दिल्ली के एक होटल में लगी भीषण आग में 21 लोगों की मौत के बाद होटलों की कार्यप्रणाली और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर कई गंभीर खुलासे सामने आए. जांच में पता चला कि जिस होटल में आग लगी थी, उसे केवल छह कमरों के संचालन की अनुमति थी, लेकिन वहां 20 से अधिक कमरे चलाए जा रहे थे. होटल में फायर सेफ्टी स्टैंडर्ड का पालन नहीं किया जा रहा था. एंट्री और एग्जिट नियमों का उल्लंघन हुआ था और आग लगने के दौरान एग्जिट गेट बंद थे, जिससे लोग बाहर नहीं निकल सके.
इन खुलासों के बाद आजतक ने देश के विभिन्न शहरों में होटल और लॉजिंग सुविधाओं की वास्तविक स्थिति जानने के लिए रियलिटी चेक करने का फैसला किया. इसी कड़ी में साउथ मुंबई के कुछ होटल और डॉर्मिटरी (Dormitory) का निरीक्षण किया गया. साउथ मुंबई शहर का प्रमुख पर्यटन और व्यावसायिक केंद्र है, जहां सीएसएमटी रेलवे स्टेशन, फोर्ट और डॉक एरिया के आसपास बड़ी संख्या में पर्यटक और कारोबारी आते हैं.
केस स्टडी-1: डॉल्फिन होटल, बैलार्ड एस्टेट के पास, शहीद भगत सिंह मार्ग
जब आजतक की टीम इस होटल पहुंची तो पाया कि यह ग्राउंड प्लस चार मंजिला इमारत है, जहां पर्यटकों के लिए कमरे उपलब्ध कराए जाते हैं. भवन में एक बॉयज हॉस्टल भी संचालित होता है. शुरुआत में आजतक की टीम बिना कैमरे के होटल के अंदर गई और रिसेप्शन पर मौजूद व्यक्ति से बातचीत की. उस समय कुछ मेहमान होटल छोड़ रहे थे जबकि कुछ रिसेप्शन क्षेत्र में मौजूद थे.
जब आजतक की टीम ने बिना अपनी पहचान उजागर किए पूछा कि होटल में कितने कमरे हैं, तो रिसेप्शन पर मौजूद व्यक्ति ने सीधे जवाब नहीं दिया. वह बार-बार पूछता रहा कि कितने कमरे चाहिए, उतने उपलब्ध करा दिए जाएंगे. कई बार पूछने के बावजूद उसने कमरों की वास्तविक संख्या नहीं बताई. जब टीम ने उसे बताया कि हम आजतक से हैं और होटल में सुरक्षा मानकों तथा नियमों के पालन की जांच कर रहे हैं, तो उसका रवैया बदल गया
. उसने कहा कि होटल में सिविल कार्य चल रहा है और सुरक्षा व्यवस्था, एंट्री-एग्जिट या अन्य व्यवस्थाओं के बारे में कोई जानकारी नहीं दे सकता. इसके बाद जब आजतक की टीम कैमरे के साथ अंदर पहुंची तो वही कर्मचारी ऑन कैमरा बात करने से बचता नजर आया और उसने परिसर छोड़ने को कहा. निरीक्षण के दौरान पाया गया कि होटल में केवल एक ही एंट्री और एग्जिट द्वार था. रिसेप्शन क्षेत्र में कोई फायर हाइड्रेंट या फायर सेफ्टी सिस्टम दिखाई नहीं दिया.
केस स्टडी-2: पैविलियन डॉर्मिटरी, पी. डी'मेलो रोड
दूसरी जांच पी. डी'मेलो रोड स्थित पैविलियन डॉर्मिटरी में की गई. यह स्थान सीएसएमटी रेलवे स्टेशन और इंदिरा डॉक के पास स्थित है. इलाके में ऐसे कई डॉर्मिटरी संचालित हैं, जहां कामकाजी लोगों और कम समय रुकने वालों को बिस्तर उपलब्ध कराए जाते हैं. शुरुआत में एक जूनियर कर्मचारी ने बताया कि डॉर्मिटरी मुंबई पोर्ट ट्रस्ट और बीएमसी के सभी नियमों का पालन करती है. बाद में वरिष्ठ कर्मचारी फिरतु चौरसिया ने आजतक की टीम से मुलाकात की.
चौरसिया ने कहा कि यदि हम निरीक्षण करना चाहते हैं तो वह हमें पूरी व्यवस्था दिखाने को तैयार हैं. कैमरे के साथ अंदर जाने पर देखा गया कि डॉर्मिटरी में लगभग 20 बेड हैं, जिनकी अनुमति मुंबई पोर्ट ट्रस्ट और बीएमसी से प्राप्त है. चौरसिया ने बताया कि मुंबई पोर्ट ट्रस्ट और फायर ब्रिगेड समय-समय पर सुरक्षा जांच करते हैं. उन्होंने फायर हाइड्रेंट, फायर सेफ्टी सिस्टम और एंट्री-एग्जिट रूट भी दिखाए. हालांकि निरीक्षण के दौरान एग्जिट गेट बंद मिला.
इस पर चौरसिया ने कहा कि एयर कंडीशनिंग चलने के कारण गेट बंद रखा गया था, लेकिन सामान्य परिस्थितियों में वह खुला रहता है. आजतक की टीम ने उन्हें आग जैसी आपात स्थिति में एग्जिट गेट बंद रहने के जोखिमों के बारे में बताया. इस पर उन्होंने कहा कि मुंबई पोर्ट ट्रस्ट और बीएमसी के अधिकारी नियमित रूप से निरीक्षण करते हैं और डॉर्मिटरी के पास सभी आवश्यक एनओसी मौजूद हैं.
केस स्टडी-3: सिटी होटल, छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस के सामने
तीसरी जांच साउथ मुंबई के फोर्ट इलाके में स्थित सिटी होटल में की गई. यह होटल यूनेस्को वर्ल्ड हेरिटेज साइट छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस (CSMT) रेलवे स्टेशन के ठीक सामने स्थित है और यहां यात्रियों की भारी आवाजाही रहती है. आजतक की टीम होटल के फर्स्ट फ्लोर स्थित रिसेप्शन पर पहुंची और अपनी पहचान बताई. इसके बाद होटल मालिक परवेज घासवाला को बुलाया गया. घासवाला ने आजतक की टीम का स्वागत किया और होटल में मौजूद सुरक्षा व्यवस्थाओं तथा संबंधित दस्तावेजों को दिखाने के लिए सहमति जताई.
उन्होंने बताया कि होटल को नियमित रूप से फायर सेफ्टी के लिए बी-फॉर्म (फायर एनओसी) जारी किया जाता है. उन्होंने 1 जनवरी 2026 को जारी फायर एनओसी सहित अन्य आवश्यक दस्तावेज भी दिखाए. घासवाला के मुताबिक होटल में अत्याधुनिक अग्नि सुरक्षा प्रणाली है, जिसमें फायर मोटर, इलेक्ट्रॉनिक कंट्रोल सिस्टम, स्प्रिंकलर नेटवर्क, फायर ब्रिगेड के लिए वाटर एग्जिट पॉइंट और स्पेशल वाटर स्टोरेज की व्यवस्था शामिल है. उन्होंने कहा कि बीएमसी और अन्य संबंधित एजेंसियां नियमित रूप से होटल का निरीक्षण करती हैं और होटल सभी निर्धारित नियमों का पालन करता है.
निरीक्षण के दौरान होटल की छठी मंजिल तक कमरों में फायर पाइपलाइन और स्प्रिंकलर सिस्टम स्पष्ट रूप से दिखाई दिए. मुंबई में किए गए इस रियलिटी चेक में अलग-अलग तस्वीरें सामने आईं. जहां कुछ प्रतिष्ठानों में सुरक्षा प्रबंधन को लेकर सवाल उठे, वहीं कुछ संस्थान अग्नि सुरक्षा और नियमों के अनुपालन के मामले में अपेक्षाकृत बेहतर स्थिति में दिखाई दिए. दिल्ली अग्निकांड के बाद यह स्पष्ट है कि केवल लाइसेंस होना पर्याप्त नहीं है, बल्कि सुरक्षा मानकों का वास्तविक पालन और नियमित निगरानी ही ऐसी दुर्घटनाओं को रोकने का सबसे प्रभावी उपाय है.
दिव्येश सिंह