पुणे: वैक्सीनेशन पर वाहवाही लूटने की होड़, पोस्टर वार में उलझे सियासी दल

कोरोना महामारी के दौरान नेताओं के इस तरह के आचरण पर स्थानीय लोग नाखुश हैं. उनका कहना है कि “हमारे जन प्रतिनिधियों में गंभीरता और जवाबदेही का अभाव है, मजबूर और हताश नागरिकों को वैक्सीनेशन के लिए स्लॉट दिलवाने और वैक्सीनेशन सेंटर्स पर कतारों की व्यवस्था में ये कोई मदद नहीं दे रहे. बस पोस्टर्स में चेहरा चमका कर वैक्सीनेशन का श्रेय लेना चाहते हैं.”

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 पुणे की सड़कों के साथ खास तौर पर ये पोस्टर वैक्सीनेशन सेंटर्स के बाहर देखने को मिल रहे हैं पुणे की सड़कों के साथ खास तौर पर ये पोस्टर वैक्सीनेशन सेंटर्स के बाहर देखने को मिल रहे हैं

पंकज खेळकर

  • पुणे,
  • 13 मई 2021,
  • अपडेटेड 3:34 PM IST
  • पुणे में पोस्टर लगाना सिर्फ BJP नेताओं का हक: गणेश बिडकर
  • किसके दावों पर किया जाए यकीन

पुणे में इस वक्त कोई चुनाव नहीं हो रहे लेकिन यहां जगह जगह नेताओं की तस्वीरों वाले पोस्टर-होर्डिंग-बैनर नज़र आ रहे हैं. पुणे की सड़कों के साथ खास तौर पर ये पोस्टर वैक्सीनेशन सेंटर्स के बाहर देखने को मिल रहे हैं.

प्रमुख राजनीतिक दलों में से कोई भी वैक्सीनेशन का श्रेय लूटने की होड़ में पीछे नहीं रहना चाहता. इसलिए पोस्टर-होर्डिंग-बैनर से अहम पार्टियों के बड़े नेताओं के अलावा स्थानीय नेताओं के चेहरे भी नजर आ सकते हैं. पुणे नगर निगम में पूर्ण बहुमत के साथ बीजेपी सत्ता में है, इसलिए शहर में उसके पोस्टर ही ज्यादा नजर आते हैं.   

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असल बात ये है कि वैक्सीनेशन की पूरी मुहिम प्रशासन की ओर से चलाई जा रही है. लेकिन इस पोस्टर युद्ध से आम लोग भी भ्रमित हो रहे हैं कि आखिर वैक्सीनेशन की मुहिम शुरू कराने के लिए किसके दावों पर यकीन किया जाए.  

कोरोना महामारी के दौरान नेताओं के इस तरह के आचरण पर स्थानीय लोग नाखुश हैं. उनका कहना है कि “हमारे जन प्रतिनिधियों में गंभीरता और जवाबदेही का अभाव है, मजबूर और हताश नागरिकों को वैक्सीनेशन के लिए स्लॉट दिलवाने और वैक्सीनेशन सेंटर्स पर कतारों की व्यवस्था में ये कोई मदद नहीं दे रहे. बस पोस्टर्स में चेहरा चमका कर वैक्सीनेशन का श्रेय लेना चाहते हैं.” 

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अगले साल पुणे नगर निगम चुनाव होने हैं. ऐसे में सभी अहम राजनीतिक दलों की इन चुनावों पर नजर है. हर दल चाहता है कि इस चुनाव में उसका ज्यादा से ज्यादा वर्चस्व कायम हो.  

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पुणे नगर निगम में सदन के नेता गणेश बिडकर दावा करते हैं कि पुणे शहर में पोस्टर लगाना सिर्फ और सिर्फ बीजेपी नेताओं का ही हक है क्योंकि नगर निगम में बीजेपी की सत्ता है. बीजेपी नेता बिडकर कहते हैं कि कोरोना काल में महाराष्ट्र की महाविकास आघाड़ी सरकार ने पुणे शहर के लिए एक फूटी कौड़ी भी नही दी है.

दूसरी ओर यही सरकार मुंबई नगर निगम को अच्छी खासी आर्थिक मदद दे रही है. पुणे 18 से 44 उम्र के लोगों का जो वैक्सीनेशन हो रहा है उसके लिए वैक्सीन भी केंद्र सरकार ने दी हुई है. इस लिए पुणे में पोस्टर जो लग रहे है वो बीजेपी का हक है.” 

 

बिडकर के बयान पर पुणे शहर में एनसीपी नेता और प्रवक्ता अंकुश काकड़े ने पलटवार किया. काकड़े के मुताबिक “गणेश बिडकर जो कह रहे हैं वो लोगों को गुमराह करने वाला है. राज्य सरकार ने पुणे शहर को कितनी मदद दी है इसके सारे आंकड़े जल्दी ही लोगों के सामने पेश किए जाएंगे. पुणे शहर में बीजेपी जो भी खर्च कर रही है वो जनता ने टैक्स के रूप में नगर निगम को दिया हुआ पैसा है.

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अंकुश काकड़े के मुताबिक 2022 के नगर निगम चुनाव को ध्यान में रखकर बीजेपी नेता पोस्टर पर खुदको चमकाने में व्यस्त है वही महाविकास आघाडी के नेता मेहनत कर , इस मुश्किल दौर में जनता  को मदद करने में पसीना बहा रहे  हैं.” 

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पुणे से सटे वाघोली के रहने वाले संजीव कुमार पाटिल ने हाल में आजतक से बातचीत में कहा था, “2022 में पुणे नगर निगम के चुनाव होने हैं, वहीं वाघोली ग्रामीण क्षेत्र को पुणे नगर निगम के क्षेत्र में शामिल किया जा रहा है. इस इलाके से नगरसेवक (पार्षद) की दौड़ में कई स्थानीय नेता है.” 

 

पाटिल ने शिवसेना के स्थानीय नेता ज्ञानेश्वर माउली आबा कटके पर आरोप लगाया था कि उन्होंने प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में तैनात अधिकारी डॉक्टर की मदद से तीन रिहाइशी सोसाइटीज़ में बिना जिला परिषद की अनुमति के वैक्सीनेशन कराया.

पाटिल के मुताबिक ये वैक्सीनेशन अप्रैल के आखिरी हफ्ते में तीन दिन चला और इसकी सोशल मीडिया पर पोस्ट डाल कर जानकारी भी दी गई. वहीं शिवसेना नेता ज्ञानेश्वर माउली आबा कटके ने अपने खिलाफ सभी आरोपों को गलत बताया. उनके मुताबिक राजनीतिक द्वेष रखने वाले लोग उन पर पक्षपात के आरोप लगा रहे हैं. 


 


 

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