महाराष्ट्र की राजधानी मुंबई के बांद्रा रिक्लेमेशन स्थित फुटबॉल मैदान को कन्वेंशन और एग्जिबिशन सेंटर में बदलने के प्रस्ताव के खिलाफ खिलाड़ियों, स्थानीय निवासियों और जनप्रतिनिधियों ने विरोध किया है. लोगों का कहना है कि यह मैदान हजारों खिलाड़ियों की पहचान और भविष्य से जुड़ा है, इसलिए इसे खत्म करने के बजाय आधुनिक खेल सुविधाओं के साथ विकसित किया जाना चाहिए.
लोगों ने राज्य सरकार के उस प्रस्ताव का विरोध किया, जिसमें बांद्रा रिक्लेमेशन के 8,450 वर्ग मीटर के फुटबॉल मैदान को कन्वेंशन और एग्ज़िबिशन सेंटर में बदलने की बात कही गई थी. नागरिकों ने मांग की है कि खेल के लिए आरक्षित इस मैदान को वैसे ही रहने दिया जाए और इसके बजाय इसे आधुनिक खेल सुविधाओं के साथ अपग्रेड किया जाए.
हाल ही में BMC की इम्प्रूवमेंट कमेटी ने इस प्रस्ताव को मंज़ूरी दी थी. यह प्लॉट मूल रूप से MMRDA यानी मुंबई मेट्रोपोलिटन रीजन डेवलपमेंट अथॉरिटी का था, जिसे MHADA यानी महाराष्ट्र हाउसिंग एंड एरिया डेवलपमेंट अथॉरिटी को सौंप दिया गया था, जबकि BMC इसकी प्लानिंग अथॉरिटी है.
'कानूनी विकल्पों पर विचार...'
मुंबई फुटबॉल एसोसिएशन के वाइस प्रेसिडेंट रयान मेनेजेस ने कहा, "MHADA के साथ हमारा लीज एग्रीमेंट 2024 में खत्म हो गया था. हमने इसे रिन्यू करने के लिए आवेदन किया था, लेकिन कोई जवाब नहीं मिला. BMC से मंजूरी मिलने के बाद ही हमें एग्जिबिशन सेंटर के बारे में पता चला. हम अपने कानूनी विकल्पों पर विचार कर रहे हैं."
पूर्व भारतीय फुटबॉलर और अब कोच स्टीवन डायस ने सवाल उठाया, "यह मुंबई का एकमात्र फुटबॉल मैदान है, जहां साल भर में करीब 5,000 खिलाड़ी खेलते हैं. यह मुंबई फुटबॉल का केंद्र है. अगर हम अपने खिलाड़ियों को खेल के लिए मैदान नहीं दे सकते, तो हम भारत के वर्ल्ड कप खेलने की उम्मीद कैसे कर सकते हैं?"
'मुद्दे को संसद में उठाएंगे...'
स्थानीय सांसद वर्षा गायकवाड़ ने निवासियों को भरोसा दिलाया कि वह इस मुद्दे को जमीनी स्तर पर और संसद में उठाएंगी. उन्होंने कहा, "इस इलाके के स्थानीय विधायक (आशीष शेलार) राज्य के कल्चर मिनिस्टर और मुंबई उपनगरों के गार्जियन मिनिस्टर हैं. वह इस लूट के खिलाफ कुछ नहीं बोल रहे हैं. हम इस मुद्दे को उठाएंगे और मुख्यमंत्री से इस प्रोजेक्ट पर फिर से विचार करने की गुजारिश करेंगे."
BMC का कहना है कि यह प्लॉट मूल रूप से 1983 के डेवलपमेंट प्लान में एग्जिबिशन सेंटर के लिए रिजर्व किया गया था.
अधिकारियों ने बताया कि DP 2034 तैयार करते वक्त इसे 'स्पोर्ट्स ग्राउंड' के तौर पर फिर से तय किया गया था, क्योंकि उस समय यह जमीन खाली पड़ी थी और फुटबॉल ग्राउंड के तौर पर इस्तेमाल हो रही थी. उन्होंने कहा कि मौजूदा प्रस्ताव असल डेवलपमेंट प्लान में तय रिजर्वेशन को ही फिर से लागू करता है. साल 2018 में शुरू हुआ नेविल डिसूजा फुटबॉल ग्राउंड मुंबई के कुछ खास फुटबॉल मैदानों में से एक है.
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मुंबई डिस्ट्रिक्ट फुटबॉल एसोसिएशन के प्रेसिडेंट आदित्य ठाकरे ने कहा कि इस मैदान पर हर साल कई फुटबॉल टूर्नामेंट होते रहे हैं, लेकिन रिजर्वेशन में बदलाव की वजह से अब एसोसिएशन को इस मैदान का इस्तेमाल करने से रोका जा रहा है. उन्होंने सोशल मीडिया पोस्ट में लिखा, "मुंबई फुटबॉल एसोसिएशन के तौर पर, जाहिर है कि अब हमें दूसरे मैदानों के इस्तेमाल के लिए पैसे देने होंगे. असल मुद्दा यह है कि युवाओं से खेल के मैदान छीनना, एसोसिएशन से मैदान छीनना और फिर खेल के भविष्य पर बहस करना बेकार है."
मुस्तफा शेख