लोहागढ़ किला अपनी ऐतिहासिक विरासत और प्राकृतिक सुंदरता के लिए जाना जाता रहा है. लेकिन इन दिनों ये केतन अग्रवाल हत्या मामले को लेकर चर्चा में है. इस मर्डर के बाद यहां टूरिस्टों की संख्या में बढ़ोतरी देखने को मिल रही है.
वैसे तो ये किला आमतौर पर मानसून के मौसम में टूरिस्टों को आकर्षित करता है, लेकिन अब लोहागढ़ किले के बारे में लोगों में ज्यादा जिज्ञासा पैदा हो गई है. लोहागढ़-विसापुर विकास मंच के अध्यक्ष सचिन टेकावड़े के मुताबिक, पिछले पांच दिनों में टूरिस्टों का आना-जाना बढ़ गया है. लोहागढ़ में आमतौर पर बारिश के मौसम में वीकेंड पर लगभग 10,000 टूरिस्ट आते हैं और बाकी दिनों में लगभग 800 से 1,000 टूरिस्ट आते हैं.
हालांकि, इस साल मानसून में हुई देरी की वजह से, जून में टूरिस्टो की संख्या कम थी. पिछले 20 सालों से लोहागढ़ किले और आस-पास के गांवों के डेवलपमेंट के लिए काम कर रहे टेकावडे ने बताया कि ये किला पहले अपने ऐतिहासिक अहमियत के लिए जाना जाता था. लेकिन अब कई विजिटर सिर्फ मर्डर केस से जुड़ी जगह देखने आ रहे हैं.
UNESCO की वर्ल्ड हेरिटेज लिस्टिंग में शामिल है किला
लोहागढ़ किला महाराष्ट्र की ऐतिहासिक विरासत का हिस्सा है और UNESCO की वर्ल्ड हेरिटेज लिस्टिंग में शामिल है. इतिहासकारों का कहना है कि लोहागढ़ सदियों से एक अहम पहाड़ी किला रहा है. वहीं, किले के कर्मचारियों ने कहा कि कई विजिटर अब उस चट्टान की जगह के बारे में पूछ रहे हैं जहां केतन को धक्का दिया गया था. कुछ टूरिस्ट उस जगह को 'सिया पॉइंट' कहने लगे हैं.
भारी बारिश न होने के बावजूद, मुंबई, पुणे और नासिक से लोग इस मामले के बारे में सुनकर किले में घूमने आ रहे हैं. नासिक के एक 21 साल के विजिटर, सिद्धेश ने कहा कि उन्होंने शुरू में कसारा घाट के पास ट्रेक करने का प्लान बनाया था, लेकिन लोहागढ़ मामले के बारे में सुनने के बाद उन्होंने अपना प्लान बदल दिया और लोहागढ़-विसापुर जाने का फैसला किया.
मुंबई के एक टूरिस्ट वरद ने कहा कि उनके दोस्तों में इस केस से जुड़े किले की सही जगह को लेकर एक्साइटमेंट है. उन्होंने आगे कहा कि उन्होंने पहले भी घूमने का प्लान बनाया था, लेकिन पुलिस की पाबंदियों की वजह से पिछले रविवार को किला बंद था. सह्याद्री पहाड़ों की रेंज में लगभग 3,389 फीट की ऊंचाई पर मौजूद लोहागढ़ को महाराष्ट्र के जरूरी पहाड़ी किलों में से एक माना जाता है.
छत्रपति शिवाजी महाराज के राज में इकोनॉमिक सेंटर
पांडुरंग बलकावड़े ने कहा कि ये किला सातवाहन काल से था और बाद में छत्रपति शिवाजी महाराज के राज में एक जरूरी मिलिट्री और इकोनॉमिक सेंटर बन गया. किले पर सातवाहन, चालुक्य, यादव और बहमनी समेत कई राजवंशों का कंट्रोल था. 1637 में, ये बीजापुर के आदिलशाही राज के अंदर आ गया.
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छत्रपति शिवाजी महाराज ने 1657 में लोहागढ़ पर कब्जा कर लिया था. 1665 में पुरंदर की संधि के बाद, इसे मुगलों को सौंप दिया गया था. लेकिन 1670 में मराठों ने इसे फिर से कब्जा कर लिया. पेशवा के जमाने में, किले का इस्तेमाल सरकारी खजाने की सुरक्षा के लिए किया जाता था और ये एक जरूरी स्ट्रेटेजिक जगह बनी रही. अब केतन अग्रवाल मर्डर केस की चल रही जांच के साथ-साथ इसकी ऐतिहासिक पहचान पर भी चर्चा हो रही है.
ओमकार