निंबालकर डबल मर्डर केस में 20 साल बाद फैसला, पद्मसिंह पाटिल समेत सभी आरोपी बरी

20 साल पुराने निंबालकर डबल मर्डर केस में स्पेशल CBI कोर्ट ने सभी आरोपियों को बरी कर दिया है. अदालत ने कहा कि अभियोजन पक्ष आरोपों को संदेह से परे साबित नहीं कर पाया.

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पवनराजे निंबालकर मर्डर केस से पद्मसिंह पाटिल समेत सभी आरोपी बरी. (File Photo) पवनराजे निंबालकर मर्डर केस से पद्मसिंह पाटिल समेत सभी आरोपी बरी. (File Photo)

विद्या

  • मुंबई,
  • 20 जून 2026,
  • अपडेटेड 3:24 PM IST

महाराष्ट्र के बेहद चर्चित पवनराजे निंबालकर डबल मर्डर केस में 20 साल बाद शनिवार को बड़ा फैसला आया है. मुंबई की स्पेशल सीबीआई कोर्ट ने पुख्ता सबूत न होने की वजह से पूर्व कैबिनेट मंत्री पद्मसिंह पाटिल समेत सभी आरोपियों को बरी कर दिया है. कोर्ट ने साफ कहा कि अभियोजन पक्ष (प्रॉसीक्यूशन) आरोपियों के खिलाफ शक से परे आरोप साबित करने में पूरी तरह नाकाम रहा. यह फैसला आते ही अदालत परिसर में हलचल बढ़ गई, वहीं पीड़ित परिवार काफी मायूस नजर आया.

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यह मामला साल 2006 का है, जब कांग्रेस के नेता पवनराजे निंबालकर की नवी मुंबई के कलंबोली में गोली मारकर हत्या कर दी गई थी. इस हमले में उनके ड्राइवर समद काजी की भी जान चली गई थी. इस हाई-प्रोफाइल हत्याकांड के पीछे गहरी राजनीतिक वर्चस्व की जंग और चीनी मिल से जुड़ी कारोबारी दुश्मनी बताई गई थी. शुरुआत में लोकल पुलिस ने मामले की छानबीन शुरू की थी. बाद में निंबालकर के परिवार की लगातार मांग को देखते हुए जांच का जिम्मा सीबीआई को सौंप दिया गया. सीबीआई ने इस मामले में पद्मसिंह पाटिल को मुख्य आरोपी बनाया था.

कोर्ट ने सीबीआई की जांच पर उठाए गंभीर सवाल

विशेष न्यायाधीश एसआर नवेंदर ने फैसला पढ़ते हुए शुरुआत में ही कहा कि यह एक बेहद दुखद घटना थी, लेकिन अदालत कानून के दायरे में रहकर ही कोई निर्णय दे सकती है. कोर्ट ने केंद्रीय एजेंसी की जांच में कई बड़ी खामियां गिनाईं. फैसले के मुताबिक, पूरे केस का आधार बना मुख्य सरकारी गवाह पारसमल जैन बिल्कुल भी भरोसेमंद नहीं पाया गया. उसे पुलिस ने काफी समय तक अवैध हिरासत में रखा था. उसके बयानों में इतने विरोधाभास थे कि अभियोजन पक्ष की पूरी कहानी ताश के पत्तों की तरह ढह गई.

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अदालत ने इस बात पर गहरी हैरानी जताई कि इतने बड़े मर्डर केस में जांच एजेंसियां आरोपियों के मोबाइल फोन या सीडीआर (कॉल डिटेल रिकॉर्ड) जैसे जरूरी डिजिटल सबूत जुटाने में पूरी तरह नाकाम रहीं. पुलिस अधिकारियों ने कोर्ट में दलील दी थी कि उस दौर में कॉल रिकॉर्ड निकालने का कोई प्रयास नहीं किया गया. इसके अलावा, आरोपियों के घरों की तलाशी में भी कोई ऐसी आपत्तिजनक चीज या हथियार नहीं मिला जो उन्हें इस जुर्म से सीधे जोड़ सके. अदालत ने तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा कि सरकारी गवाह ने कोर्ट को गुमराह करने की कोशिश की, लिहाजा उस पर झूठी गवाही का मुकदमा चलाया जाना चाहिए.

20 साल पुराने इस केस का फैसला सुनने के लिए पवनराजे निंबालकर के बेटे और सांसद ओमप्रकाश राजेनिंबालकर खुद मुंबई सेशंस कोर्ट में मौजूद थे. वहीं, 86 साल के मुख्य आरोपी पद्मसिंह पाटिल व्हीलचेयर पर अस्पताल के अटेंडेंट के साथ अदालत पहुंचे थे. हालांकि, इस मामले में आरोपी शूटर पिंटू सिंह फैसला सुनाए जाने के वक्त तक कोर्ट रूम में नहीं पहुंच पाए थे. अदालत ने आरोपियों को राहत देते हुए कहा कि केवल राजनीतिक दुश्मनी के आधार पर किसी को दोषी नहीं ठहराया जा सकता.

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