पुणे: दो स्कूलों के पूर्व छात्रों ने खड़ा किया 100 बिस्तरों का कोविड अस्पताल

पुणे के दो मराठी स्कूलों के पूर्व छात्रों ने मदद का हाथ बढ़ाते हुए 100 बिस्तरों का कोविड अस्पताल खड़ा किया है. नूतन मराठी महाविद्यालय और भावे मराठी स्कूल के 1992-1994 में पासआउट हुए करीब 200 पूर्व छात्रों ने इस पहल के लिए हाथ मिलाया है.

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अस्पताल तैयार करवाने वाले पूर्व छात्र अस्पताल तैयार करवाने वाले पूर्व छात्र

पंकज खेळकर

  • पुणे ,
  • 02 मई 2021,
  • अपडेटेड 5:17 PM IST
  • इससे पहले बाढ़ पीड़ितों को भी पहुंचाई थी राहत
  • पूर्व छात्रों ने whatsapp ग्रुप पर बनाई योजना
  • लोगों को बिस्तरों के लिए जूझते देख आया आईडिया

कोरोना का प्रचंड रूप देश में जारी है, कहीं बेड नहीं हैं, कहीं ऑक्सीजन नहीं हैं, कहीं सिलेंडर के लिए भागदौड़ है. ये तस्वीरें कोरोना के इस संकट काल में देश के लगभग सभी हिस्सों से सामने आ रही हैं. ऐसे में पुणे के दो मराठी स्कूलों के पूर्व छात्रों ने मदद का हाथ बढ़ाते हुए 100 बिस्तरों का कोविड अस्पताल खड़ा किया है. नूतन मराठी महाविद्यालय और भावे मराठी स्कूल के 1992-1994 में पासआउट हुए करीब 200 पूर्व छात्रों ने इस पहल के लिए हाथ मिलाया है.

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कोविड अस्पताल खोलने वालों में शामिल डॉ ऋतुपर्णा शिंदे ने आजतक से बातचीत में कहा ''हाल ही में हम जैसे पूर्व छात्रों के कुछ रिश्तेदार कोरोना से संक्रमित हुए तो उन्हें ऑक्सीजन बेड नहीं मिलने की वजह से बहुत दिक्कतों का सामना करना पड़ा. ऐसी स्थिति में हमने मिलकर कुछ करने की बात सोची. तय किया गया कि जरूरतमंदों को राहत देने के लिए ऑक्सीजन बिस्तरों वाला अस्पताल खड़ा किया जाए. 200 पूर्व छात्रों ने खुद आपस में पैसे इकट्ठा करने के साथ नजदीकी लोगों से भी चंदा लिया. और 15 दिन के अंदर ही अस्पताल में मरीजों का इलाज भी शुरू हो गया.  

100 बिस्तरों के अस्पताल की अंदर से तस्वीर

इस पहल को पुणे नगर निगम (PMC) के कमिश्नर विक्रम कुमार ने बहुत अच्छा कदम बताते हुए स्वागत किया है. PMC ने इस अस्पताल के लिए मेडिसिन और ऑक्सीजन की सप्लाई की जिम्मेदारी संभाली है. अस्पताल खोलने की मुहिम में शामिल रहे पूर्व छात्र नितिन जोशी ने बताया कि हम सभी पूर्व छात्रों का एक whastapp ग्रुप है. उसी पर चैटिंग करते हुए हमने पहले भी सामाजिक कार्यों में योगदान के लिए कदम उठाया था. कोल्हापुर में जो बाढ़ आई थी, उस वक्त भी हमने पीड़ितों तक राहत पहुंचाई थी.

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पूर्व छात्र अधिराज गाडगिल के मुताबिक सभी दोस्तों ने मशवरा किया और कोविड अस्पताल खड़ा करने का विचार साकार हुआ. मुहिम से जुड़े डॉक्टर कपिल ने कहा, “महामारी में सरकारों से जो संभव हो पा रहा है, वो करने की कोशिश कर रही हैं. लेकिन सामाजिक प्राणी होने की वजह से हमारा भी कुछ फर्ज बनता है. कोरोना जैसी आपदा के वक्त नागरिकों को भी अपने सामर्थ्य के अनुसार जरूरतमंदों की ज्यादा से ज्यादा मदद के लिए आगे आना चाहिए.”  

 

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