महाराष्ट्र के अकोला शहर में भीषण जल संकट के बीच महानगरपालिका की लापरवाही एक बार फिर उजागर हुई है. शहर में जलापूर्ति करने पाइपलाइन फूटने से हजारों लीटर पानी नाली में बह गया, जिससे पहले से परेशान नागरिकों की मुश्किलें और बढ़ गई हैं.
जिस स्थान पर यह पाइपलाइन क्षतिग्रस्त हुई है, वहां नाली पर पुलिया निर्माण का कार्य चल रहा है. इसी दौरान की गई खुदाई में पाइपलाइन को नुकसान पहुंचा और वह फूट गई. चौंकाने वाली बात यह है कि इस घटना की सूचना दो दिन पहले ही स्थानिक नागरिक अभय शास्त्री और भारत पाटिल ने अकोला नगर पालिका के सभापति को दे दी थी.
नागरिकों के मुताबिक, समय रहते सूचना देने के बावजूद न तो महानगरपालिका प्रशासन ने कोई ठोस कदम उठाया और न ही जनप्रतिनिधियों ने इस ओर गंभीरता दिखाई. नतीजतन, पानी सप्लाई के दिन भी पाइपलाइन की मरम्मत नहीं की गई और हजारों लीटर पानी नाली में बहता रहा.
इस लापरवाही का खामियाजा सीधे तौर पर आम नागरिकों को भुगतना पड़ रहा है. जहां एक ओर 8 दिन बाद आने वाली जलापूर्ति का लोग बेसब्री से इंतजार करते हैं, वहीं इस बार नलों से मटमैला और दुर्गंधयुक्त पानी आने से लोगों में भारी नाराजगी है. कई इलाकों में पानी का दबाव ही नहीं पहुंच पाया, जिससे जलापूर्ति पूरी तरह बाधित रही.
स्थानीय नागरिकों ने आक्रोश जताते हुए कहा कि “हमने पहले ही प्रशासन को सूचना दी थी, लेकिन किसी ने ध्यान नहीं दिया. अब पीने के पानी के लिए टैंकर मंगवाने की नौबत आ गई है.”
बताया जा रहा है कि लीकेज पाइप लाइन में से बड़ी मात्रा में पानी बीच रास्ते में ही बह जाने से आगे के क्षेत्रों तक पानी नहीं पहुंच पाया. ऐसे में कई परिवारों को अब टैंकर से पानी खरीदकर अपनी जरूरतें पूरी करनी पड़ रही हैं. देखें VIDEO:-
इस मामले में जलापूर्ति विभाग के अधिकारी ने बताया, हमें जानकारी मिलने के बाद वाल्व बंद कर दिया गया है, लेकिन पाइपलाइन में जो पानी था, वह बह चुका है.''
बता दें कि शहर को पानी सप्लाई करने वाले काटेपूर्णा बांध में मात्र 23 प्रतिशत जलसंचय बचा है और मानसून की देरी से संकट और गहरा गया है. ऐसे समय में प्रशासन की यह लापरवाही नागरिकों के लिए दोहरी मार साबित हो रही है.
नागरिकों ने मांग की है कि संबंधित ठेकेदार और जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई की जाए और जल्द से जल्द पाइपलाइन की मरम्मत कर स्वच्छ और नियमित जलापूर्ति सुनिश्चित की जाए, अन्यथा आंदोलन की चेतावनी दी गई है.
धनंजय साबले