मुंबई में एक वोट तो बाकी 28 निगमों में 4 क्यों डाल रहे वोटर, समझें क्या है मल्टी-मेंबर वार्ड सिस्टम

महाराष्ट्र के नगर महापालिका चुनाव की वोटिंग चल रही है. इस बार वोटिंग पैटर्न में बड़ा बदलाव किया गया है. मुंबई के बीएमसी को छोड़कर महाराष्ट्र की बाकी 28 महानगरपालिकाओं में एक मतदाता चार वोट दे रहे हैं. बहु-सदस्यीय प्रणाली (Multi Member Ward System) के तहत एक वार्ड से चार पार्षद (नगरसेवक) चुने जाएंगे.

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महाराष्ट्र के नगर महापालिका क्षेत्र के लिए वोटिंग जारी(Photo-ANI) महाराष्ट्र के नगर महापालिका क्षेत्र के लिए वोटिंग जारी(Photo-ANI)

कुबूल अहमद

  • नई दिल्ली,
  • 15 जनवरी 2026,
  • अपडेटेड 9:28 AM IST

महाराष्ट्र में मुंबई की बीएमसी सहित 29 नगर महापालिका के लिए वोटिंग शुरू हो गई है. बीएमसी के 227 वार्ड हैं जबकि सभी नगर महापालिका क्षेत्र में 893 वार्ड हैं. इनमें कुल 2,869 सीटें शामिल हैं. महानगर पालिका के चुनाव में 15,908 उम्मीदवार की किस्मत का फैसला 3 करोड़ 48 लाख 79 हजार 337 मतदाता तय करेंगे.

एशिया की सबसे अमीर नगर पालिका बीएमसी मुंबई पर सबकी निगाहें हैं. इसके अलावा पुणे, ठाणे, नागपुर और संभाजीनगर जैसे बड़े शहरों का सियासी भविष्य भी तय होगा. राज्य इन प्रमुख महानगरपालिकाओं में आखिरी चुनाव फरवरी 2017 में हुए थे. इनका 5 साल का कार्यकाल 2022 में खत्म हो गया था, लेकिन ओबीसी आरक्षण विवाद, वार्डों के परिसीमन के चलते चुनाव नहीं सके थे, लेकिन अदालत के आदेश के बाद निर्वाचन आयोग ने 29 महानगरपालिकाओं के चुनावों का कार्यक्रम 15 दिसंबर 2025 को घोषित किया था.

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महाराष्ट्र के नगर महापालिका के चुनाव की वोटिंग प्रक्रिया में इस बार एक बड़ा बदलाव किया गया है. मुंबई के बीएमसी में एक वोटर एक ही वोट करेगा जबकि बाकी के 28 महानगर पालिका क्षेत्र में एक वोटर चार वोट देने का काम करेगा इसकी वजह यह है कि मुंबई को छोड़कर बाकी के नगर निगम क्षेत्रों में बहु-सदस्यीय वोटिंग पद्धति अपनाई जाएगी. निर्वाचन आयोग ने इस संबंध में विस्तृत दिशा-निर्देश भी जारी किए हैं.

29 नगर महापालिका क्षेत्र में चल रही वोटिंग

महाराष्ट्र के 29 नगर महापालिका क्षेत्र में वोटिंग हो रही है और नतीजे कल शुक्रवार को घोषित किए जाएंगे. मुंबई की बृहन्मुंबई नगर निगम (बीएमसी), छत्रपति संभाजीनगर, नवी मुंबई, वसई-विरार, कोल्हापुर, कल्याण-डोंबिवली, ठाणे, उल्हासनगर, नाशिक, पुणे, पिंपरी-चिंचवड़, सोलापुर, अकोला, अमरावती, नागपुर, चंद्रपुर, लातूर, परभणी, भिवंडी-निजामपुर, मालेगांव, पनवेल, मीरा-भाईंदर, नांदेड-वाघाळा, सांगली-मिरज-कुपवाड, जलगांव, धुले, अहिल्यानगर, इचलकरंजी और जालना महानगरपालिकाओं के लिए मतदान हो रहा है.

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मुंबई में एक तो बाकी जगह 4 वोट दे रहे वोटर्स

मुंबई की बीएमसी में कुल 277 सीटें है, जिसके लिए मतदाता एक ही वोट करेंगे. यानी एक वोटर एक ही वोट डालेगा. इसके अलावा बाकी के 28 नगर महापालिका क्षेत्र में एक वोटर चार वोट डालने का काम करेंगे. मुंबई में एक वार्ड में एक सदस्य चुना जाएगा जबकि बाकी के नगर महापालिका क्षेत्र में एक वार्ड में चार पार्षद चुने जाएंगे.. इसी वजह से प्रत्येक मतदाता को सामान्यतः चार वोट देने होंगे.

हालांकि, कुछ प्रभागों (वार्ड) में उम्मीदवारों की संख्या के आधार पर तीन या पांच वोट भी देने की व्यवस्था है. वार्ड की रचना और सदस्यों की संख्या के आधार पर ही ईवीएम सेट किए है. मुंबई की बीएमसी को छोड़कर शेष 28 महानगरपालिकाओं में बहु-सदस्यीय प्रभाग पद्धति से चुनाव हो रहे हैं.

महाराष्ट्र में 893 वार्ड में 2869 सीटें है

महाराष्ट्र की 29 नगर महापालिका क्षेत्र के वार्डों में चुनाव हो रहे हैं. बृहन्मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) में 227 प्रभाग (वार्ड) हैं जबकि सभी महानगरपालिकाओं को मिलाकर कुल 893 प्रभाग (वार्ड) हैं. इस तरह से राज्य के 29 नगर महापालिका क्षेत्र में कुल 2,869 सीटें शामिल हैं, जिनके लिए 15,908 उम्मीदवार चुनावी मैदान में हैं.

महाराष्ट्र की सरकार ने राज्य के नगर महापालिका को चार वर्गों में विभाजित किया है. ए वर्ग में पुणे और नागपुर, बी वर्ग में ठाणे, नासिक, पिंपरी-चिंचवाड़, सी वर्ग में नवी मुंबई, कल्याण-डोंबिवली, वसई-विरार, छत्रपति संभाजीनगर और डी वर्ग में मीरा-भायंदर, भिवंडी-निजामपुर, उल्हासनगर, पनवेल सहित बाकी की नगर पालिका क्षेत्र है.

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महाराष्ट्र में मल्टी-मेंबर वार्ड सिस्टम क्या है

महाराष्ट्र की 29 नगर निगमों में से 28 में चार सदस्यीय वार्ड प्रणाली लागू है. महाराष्ट्र शहरी विकास विभाग ने साल 2024 में अधिसूचना जारी की थी. इस तरह से वार्डों की कुल संख्या में कोई परिवर्तन नहीं किया गया, लेकिन प्रत्येक चार वार्डों को एक साथ समूहित किया गया है. मुंबई को छोड़कर बाकी के क्षेत्रों में एक नगर निगम के प्रत्येक वार्ड में यथासंभव चार पार्षद चुने जाएंगे, लेकिन तीन पार्षदों से कम नहीं और पांच पार्षदों से अधिक नहीं.

राज्य सरकार ने मार्च 2024 में बताया था कि शहरी क्षेत्र के वार्डों में सेवाओं और विकास योजनाओं को प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए, यह जरूरी है कि नगर निगम के हर वार्ड में चार पार्षद हों. इस व्यवस्था के बाद कोई उम्मीदवार किसी वार्ड से अपना आवेदन दाखिल कर सकता है, लेकिन वह अपने वार्ड समूह के चार वार्डों में चुनाव प्रचार कर सकता है. निर्वाचित होने पर, प्रतिनिधि चारों वार्डों में विकास कार्य करवा सकता है.

नगर महापालिका में नई व्यवस्था के तहत मतदाता न केवल अपने वार्ड के बल्कि तीन अन्य वार्डों के प्रतिनिधि का भी चुनाव कर सकता है. वहीं, यदि कोई मतदाता अन्य वार्डों के उम्मीदवारों को वोट नहीं देना चाहता है, तो पीठासीन अधिकारी को मतदान अधिकारियों को सूचित करना होगा ताकि दस्तावेजी प्रमाण सुनिश्चित किया जा सके और मतगणना के समय किसी प्रकार की भ्रम की स्थिति से बचा जा सके.

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मुंबई में एक वार्ड का आकार और आबादी किसी भी अन्य नगर निगम की तुलना में बहुत बड़ी है. राज्य की राजधानी में मल्टी-मेंबर वार्ड सिस्टम लागू करना एक मुश्किल काम होगा.

महाराष्ट्र में चार-सदस्यीय प्रणाली कब अपनाई?

महाराष्ट्र में चार-सदस्यीय वार्ड प्रणाली का प्रस्ताव क मार्च 2024 में शिंदे सरकार के द्वारा विधानसभा से पारित कराया गया था, लेकिन उससे पहले ही बहु-सदस्यीय वोटिंग पैटर्न रहा है. नगर निगमों में तीन-सदस्यीय वार्ड प्रणाली 2001 में तत्कालीन मुख्यमंत्री, स्वर्गीय विलासराव देशमुख द्वारा शुरू की गई थी. हालांकि, इसे 2006 में खत्म कर दिया गया था.

साल 2011 में, तत्कालीन मुख्यमंत्री पृथ्वीराज चव्हाण ने नगर निगमों के लिए दो-सदस्यीय वार्ड प्रणाली और परिषदों के लिए चार-सदस्यीय प्रणाली शुरू की थी. 2016 में, मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने इसे निगमों के लिए चार-सदस्यीय प्रणाली और परिषदों के लिए तीन-सदस्यीय प्रणाली में बदल दिया था. इसके बाद दिसंबर 2019 में, मह विकास अघाड़ी (MVA) सरकार ने इसे खत्म करने और एकल-सदस्यीय वार्ड प्रणाली पर वापस लौटने का फैसला किया था.

2021 में महाविकास अघाड़ी सरकार ने बीएमसी को छोड़कर सभी नगर परिषदों और निगमों के लिए मल्टी-मेंबर वार्ड सिस्टम को फिर से शुरू करने का फैसला किया, जिसमें नगर निगमों के लिए तीन-मेंबर वार्ड सिस्टम और नगर परिषदों के लिए दो-मेंबर वार्ड सिस्टम था. मार्च 2024 में एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली सरकार ने फिर से बदल दिया, जिसमें चार-मेंबर वार्ड सिस्टम की व्यवस्था कर दी. इसके चलते ही अब मुंबई में एक वार्ड से एक पार्षद चुना जाएगा जबकि बाकी की 28 नगर निगमों में एक वार्ड से चार पार्षद चुने जाएंगे.

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