'मेरी चिता को आग देने वाला चला गया...' सदमे में केतन की फैमिली, पिता बोले- मेरा सब खत्म हो गया

'मेरे बुढ़ापे का वही सहारा था. वो ही मेरी चिता को आग देने वाला था. अब वो ही चला गया... मेरा सब खत्म हो गया.' पुणे में 26 साल के केतन अग्रवाल की मौत के बाद पिता विशाल अग्रवाल गहरे दुख में हैं. बेटे को खोने के बाद पूरा परिवार सदमे में है. पिता का कहना है कि सिया और उसके बॉयफ्रेंड चेतन चौधरी जैसे लोग समाज के लिए घातक हैं.

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केतन के पिता विशाल अग्रवाल ने बताई पूरी कहानी. (Photo: Screengrab) केतन के पिता विशाल अग्रवाल ने बताई पूरी कहानी. (Photo: Screengrab)

aajtak.in

  • पुणे,
  • 24 जून 2026,
  • अपडेटेड 10:25 AM IST

महाराष्ट्र के पुणे में 26 साल के केतन अग्रवाल की मौत को लेकर कई बातें सामने आ रही हैं. केतन को उसकी मंगेतर सिया ने अपने बॉयफ्रेंड चेतन चौधरी के साथ मिलकर किले से धक्का दे दिया. इस घटना को लेकर केतन के पिता विशाल अग्रवाल ने केतन और सिया की पूरी कहानी बताई है. उन्होंने कहा कि 6 तारीख की शाम 4 लोग एक साथ बाली जा रहे थे. सिर्फ केतन का ही पासपोर्ट चोरी हो गया, जिसकी वजह से वो जा नहीं पाए.

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एजेंसी के अनुसार, केतन के पिता ने कहा कि एयरपोर्ट से केतन रिटर्न आ गए. हमें समझ में नहीं आया कि एक ही बैग में जब सब चीजें रखी हुई थीं. बाकी सब करेंसी, क्रेडिट कार्ड बाकी के पासपोर्ट अवेलेबल हैं. एक ही पासपोर्ट कैसे चोरी हो सकता है. लेकिन इस बात को उस वक्त ज्यादा सीरियस नहीं लिया. लगा कि कैब ड्राइवर ने निकाल लिया होगा, कहीं गिर गया होगा.

इसके बाद फिर वापस सिया ने जिद की कि उसको लोहगढ़ किला जाना है. हमें समझ में नहीं आया कि क्यों जाना है. बाली जाने का कैंसल होने के बाद ये 14 तारीख को वहां गए. उस टाइम को लेकर मुझे पता चला कि उसने केतन को धक्का मारा था, जिसकी वजह से केतन पीछे सरक गया और एक पेड़ का सहारा लेकर वो बच गया. इसके बाद सिया ने इमीडिएटली नाटक किया कि सांप आ गया, सांप आ गया, सांप आ गया और मैंने तेरे को बचा लिया.

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उस वक्त केतन के दिमाग में नहीं आया कि इसने मेरे को गिराने के लिए धक्का मारा था, लेकिन अभी सांप का बहाना कर रही है. फिर इमीडिएटली उसने फिर बोला 18 तारीख को मेरे को फिर लोहगढ़ जाना है, जबकि 19 को उसका बर्थडे था. महाबलेश्वर में हम सेलिब्रेट कर रहे थे, लेकिन उसने बोला कि मेरे दोस्त पार्टी रखना चाहते हैं. कुछ लड़के-लड़कियां हैं, केतन को उसने ऐसा कन्विंस किया कि कुछ भी कर बर्थडे विश वहां करना है.

उसने केतन की मम्मी को भी रात को फोन किया, वीडियो कॉलिंग कर कहा कि आप समझाओ कि हमको जाना है. फिर हमने बोला कि कोई बात नहीं, चलो बर्थडे है तो जाकर आ जाएंगे. 

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अभी पुलिस इन्वेस्टिगेशन से पता चल रहा है कि ये लड़का चेतन चौधरी टू व्हीलर गाड़ी जुपिटर से लोहगढ़ पहुंचा. उनके आगे 10-20 फीट आगे पीछे वो दिख रहा है. साथ ही ऊपर गया. दोनों ने मिलकर किसी चीज का वार करके केतन को ऊपर से नीचे फेंक दिया. वो उनका कोआर्डिनेशन भी दिख रहा है.

इसके बाद वो लड़का वहां से गायब हो गया. फिर सिया ने थोड़ा बहुत शोरगुल किया. हमें 10:45 बजे सिया की मम्मी का फोन आया कि केतन फोर्ट से गिर गया है. हम इमीडिएट वहां भागे. वहां हमने देखा कि पुलिस केतन को निकाल रही थी. इसके बाद डॉक्टर ने बोला कि अब ये नहीं रहा. लेकिन हमारा शक बढ़ता जा रहा था. ग्रामीण एसपी संदीप सिंह गिल ने सपोर्ट करके हमको इमीडिएटली पूरा डिटेल दिखाया और सिया और चेतन चौधरी को अरेस्ट कर लिया.

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'शादी नहीं करनी थी तो इनकार कर देती'

क्या उन लोगों की पहले से ये तैयारी थी? इस सवाल पर केतन के पिता कहते हैं कि अभी ये तो नहीं बता पाएंगे. हमारे लिए भी बहुत बड़ा शॉकिंग है. अगर उसको शादी नहीं करनी थी तो सीधा उसने अपने मां-बाप को या हमको इनकार कर देती या जिस लड़के के साथ उसका अफेयर चल रहा है, कहीं से भी एक फोटो हमको भेज देते तो भी हम कैंसल कर देते.

सिया और चेतन चौधरी ने इतना बड़ा कदम उठाने का क्यों सोचा और इनकी क्या मानसिकता है. इन लोगों की इतनी क्रूर मानसिकता है कि किसी का 26 साल का लड़का थोड़ी सी अय्याशी के लिए मार दिया जाए. इनकी इतनी क्रूर विचारधारा को समाज में गंभीरता से लेना चाहिए. एक 20 साल की लड़की में किसी का मर्डर करने की सोच आना और करना कहां तक पॉसिबल है.

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अगर पिता से आप पूछोगे कि उसका 26 साल का लड़का गुजर गया और तो वो दुख समंदर से बड़ा है. जो मेरे बुढापे का सहारा था, मेरा आगे का वंशज था. मेरी चिता को वो ही आग देने वाला था, आज वो ही नहीं रहा. मेरा तो सबकुछ ही खत्म हो गया. केतन पढ़ाई में बहुत होनहार था. उसने यूएस बोस्टन से एमबीए किया था. एमबीए कंप्लीट करने के बाद उसने मेरे ही बिजनेस में मेरा हाथ बंटाना शुरू किया. आज पीसीएमसी में काफी अच्छा काम कर रहा था.

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'केस रेगुलर कोर्ट में चला तो सुनवाई में 10 साल निकल जाएंगे'

विशाल अग्रवाल कहते हैं कि मेरे लिए तो कोहिनूर था, जिसे इन्होंने दगा करके मार डाला. समाज में ऐसे लोगों का होना कितना घातक है. आज मेरे साथ हो गया, कल ऐसे ही लोग सीखेंगे, अगर इनको सबक नहीं सिखाया किसी ने तो समाज के कितने बच्चों के साथ ऐसा ही होगा और उनके मां-बाप रोते रह जाएंगे. मेरी अपील सिर्फ सरकार से इतनी है कि किसी भी हालत में इस केस को फास्ट ट्रैक पे लिया जाए. उनको जल्द से जल्द सजा मिल सके. अगर ये केस रेगुलर कोर्ट में चला तो इसका हियरिंग होने में 10 साल निकल जाएंगे. उसमें इनको बेल हो गई तो ये क्या करेंगे, ये पता नहीं चलेगा.

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