'आप जैसी लड़की देखता हूं, तो पागल हो जाता हूं', मुंबई में महिला यात्री पर अश्लील कमेंट करने वाले ऑटो ड्राइवर को कोर्ट ने दी जमानत, जानिए वजह

Mumbai News: मुंबई डिंडोशी कोर्ट ने महिला यात्री पर अश्लील टिप्पणी करने के आरोपी ऑटो ड्राइवर जितेंद्र बैरागी को जमानत दी. कोर्ट ने कहा कि शारीरिक संपर्क का आरोप नहीं, 3 साल की सजा के प्रावधान में ट्रायल से पहले जेल जरूरी नहीं. पढ़ें पूरी रिपोर्ट...

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24 साल की युवती से बदतमीजी करने वाले ड्राइवर को रिहाई. (Photo: AI-generated) 24 साल की युवती से बदतमीजी करने वाले ड्राइवर को रिहाई. (Photo: AI-generated)

विद्या

  • मुंबई,
  • 17 जुलाई 2026,
  • अपडेटेड 11:41 PM IST

मुंबई में 24 साल की महिला यात्री पर अश्लील टिप्पणी करने के आरोपी ऑटो-रिक्शा ड्राइवर को कोर्ट ने जमानत दे दी है. अदालत ने इस मामले की सुनवाई के दौरान साफ किया कि चूंकि आरोपी पर किसी भी तरह के शारीरिक संपर्क या छेड़छाड़ का आरोप नहीं है और भारतीय न्याय संहिता के तहत इन धाराओं में अधिकतम सजा 3 साल तक ही है, इसलिए ट्रायल से पहले उसे लंबे समय तक हिरासत में रखने का कोई कानूनी औचित्य नहीं बनता है. 

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मामला मुंबई के डी.एन. नगर पुलिस स्टेशन इलाके का है. एडिशनल सेशंस जज एम. मोहिउद्दीन एम.ए. की अदालत में पेश की गई FIR के अनुसार, पीड़ित महिला 4 जून 2026 की सुबह करीब 6:42 बजे ओशिवारा में इन्फिनिटी मॉल के सामने फन रिपब्लिक से अंधेरी (पश्चिम) के जुहू वर्सोवा लिंक रोड स्थित सागरश्रोत जाने के लिए ऑटो में बैठी थी.

सवारी के दौरान की थी घिनौनी हरकत, धमकी भी दी

रास्ते में ऑटो ड्राइवर जितेंद्र कुमार पप्पू बैरागी ने महिला से बेहद आपत्तिजनक शब्दों में कहा, ''सुनो एक बात बताऊं, आप मेरी बहन जैसी हो, मुझे सेक्स करने का बहुत शौक है, आप जैसी लड़की देखता हूं तो पागल हो जाता हूं, आपको देखकर... अभी हाथ लगाकर देखो.'' 

जब महिला ने इस पर आपत्ति जताई और विरोध किया, तो आरोपी ने उसे गंभीर परिणाम भुगतने की धमकी भी दी, जिससे महिला बुरी तरह डर गई. पीड़िता की शिकायत पर पुलिस ने आरोपी के खिलाफ BNS की धाराओं 75, 79 और 351(2) के तहत केस दर्ज किया. वहीं, 6 जून 2026 को आरोपी ड्राइवर को गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेज दिया था.

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कानूनी प्रावधानों के तहत कोर्ट ने दिया राहत का फैसला

अदालत ने जमानत अर्जी मंजूर करते हुए इस बात पर जोर दिया कि अभियोजन पक्ष और पीड़िता की सुरक्षा चिंताओं को जेल में रखने के बजाय कड़ी शर्तों के माध्यम से भी हल किया जा सकता है. अदालत ने आरोपी जितेन्द्र कुमार बैरागी को 25000 रुपये के पर्सनल बॉन्ड पर रिहा करने का आदेश जारी किया.

जज ने अपने आदेश में साफ लिखा है कि आरोपी न तो शिकायतकर्ता महिला से किसी भी माध्यम से संपर्क करने की कोशिश करेगा और न ही उसका पीछा करेगा.

इसके अलावा, आरोपी को ऐसी किसी भी अश्लील या आपराधिक गतिविधि को दोबारा न दोहराने की सख्त हिदायत दी गई है. इस फैसले ने एक बार फिर कानूनी हलकों में बीएनएस के तहत महिलाओं से जुड़े अपराधों में सजा की अवधि और जमानत के विवेकपूर्ण अधिकारों को लेकर चर्चा बढ़ा दी है.

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