महाराष्ट्र की रामाई आवास योजना में कथित बड़े फर्जीवाड़े का मामला सामने आया है. शिवसेना (यूबीटी) के नेता और विधान परिषद में विपक्ष के नेता अंबादास दानवे ने आरोप लगाया कि योजना का लाभ लेने के लिए मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नाम पर भी फर्जी दस्तावेज तैयार कर आवेदन किए गए.
मंगलवार को विधान परिषद में यह मुद्दा उठाते हुए दानवे ने दावा किया कि छत्रपति संभाजीनगर नगर निगम क्षेत्र में रामाई आवास योजना के तहत बड़े पैमाने पर अनियमितताएं हुई हैं. उन्होंने आरोप लगाया कि एक भाजपा पार्षद के बेटे का नाम भी लाभार्थियों की सूची में शामिल था, जबकि उसका परिवार आर्थिक रूप से संपन्न है और योजना के लिए पात्र नहीं था.
फडणवीस के नाम पर 185 रुपये का संपत्ति कर बकाया
दानवे के मुताबिक, "देवेंद्र गंगाधरराव फडणवीस" के नाम से राहुल नगर निवासी बताकर फर्जी राशन कार्ड, नगर निगम की टैक्स रसीद और जाति प्रमाणपत्र तैयार किए गए. उन्होंने यह भी दावा किया कि इन फर्जी दस्तावेजों में फडणवीस के नाम पर 185 रुपये का संपत्ति कर बकाया भी दिखाया गया था.
उन्होंने आरोप लगाया कि इसी तरह उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नाम पर भी फर्जी राशन कार्ड बनाया गया, जिसमें उनकी पत्नी, बेटे और सांसद श्रीकांत शिंदे, बहू और पोते के नाम भी दर्ज किए गए. इसके अलावा शिंदे के नाम से कथित तौर पर फर्जी जाति प्रमाणपत्र भी तैयार किया गया.
दानवे ने आरोप लगाया कि इस पूरे फर्जीवाड़े में नगर निगम के कुछ अधिकारी और परियोजना प्रबंधन सलाहकार भी शामिल हो सकते हैं.
'एक भी रुपये का भुगतान नहीं हुआ'
मामले पर जवाब देते हुए सामाजिक न्याय मंत्री संजय शिरसाट ने कहा कि मामला गंभीर है, लेकिन राहत की बात यह है कि योजना के तहत अब तक किसी भी लाभार्थी को एक भी रुपये का भुगतान नहीं किया गया है.
उन्होंने बताया कि वर्ष 2025 में योजना के तहत 8,442 आवेदन प्राप्त हुए थे, लेकिन भौतिक सत्यापन के लिए केवल 2,913 आवेदक ही उपस्थित हुए. जांच के दौरान कई आवेदन दूसरे राज्यों के लोगों के पाए गए. इसके बाद 330 आवेदनों की गहन जांच की गई, जिनमें से केवल 221 आवेदकों को योजना के लिए पात्र माना गया. सरकार का कहना है कि पूरे मामले की जांच की जा रही है और दोषियों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी.
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