रहा है.
इस मॉडल के तहत, पत्रकार संपादकीय प्रक्रिया की शुरुआत और अंत, दोनों ही चरणों में जुड़े रहते हैं, जबकि कार्यकुशलता और उत्पादकता बढ़ाने के लिए इसके बीच वाले हिस्से में एआई का उपयोग किया जाता है.

उन्होंने कहा, "हमारा न्यूज़रूम एआई सैंडविच नाम की किसी चीज़ पर काम करता है, जिसका मतलब है कि आप शुरुआत एक इंसान से करते हैं, कार्यकुशलता बढ़ाने के लिए बीच में एआई का उपयोग करते हैं, लेकिन फिर इसका अंत एक मानवीय स्पर्श या मानवीय छाप के साथ होता है ताकि फाइनल अप्रूवल इंसानों के पास ही रहे."

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अपनी बात समाप्त करने से पहले, कली पुरी ने दृढ़ता से कहा कि भारत न केवल एआई के एक बड़े उपभोक्ता के रूप में, बल्कि बड़ी तकनीकी कंपनियों द्वारा विकसित मौजूदा एआई मॉडल पर आधारित इनोवेटिव एप्लीकेशंस को तैयार करने के मामले में भी एक बेहद मजबूत स्थिति में है.

एआई के पास अंतरात्मा नहीं होती

कली पुरी की बात का समर्थन करते हुए, रूसी विदेश मंत्रालय के प्रेस विभाग की निदेशक मारिया जाखारोवा ने इस बात पर जोर दिया कि एआई को मानवीय क्षमताओं को सहारा देने वाला एक उपकरण बने रहना चाहिए, न कि उसका विकल्प. एआई पर अत्यधिक निर्भरता के खतरों को उजागर करते हुए, जाखारोवा ने ध्यान दिलाया कि एआई के पास अंतरात्मा नहीं होती है. उन्होंने आगाह किया कि यदि समाज ने मानवीय मूल्यों के बजाय केवल अपनी सुविधा को प्राथमिकता दी, तो इसके गंभीर परिणाम भुगतने पड़ सकते हैं.

जाखारोवा ने कहा, "एआई के पास अंतरात्मा नहीं होती, मानव विकास के पैमाने के रूप में अंतरात्मा को खो देने के बहुत बुरे परिणाम हो सकते हैं."

चाइना मीडिया ग्रुप के यूरेशियन ब्यूरो के निदेशक वांग बिन ने डेटा सुरक्षा से जुड़ी चिंताओं को रेखांकित किया, क्योंकि संगठन तेजी से ऐसे एआई टूल्स को अपना रहे हैं जिनके लिए व्यापक सिस्टम एक्सेस की आवश्यकता होती है. बिन ने कहा, कार्यकुशलता और साइबर सुरक्षा के बीच संतुलन बनाना अभी भी एक बड़ी चुनौती है.

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बिन ने बताया कि चीन मीडिया क्षेत्र के लिए विशेष रूप से उद्योग-केंद्रित एआई मॉडल विकसित करने की दिशा में काम कर रहा है. उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि एक राष्ट्रीय एआई बुनियादी ढांचा तैयार करना उनकी मुख्य प्राथमिकताओं में से एक है.

तो इस चर्चा से हम क्या निष्कर्ष निकाल सकते हैं कि यह बिल्कुल स्पष्ट है कि एआई अब हमारे जीवन और कार्यशैली का स्थायी हिस्सा बन चुका है, लेकिन इस एआई बूम के बावजूद, मानवीय निगरानी और विवेक अनिवार्य है.
 

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