'पहले राहुल-सोनिया और अखिलेश को भेजें न्योता', उद्धव के 'राम रक्षा' आंदोलन पर शिंदे का तंज

अयोध्या राम मंदिर दान विवाद को लेकर महाराष्ट्र की राजनीति गरमा गई है. राम रक्षा आंदोलन की घोषणा के बाद एकनाथ शिंदे ने उद्धव ठाकरे पर हिंदुत्व छोड़ने और राजनीतिक लाभ के लिए राम का नाम लेने का आरोप लगाया. शिंदे ने कहा कि हिंदुत्व कोई राजनीतिक सुविधा का चोला नहीं है.

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उद्धव पर निशाना साधते हुए शिंदे ने कहा कि पिता के आदर्श छोड़ने वालों को राम पर बोलने का हक नहीं है. (Photo: ITG) उद्धव पर निशाना साधते हुए शिंदे ने कहा कि पिता के आदर्श छोड़ने वालों को राम पर बोलने का हक नहीं है. (Photo: ITG)

aajtak.in

  • मुंबई,
  • 19 जुलाई 2026,
  • अपडेटेड 6:53 AM IST

महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने शनिवार को शिवसेना (UBT) प्रमुख उद्धव ठाकरे पर करारा हमला किया. शिंदे ने कहा कि जो लोग कभी रामभक्तों पर आपत्तिजनक टिप्पणियां करते थे और जिन्होंने कांग्रेस के साथ हाथ मिला लिया, वे आज भगवान राम और हिंदुत्व की बात कर रहे हैं. 

दरअसल, उद्धव ठाकरे ने अयोध्या राम मंदिर के चंदे में कथित हेराफेरी के खिलाफ 'राम रक्षा' आंदोलन शुरू किया है, जिस पर पलटवार करते हुए शिंदे ने ठाकरे के हिंदुत्व पर गंभीर सवाल उठाए हैं.

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शिवसेना प्रमुख एकनाथ शिंदे ने नागपुर में उद्धव ठाकरे के बयानों का जवाब देते हुए कहा कि शिवसेना (UBT) ने जिन दलों के साथ गठबंधन किया है, उन्होंने हमेशा हिंदुत्व, वीर सावरकर और शिवसेना संस्थापक बालासाहेब ठाकरे की विचारधारा का विरोध किया है. ऐसे लोगों के साथ जाकर उद्धव पहले ही हिंदुत्व का रास्ता छोड़ चुके हैं. 

शिंदे का तंज

शिंदे ने तंज कसते हुए कहा. "अगर शिवसेना (UBT) सच में 'राम रक्षा' आंदोलन चलाने को लेकर गंभीर है, तो उन्हें सबसे पहले अपने गठबंधन सहयोगियों- राहुल गांधी, सोनिया गांधी और अखिलेश यादव को इसमें आमंत्रित करना चाहिए. इसके बाद ही उन्हें आरएसएस प्रमुख या मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को न्योता देना चाहिए."

यह भी पढ़ें: फडणवीस के गढ़ नागपुर में गरजेंगे उद्धव ठाकरे, 'राम रक्षा' आंदोलन का किया ऐलान

उपमुख्यमंत्री शिंदे ने बालासाहेब ठाकरे के प्रसिद्ध नारे 'गर्व से कहो हम हिंदू हैं' का जिक्र करते हुए कहा कि इतने सालों बाद अचानक UBT गुट को यह नारा याद आया है. उन्होंने कहा कि हिंदुत्व कोई ऐसी चीज नहीं है जिसे अपनी सुविधा के अनुसार जब चाहें छोड़ दें और जब राजनीतिक हित साधने हों तो फिर से पहन लें. उन्होंने उद्धव पर निशाना साधते हुए कहा कि 'राम रक्षा' की बात करने से पहले उन्हें अपनी पार्टी और अपनी विचारधारा की रक्षा करनी चाहिए.

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बालासाहेब का किया जिक्र

भगवान राम का उदाहरण देते हुए एकनाथ शिंदे ने कहा कि प्रभु राम ने अपने पिता के वचन को निभाने के लिए 14 वर्ष का वनवास स्वीकार कर लिया था. दूसरी तरफ वे लोग हैं जिन्होंने अपने ही पिता (बालासाहेब ठाकरे) के आदर्शों और सिद्धांतों को बीच रास्ते में ही छोड़ दिया. ऐसे लोगों के पास भगवान राम के आदर्शों पर उपदेश देने का कोई नैतिक अधिकार नहीं है. शिंदे ने दावा किया कि उद्धव का यह आंदोलन भगवान राम की रक्षा के लिए नहीं, बल्कि अपनी डूबती राजनीतिक पार्टी को बचाने की एक कोशिश है.

यह भी पढ़ें: उद्धव ठाकरे को एक और झटका! पाला बदलने वाले सचिन अहीर बने विधान परिषद के उपसभापति

बता दें कि इससे पहले शनिवार को नागपुर में एक रैली को संबोधित करते हुए उद्धव ठाकरे ने भाजपा पर निशाना साधा था और उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से पूछा था कि वह राम मंदिर के "लुटेरों" के साथ हैं या राम की "रक्षा" करने वालों के साथ.
 

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