दिल्ली में 60 दिन से जारी किसान आंदोलन हिंसा में बदला, जानें पूरी टाइमलाइन

इन कानूनों को लेकर किसानों की सरकार संग 11 दौर की वार्ता हुई, लेकिन कोई नतीजा नहीं निकला. केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर नए कृषि कानूनों को एक से डेढ़ साल तक स्थगित करने का प्रस्ताव दिया, लेकिन किसान न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) की गारंटी और तीनों कृषि कानूनों को वापस लेने की मांग पर अडिग हैं. आइए जानते हैं कि किसान आंदोलन शुरू होने से अब तक कब क्या हुआ.

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26 नवंबर को शुरू हुआ किसान आंदोलन, 26 जनवरी को ट्रैक्टर परेड में हिंसा (फोटो-PTI) 26 नवंबर को शुरू हुआ किसान आंदोलन, 26 जनवरी को ट्रैक्टर परेड में हिंसा (फोटो-PTI)

aajtak.in

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  • 27 जनवरी 2021,
  • अपडेटेड 7:50 AM IST
  • दो महीने से किसानों का आंदोलन जारी
  • किसानों संग 11 दौर की वार्ता हो चुकी है
  • 26 नवंबर को शुरू हुआ किसान आंदोलन

केंद्र सरकार के तीन नए कृषि कानूनों के खिलाफ पिछले साल 26 नवंबर से दिल्ली के विभिन्न नाकों पर शुरू हुआ किसान आंदोलन 26 जनवरी को हिंसक हो गया. ट्रैक्टर रैली निकाल रहे प्रदर्शनकारियों ने बैरिकेड्स तोड़े, तय रूट के बजाय अलग रास्ता पकड़ा, इस दौरान दिल्ली में कई स्थानों पर झड़प देखने को मिली. लिहाजा, पुलिस को लाठीचार्ज और आंसू गैस के गोले दागने पड़े. 

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इन कानूनों को लेकर किसानों की सरकार संग 11 दौर की वार्ता हुई, लेकिन कोई नतीजा नहीं निकला. केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर नए कृषि कानूनों को एक से डेढ़ साल तक स्थगित करने का प्रस्ताव दिया, लेकिन किसान न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) की गारंटी और तीनों कृषि कानूनों को वापस लेने की मांग पर अडिग हैं.

आइए जानते हैं कि किसान आंदोलन शुरू होने से अब तक कब क्या हुआ....

26 नवंबर 2020: 5 नवंबर को देशभर में "चक्का जाम" के बाद पंजाब और हरियाणा में किसान संगठनों ने "दिल्ली चलो" आंदोलन का आह्वान किया. इसके बाद से किसान आंदोलन ने रफ्तार पकड़ी. हरियाणा पुलिस ने किसानों को रोकने की कोशिश की और आंसू गैस के गोले भी दागे लेकिन प्रदर्शनकारी किसान दिल्ली पहुंच गए और बॉर्डर पर डेरा डाल दिया. सिंघु बॉर्डर पर हंगामे के बाद दिल्ली पुलिस ने किसानों को दिल्ली में घुसने और निरंकारी मैदान में, बुराड़ी में विरोध करने की अनुमति दी.
 
1 दिसंबर 2020: केंद्र ने कृषि कानूनों पर चर्चा करने के लिए एक कमेटी बनाने का प्रस्ताव दिया. लेकिन 35 किसान संगठनों ने केंद्र के इस प्रस्ताव को स्वीकार करने से इनकार कर दिया. किसान संगठनों और कृषि मंत्री नरेंद्र तोमर के बीच यह वार्ता बेनतीजा रही. किसान अपनी इस मांग पर अड़े रहे कि तीनों कृषि कानूनों को वापस लिया जाए.  

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3 दिसंबर 2020: आठ घंटे की मैराथन बैठक चली, लेकिन वार्ता का एक नया दौर भी किसी नतीजे पर नहीं पहुंचा. केंद्रीय नेताओं ने कानूनों में खामियों को दूर करने की बात कही और एमएसपी, खरीद सिस्टम को लेकर कई प्रस्ताव रखे लेकिन कोई हल नहीं निकला. 

5 दिसंबर 2020: पांचवें दौर की बैठक में किसान नेताओं ने मौन व्रत धारण कर लिया और सरकार से हां या ना में जवाब मांगें. इसके बाद केंद्र सरकार ने गतिरोध खत्म करने के लिए 9 दिसंबर को फिर बैठक बुलाई.

8 दिसंबर 2020: प्रदर्शनकारी किसानों ने भारत बंद का आह्वान किया. इसका सबसे बड़ा असर पंजाब और हरियाणा में नजर आया जहां बाजार, सड़कें बंद रहीं. किसानों के भारत बंद को अधिकतर विपक्षी दलों ने समर्थन दिया. बंद का असर ओडिशा, बिहार और महाराष्ट्र जैसे राज्यों में भी देखने को मिला. 

ट्रैक्टर परेड में हंगामा

बाद में उसी शाम को, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और किसानों के प्रतिनिधियों के एक समूह के बीच एक बैठक भी सफल नहीं हो पाई क्योंकि नेताओं ने तीन कानूनों के संशोधनों के प्रस्ताव को खारिज कर दिया.

16 दिसंबर 2020: बॉर्डर बंद होने की वजह से यात्रियों को होने वाली परेशानी को लेकर सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका पर सुनवाई हुई. इस दौरान मसले को सुलझाने के लिए एक कमेटी गठित करने का सुझाव दिया गया. अदालत ने, हालांकि किसानों के अहिंसक विरोध प्रदर्शन के अधिकार को स्वीकार किया.

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21 दिसंबर 2020: किसानों ने सभी विरोध स्थलों पर एक दिवसीय भूख हड़ताल की. इसके अलावा 25 से 27 दिसंबर तक हरियाणा में राजमार्गों पर टोल वसूली को रोकने का ऐलान किया. 

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30 दिसंबर 2020: सरकार और किसान नेताओं के बीच छठे दौर की बातचीत कुछ हद तक सुर्खियों में रही. इसमें केंद्र ने पराली जलाने से संबंधित अध्यादेश में किसानों के खिलाफ एक्शन न लेने और प्रस्तावित बिजली संशोधन कानून को लागू न करने पर सहमति जताई गई. 

4 जनवरी 2021: सातवें दौर की वार्ता भी अनिर्णायक रही क्योंकि किसान नेता तीन कृषि कानूनों को रद्द करने पर अड़े रहे वहीं सरकार ने इससे साफ इनकार कर दिया. 

8 जनवरी 2021: आठवें दौर की बैठक में किसानों ने साफ कर दिया कि 'घर वापसी' तभी होगी जब तीन कृषि कानून वापस ले लिए जाएं. वहीं सरकार ने किसान संगठनों से कहा कि वे कानूनों को रद्द करने के बजाय वैकल्पिक मांग के साथ आएं.

किसान आंदोलन के दौरान लंगर की तैयारी (फोटो-PTI)

12 जनवरी 2021: सुप्रीम कोर्ट ने मामले की सुनवाई करते हुए तीन कृषि कानूनों पर रोक लगा दी और एक कमेटी का गठन कर दिया. कोर्ट ने कमेटी से दो महीने के भीतर रिपोर्ट देने को कहा. कमेटी से सभी पक्षों को सुनने के बाद अपनी सिफारिश देने को कहा गया था.

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15 जनवरी 2021: नौवें दौर की वार्ता भी बेनतीजा रही. प्रदर्शनकारी किसान कानूनों को पूरी तरह से रद्द करने की अपनी मुख्य मांग पर अड़े रहे जबकि सरकार ने आवश्यक संशोधनों के लिए अपनी इच्छा व्यक्त की. लेकिन बात नहीं बनी.

21 जनवरी 2021: 10वें दौर की वार्ता के दौरान सरकार ने डेढ़ साल तक तीनों कानूनों को स्थगित करने का प्रस्ताव रखा और एक संयुक्त समिति बनाने की बात कही जो मामले में सुलझाए. लेकिन यह वार्ता भी बेनतीजा रही.

22 जनवरी 2021: 11वें दौर की वार्ता में किसान अपनी मांग से पीछे हटने को तैयार नहीं हुए. वहीं सरकार ने भी सख्त रुख दिया और कहा कि फिर से वार्ता की बात कही.

26 जनवरी 2021: दिल्ली बॉर्डर पर प्रदर्शन कर रहे किसानों ने गणतंत्र दिवस के मौके पर राष्ट्रीय राजधानी में ट्रैक्टर परेड निकाला. लेकिन ट्रैक्टर रैली के दौरान आंदोलनकारियों और पुलिस में झड़प हो गई. परेड के दौरान निर्धारित रूट्स का पालन न करने पर पुलिस ने आंसू गैस के गोले दागे और लाठीचार्ज किया. प्रदर्शकारियों का एक गुट लाल किला के परिसर में दाखिल हो गया और अपना झंडा फहरा दिया.  


 

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