भारत की सीमाओं पर अब सिर्फ जवान ही नहीं, तकनीक भी पहरा देती नजर आएगी. केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने साफ कर दिया है कि पाकिस्तान और बांग्लादेश सीमा को अब 'स्मार्ट बॉर्डर' मॉडल पर तैयार किया जाएगा. मतलब, अब बॉर्डर पर सिर्फ तारबंदी नहीं होगी, बल्कि कैमरे, सेंसर, रडार और रियल-टाइम निगरानी जैसी हाईटेक व्यवस्था भी तैनात होगी.
सरकार का मकसद बिल्कुल साफ है. बॉर्डर पर हर हाल में घुसपैठ रोकनी होगी. पशुओं की तस्करी (कैटल स्मगलिंग) पर पूरी तरह लगाम लगानी होगी और सीमा पार से होने वाले ड्रग्स के धंधे को जड़ से खत्म करना होगा. इसके साथ ही अमित शाह ने यह भी साफ कर दिया है कि बॉर्डर वाले इलाकों में होने वाले जनसंख्या बदलाव को रोकने के लिए भी सरकार ने पुख्ता तैयारी कर ली है.
इस नए प्लान के तहत बॉर्डर पर सिर्फ कटीले तार नहीं होंगे, बल्कि वहां अत्याधुनिक कैमरे, रडार, सेंसर और रियल-टाइम मॉनिटरिंग जैसी हाईटेक तकनीक का इस्तेमाल किया जाएगा. इसका सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि अगर कोई भी संदिग्ध इंसान या कोई ड्रोन सीमा पार से आने की कोशिश करेगा, तो हमारी सुरक्षा एजेंसियों को तुरंत अलर्ट मिल जाएगा. सरकार का लक्ष्य है कि इसी साल के अंदर दोनों सीमाओं पर इस 'स्मार्ट फेंसिंग' को पूरी तरह चालू कर दिया जाए. इसके लिए जमीन की व्यवस्था का काम भी तेजी से चल रहा है. बड़ी बात यह है कि पश्चिम बंगाल, असम और त्रिपुरा की सरकारें इस काम में पूरा समर्थन दे रही हैं और पश्चिम बंगाल सरकार ने तो इसके लिए जरूरी जमीन भी बीएसएफ को सौंप दी है.
अमित शाह ने साफ कहा है कि घुसपैठ, कैटल स्मगलिंग और ड्रग्स तस्करी रोकना अब सबसे बड़ी प्राथमिकता होगी. इसके लिए सीमा सुरक्षा बल (BSF) को ज्यादा मजबूत जिम्मेदारी दी जाएगी. बीएसएफ अब सिर्फ सीमा पर निगरानी तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि लोकल प्रशासन के साथ मिलकर काम करेगी ताकि अवैध घुसपैठ को शुरुआत में ही रोका जा सके.
सुरक्षा में रोड़ा बनने वालों पर होगी सख्त कार्रवाई
इस पूरे सुरक्षा चक्र को मजबूत बनाने के लिए भारत-बांग्लादेश बॉर्डर पर पटवारी से लेकर डीएम स्तर तक के अधिकारियों को बीएसएफ के साथ मिलकर काम करना होगा. फेंसिंग के कामों के लिए बीएसएफ को पूरा प्रशासनिक सहयोग दिया जा रहा है.
सरकार ने स्थानीय प्रशासन को साफ निर्देश दे दिए हैं कि सीमा सुरक्षा से जुड़े किसी भी काम में अगर कोई भी बाधा आती है, तो प्रशासन पूरी मजबूती से BSF के साथ खड़ा रहेगा. तकनीक, लोकल प्रशासन और हमारी सुरक्षा एजेंसियों के बीच बेहतर तालमेल के साथ अब सीमाओं पर एक ऐसी अभेद्य सुरक्षा तैयार की जा रही है, जिससे देश के दुश्मनों और तस्करों की हर चाल नाकाम हो जाएगी. ऐसे में आने वाले समय में भारत की सीमाएं सिर्फ तार और चौकियों से नहीं, बल्कि तकनीक के मजबूत जाल से सुरक्षित दिख सकती हैं.
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