कल्याण के पास स्थित मलंगगढ़ पहुंचना अब तीर्थयात्रियों और पर्यटकों के लिए बहुत आसान हो गया है, पहले जहां हजारों सीढ़ियां चढ़ने में 2 घंटे लग जाते थे, वहां अब सिर्फ 7 से 10 मिनट में पहुंच जाते हैं.पहाड़ी के बीच से गुजरते हुए रोमांचक सफर चंद मिनटों में पूरा हो जाता है. महाराष्ट्र सरकार की आधुनिक परियोजना ने पहाड़ की मुश्किल को सुविधा में बदल दिया है.
मलंगगढ़ में एक ऐतिहासिक किला और पवित्र स्थल है, जो मुस्लिम और हिंदू दोनों समुदायों के लिए खास है. हिंदू इसे मलंगगढ़ कहते हैं तो मुसलमान इसे हाजी मलंग शाह बाबा की दरगाह कहते हैं. हर साल श्रद्धालु यहां हजारों सीढ़ियां चढ़कर पहुंचते थे. बुजुर्ग, बच्चों और कमजोर लोगों के लिए इतनी चढ़ाई चढ़ना बहुत थकान भरा होता था. कई लोग बीच में ही थककर रुक जाते थे लेकिन अब भारत की सबसे लंबी फ्यूनिकुलर रेलवे की वजह से यह सफर आसान है.
बता दें कि जनवरी 2026 में 1.2 किलोमीटर लंबी भारत की सबसे लंबी फ्यूनिकुलर रेलवे शुरू हो चुकी है. फ्यूनिकुलर रेलवे एक खास तरह की केबल वाली ट्रेन होती है, जो बहुत खड़ी चढ़ाई पर भी आसानी से चलती है. इसमें दो डिब्बे होते हैं जो केबल से जुड़े रहते हैं.
फ्यूनिकुलर रेलवे का सफर न सिर्फ तेज है बल्कि बहुत रोमांचक भी है. हरे-भरे पहाड़, घाटियां और दूर तक का नजारा यात्रियों का मनमोह लेता है. इस ट्रेन की स्पीड और ढलान के कारण यह सफर रोमांचक भी है. लोग अब छोटे बच्चों, बुजुर्गों और अपने परिवार के साथ आसानी से मलंगगढ़ पहुंच रहे हैं. भारत की सबसे लंबी फ्यूनिकुलर रेलवे सुविधा कल्याण रेलवे स्टेशन से करीब 15-20 किलोमीटर की दूरी पर है.
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