महाराष्ट्र के सीमावर्ती क्षेत्रों के 25 गांव होना चाहते हैं तेलंगाना में शामिल, जानिए वजह

महाराष्ट्र और तेलंगाना की सीमा पर बसे 25 गांव के लोग तेलंगाना राज्य में शामिल होना चाहते हैं. ग्रामीणों ने खुलकर अपनी इस मांग को सरकार के पास पहुंचाया है. गांव वालों ने कहा पहले भी 40 गांव के लोगों ने तेलंगाना में शामिल होने की मांग की थी. मगर, तत्कालीन सरकार ने रोक लिया था.

Advertisement

aajtak.in

  • मुंबई,
  • 28 नवंबर 2022,
  • अपडेटेड 4:48 PM IST

महाराष्ट्र और तेलंगाना की सीमा पर बसे 25 से ज्यादा गांव तेलंगाना राज्य में शामिल होना चाहते हैं. अपनी मांग को इन गांवों के लोगों ने पत्र लिखकर कलेक्टर के पास भी पहुंचा दिया है. साथ ही तेलंगाना राज्य में क्यों शामिल होना चाहते हैं इसकी वजह भी पत्र में लिखकर बताई है.

अब देखना है कि राज्य सरकार ग्रामीणों की इस मांग पर क्या कदम उठाती है. आप भी जानिए आखिर क्यों 25 से ज्यादा गांव के लोग तेलंगाना में शामिल होना चाहते हैं.

Advertisement

पहले जानिए मांग किन गांवों ने उठाई 

तेलंगाना राज्य में शामिल होने की मांग 25 गांवों के लोगों ने उठाई गई है. ये सभी गांव नांदेड़ जिले के धर्माबाद तहसील के सीमावर्ती क्षेत्र के हैं. उन्हीं गांवों में शामिल बन्नाली गांव के लोगों ने भी जिले के डीएम को अपना पत्र पहुंचाया है. पत्र व्यवहार ग्राम पंचायत के ग्रामसेवक के माध्यम से किया गया है. इस पत्र में ग्रामीणों ने तेलंगाना में शामिल होने की मांग का कारण स्पष्ट किया है.

तेलंगाना में शामिल होने की मांग की वजह

आजतक ने बन्नाली गांव के लोगों से महाराष्ट्र छोड़कर तेलंगाना में शामिल होने की उनकी मांग का कारण पूछा. इस पर गांव वालों ने कहा, ''पांच साल पहले सीमावर्ती चालीस गांव महाराष्ट्र छोड़कर तेलंगाना में शामिल होने के लिए तैयार हुए थे. मगर, तत्कालीन महाराष्ट्र सरकार ने विकास का आश्वासन देकर दूसरे राज्य में शामिल होने से रोक लिया था." 

Advertisement

गांव वालों ने कहा, "मगर, सरकार का आश्वासन खोखला निकला. आज तक तक हम ग्रामीणों को फूटी-कौड़ी तक नसीब नहीं हुई है. हमारे गांवों में विकास के नाम पर कोई भी काम नहीं हुआ है. ऐसा लगता है जैसे महाराष्ट्र सरकार ने हमें फांसी पर चढ़ा दिया है.''

तेलंगाना में गांवों को बहुत सुविधाएं

ग्रामीणों का कहना है कि तेलंगाना के गांवों के सरकार की ओर बहुत सविधाएं मिलती हैं. मगर, महाराष्ट्र सरकार ने तो हमें फांसी पर चढ़ा दिया है. तेलंगाना में किसानों को 18 घंटे बिजली मुहैया कराई जा रही है. घर में बेटी पैदा होने पर सरकार की ओर से एक लाख रुपए की मदद मिलती है.

यदि किसान के परिवार में किसी की मौत होती है, तो पांच लाख रुपए की आर्थिक सहायता सरकार की ओर से दी जाती है. इसके अलावा सरकारी की ओर से जितनी भी योजनाएं चलाई जा रही हैं, उन सभी का लाभ वहां के गांवों को मिलता है.

महाराष्ट्र में विकास कोसों दूर

ग्रामीण आगे कहते हैं कि तेलंगाना के उलट महाराष्ट्र में ग्रामीणों का विकास कोसों दूर है. यहां सरकार की किसी भी योजना का लाभ हम लोगों को नहीं मिलता है. पांच साल पहले तत्कालीन महाराष्ट्र सरकार ने सीमावर्ती क्षेत्रों की समस्याओं को हल करने के लिए 40 करोड़ रुपए देने की अनुमति दी थी. मगर, अब तक कोई भी फंड नही मिला है. केवल आश्वासन पर आश्वासन ही देते आ रहे हैं. इस कारण 25 गांव तेलंगाना राज्य में शामिल होना चाहते हैं.

Advertisement

(रिपोर्ट- कुवरचंद मंडले)

Read more!
Advertisement

RECOMMENDED

Advertisement
Latest News in Hindi »