'हम सिर्फ महाराष्ट्र नहीं, पूरे देश को हरे रंग में देंगे', बोले AIMIM नेता वारिस पठान

हाल में ही मुंब्रा से AIMIM की पार्षद सहर शेख बनीं. जीत के बाद उनका भाषण सोशल मीडिया पर वायरल हो गया. उन्होंने अपने भाषण में पूरे मुंब्रा को हरे रंग में करने की बात की. जिसके बाद इसे लेकर प्रदेश से लेकर देश के स्तर तक इस पर बहस शुरू हो गई. अब सहर शेख के बयान का वारिस पठान भी समर्थन करते नजर आए.

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हरा-भगवा विवाद पर AIMIM ने दी संवैधानिक राजनीति की दलील (Photo: X/@warispathan) हरा-भगवा विवाद पर AIMIM ने दी संवैधानिक राजनीति की दलील (Photo: X/@warispathan)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 25 जनवरी 2026,
  • अपडेटेड 4:23 PM IST

महाराष्ट्र में एआईएमआईएम की पार्षद सहर शेख के 'मुंब्रा को हरा करने' वाले बयान पर पार्टी की ओर से उन्हें समर्थन मिल रहा है. वारिस पठान ने बयान का समर्थन करते हुए कहा कि उनका बयान पूरी तरह से राजनीतिक और संवैधानिक दायरे में था. उन्होंने बताया कि AIMIM के झंडे का रंग हरा है और हर राजनीतिक दल की तरह उनकी भी इच्छा है कि उनकी पार्टी देशभर में अपनी पैठ बनाए और उसका परचम लहराए. यह संविधान के तहत मिले चुनाव लड़ने के अधिकार से जुड़ा है.

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मुंब्रा में हाल ही में मिली जीत के बाद पार्टी कार्यकर्ताओं में उत्साह स्वाभाविक है. वारिस ने कहा, "अगर किसी पार्टी का झंडा हरा है तो वह चाहता है कि उसका झंडा ज्यादा से ज्यादा जगहों पर दिखे. इसमें कुछ भी गलत नहीं है. पूरे महाराष्ट्र को हरा करेंगे. मुंब्रा भी करेंगे और साथ ही साथ हम चाहेंगे कि पूरे देश का रंग हरा हो."

इस बयान के बाद AIMIM के एक अन्य नेता इम्तियाज़ जलील के ‘पूरे महाराष्ट्र को हरा करने’ वाली टिप्पणी पर मंत्री नितीश राणे ने तीखी प्रतिक्रिया दी. उन्होंने ऐतिहासिक संदर्भों का हवाला देते हुए कहा कि औरंगज़ेब और टीपू सुल्तान ने भी ऐसे सपने देखे थे, लेकिन महाराष्ट्र भगवा ही रहेगा.

यह भी पढ़ें: 'मुंब्रा के हिंदुओं को डराने के लिए दिया भड़काऊ बयान', BJP ने सहर शेख के खिलाफ दर्ज कराई शिकायत

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इस पर प्रतिक्रिया देते हुए वारिस पठान ने कहा कि राजनीति में ‘मार डालेंगे, गाड़ देंगे, दफन कर देंगे’ जैसी भाषा नहीं होनी चाहिए. उन्होंने साफ किया कि AIMIM धमकी और हिंसा की भाषा का समर्थन नहीं करती. "भगवा हमारा, हरा तुम्हारा" वाली सोच देश को बांटने वाली है और यह बिल्कुल गलत मानसिकता है.

वारिस ने दो टूक कहा कि राजनीति में विचारों की लड़ाई होनी चाहिए, न कि धमकियों की. देश का भविष्य जनता तय करेगी और AIMIM संवैधानिक तरीके से राजनीति करती रहेगी. चुनाव में जीत या हार जनता के विश्वास और मोहब्बत से तय होगी, न कि धमकियों से. 

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