उद्धव ठाकरे को एक और झटका! पाला बदलने वाले सचिन अहीर बने विधान परिषद के उपसभापति

शिवसेना (यूबीटी) के एमएलसी सचिन अहीर महाराष्ट्र विधान परिषद के उपसभापति निर्विरोध चुने गए. उन्होंने महायुति के उम्मीदवार के तौर पर नामांकन दाखिल किया था. विपक्षी महाविकास आघाड़ी ने अपना उम्मीदवार वापस ले लिया, जिसके बाद अहीर का निर्विरोध निर्वाचन हो गया.

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सचिन अहीर मुंबई के वर्ली क्षेत्र से जुड़े वरिष्ठ नेता हैं और आदित्य ठाकरे के करीबी माने जाते रहे हैं. (File Photo- ITG) सचिन अहीर मुंबई के वर्ली क्षेत्र से जुड़े वरिष्ठ नेता हैं और आदित्य ठाकरे के करीबी माने जाते रहे हैं. (File Photo- ITG)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 01 जुलाई 2026,
  • अपडेटेड 7:44 PM IST

महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर बड़ा उलटफेर देखने को मिला है. शिवसेना (यूबीटी) के विधान परिषद सदस्य सचिन अहीर सत्तारूढ़ महायुति गठबंधन के उम्मीदवार के रूप में बुधवार को निर्विरोध विधान परिषद के उपसभापति चुन लिए गए हैं. अहीर मंगलवार को ही पाला बदलकर शिंदे गुट में शामिल हुए थे.

इसके तुरंत बाद उन्होंने महाराष्ट्र विधान परिषद के उपसभापति पद के लिए अपना नामांकन भी दाखिल किया था. उनके इस कदम ने न सिर्फ राजनीतिक हलकों में हलचल मचा दी, बल्कि शिवसेना (यूबीटी) के नेताओं के लिए भी यह एक बड़ा झटका माना गया.

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यह घटनाक्रम ऐसे समय हुआ है जब पिछले हफ्ते ही शिवसेना (यूबीटी) के छह बागी लोकसभा सांसद एकनाथ शिंदे की शिवसेना में शामिल हुए थे. ऐसे में सचिन अहीर का महायुति के साथ जाना उद्धव ठाकरे और उनके बेटे आदित्य ठाकरे के लिए एक और बड़ा राजनीतिक नुकसान माना जा रहा है.

मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने सदन में सचिन अहीर को बधाई देते हुए कहा कि दोनों ने वर्ष 1999 में पहली बार विधायक के रूप में विधानसभा में प्रवेश किया था. वहीं, उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने कहा कि नीलम गोरहे के बाद सचिन अहीर दूसरे शिवसैनिक हैं, जिन्हें विधान परिषद के उपसभापति पद की जिम्मेदारी मिली है.

पूर्व उपसभापति नीलम गोरहे ने भी अहीर को बधाई देते हुए कहा कि उन्हें खुशी है कि इस पद के लिए एकनाथ शिंदे ने सचिन अहीर को चुना. अपने संबोधन में सचिन अहीर ने कहा कि भले ही राजनीतिक समीकरण बदल गए हों, लेकिन आम जनता, मजदूरों और महाराष्ट्र के साथ उनका रिश्ता हमेशा बना रहेगा.

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वहीं, शिवसेना (यूबीटी) के नेता अनिल परब ने तंज कसते हुए कहा कि सचिन अहीर के नामांकन ने कई लोगों के सपनों पर बुलडोजर चला दिया है. 

सचिन अहीर मुंबई के वर्ली क्षेत्र से जुड़े वरिष्ठ नेता हैं और आदित्य ठाकरे के करीबी माने जाते रहे हैं. उनके महायुति खेमे में जाने को आदित्य ठाकरे के लिए भी बड़ा राजनीतिक झटका माना जा रहा है.

गौरतलब है कि सचिन अहीर पहले अविभाजित राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) में रहे हैं. वह तीन बार विधायक और कांग्रेस-एनसीपी सरकार में मंत्री भी रह चुके हैं. वर्ष 2019 के विधानसभा चुनाव से पहले उन्होंने अविभाजित शिवसेना का दामन थामा था और बाद में आदित्य ठाकरे के बेहद करीबी नेताओं में शामिल हो गए थे. वर्ष 2022 में वह विधान परिषद के सदस्य बने थे और उनका कार्यकाल 2028 तक है.

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