झारखंड राज्य विद्युत नियामक आयोग ने प्रदेश की नई बिजली दरों की घोषणा कर दी है, जिसके तहत बिजली की कीमतों में कुल 6.12 फीसदी की वृद्धि की गई है.
हालांकि, झारखंड राज्य बिजली वितरण निगम ने अपनी वित्तीय जरूरतों का हवाला देते हुए दरों में 59 फीसदी बढ़ोतरी का भारी-भरकम प्रस्ताव दिया था, लेकिन आयोग ने उपभोक्ताओं के हितों का ध्यान रखते हुए इसे काफी कम रखा.
किसानों और कृषि क्षेत्र को राहत
नई दरों की घोषणा करते समय आयोग ने किसानों का विशेष ध्यान रखा है. जस्टिस नवनीत कुमार ने स्पष्ट किया कि कृषि क्षेत्र के उपभोक्ताओं के लिए टैरिफ में कोई बदलाव नहीं किया गया है. सिंचाई और खेती से जुड़ी अन्य गतिविधियों के लिए बिजली पहले की तरह पुरानी दरों पर ही मिलती रहेगी, जिससे अन्नदाताओं पर कोई अतिरिक्त भार नहीं पड़ेगा.
डिस्ट्रीब्यूशन लॉस पर लगाम
आयोग ने वितरण निगम की कार्यप्रणाली पर भी कड़ा रुख अपनाया है. प्रस्तावित उच्च वितरण घाटे के दावों को नकारते हुए आयोग ने डिस्ट्रीब्यूशन लॉस की सीमा को मात्र 13 फीसदी पर ही सीमित कर दिया है.
इसका मतलब यह है कि निगम की अपनी अक्षमता या बिजली चोरी के कारण होने वाले घाटे की पूरी वसूली अब उपभोक्ताओं के बिल से नहीं की जा सकेगी.
आकाश कुमार