जंगली हाथियों से कैसे बच सकते हैं? झारखंड में फॉरेस्ट डिपार्टमेंट के एक आइडिया ने बदल दी पूरी कहानी

झारखंड के गढ़वा में कभी शाम होते ही डर भी उतर आता था. डर इस बात का कि कहीं खाना और पानी खोजते जंगली हाथी खेतों या बस्तियों में न घुस आएं. लेकिन अब तस्वीर बदल रही है. वन विभाग ने जंगल के बीच एक छोटा सा डैम बनाया, पानी का इंतजाम किया और फलदार पेड़ लगाए. नतीजा ये हुआ कि हाथियों समेत कई जंगली जानवरों को जंगल में ही खाना-पानी मिलने लगा.

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पहले शाम होते ही रिहायशी बस्ती में आ जाते थे जंगली हाथी. (Photo: Screengrab) पहले शाम होते ही रिहायशी बस्ती में आ जाते थे जंगली हाथी. (Photo: Screengrab)

चंदन कुमार

  • गढ़वा,
  • 17 जून 2026,
  • अपडेटेड 3:52 PM IST

झारखंड के गढ़वा में कुछ साल पहले तक एक डर अक्सर गांव वालों के साथ चलता था. शाम ढलते ही लोग सतर्क हो जाते थे. खेतों की रखवाली करना जोखिम भरा काम माना जाता था. वजह थे जंगली हाथी... पानी और खाने की तलाश में जंगल से निकलकर हाथियों के झुंड गांवों तक पहुंच जाते थे. कई बार फसलें बर्बाद होती थीं, घरों को नुकसान पहुंचता था और कुछ मामलों में लोगों की जान भी चली जाती थी. लेकिन अब तस्वीर बदल रही है.

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गढ़वा के चिनियां वन क्षेत्र में वन विभाग ने ऐसा प्रयोग किया है, जिसकी चर्चा अब दूसरे इलाकों में भी हो रही है. सवाल था कि हाथियों और दूसरे जंगली जानवरों को गांवों में आने से कैसे रोका जाए? जवाब मिला- उन्हें जंगल में ही वह सब दे दिया जाए, जिसकी तलाश में वे बाहर निकलते हैं.

यही सोचकर वन विभाग ने जंगल के बीचों-बीच एक छोटा डैम बना दिया. ड्रोन से देखने पर यह किसी पर्यटन स्थल जैसा नजर आता है. लेकिन इसका मकसद सिर्फ सुंदरता नहीं, बल्कि इंसान और जंगली जानवरों के बीच बढ़ते टकराव को कम करना था.

दरअसल, पिछले कुछ वर्षों में गढ़वा के जंगलों में हाथी, तेंदुआ, बाघ और अन्य वन्यजीवों की गतिविधियां बढ़ी थीं. गर्मी और सूखे के दौरान पानी की कमी होने पर ये जानवर जंगल छोड़कर आबादी वाले इलाकों की तरफ बढ़ जाते थे. हाथियों के मामले में यह समस्या और गंभीर थी, क्योंकि उनके झुंड खेतों और गांवों में पहुंचकर भारी नुकसान पहुंचाते थे.

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वन विभाग ने समस्या की जड़ पर काम किया. जंगल में पानी का स्थायी स्रोत तैयार किया गया. इसके साथ ही आसपास फलदार और जानवरों के लिए उपयोगी पेड़-पौधे लगाए गए, ताकि उन्हें भोजन भी जंगल में ही मिल सके.

अब इस पहल का असर जमीन पर दिखाई देने लगा है. वन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि पानी और भोजन की उपलब्धता बढ़ने के बाद जंगली जानवरों का जंगल से बाहर निकलना कम हुआ है. हाथियों के गांवों में आने की घटनाओं में भी कमी दर्ज की गई है. इससे न सिर्फ वन्यजीव सुरक्षित हुए हैं, बल्कि ग्रामीणों को भी राहत मिली है.

गढ़वा के डीएफओ एबीन बेनी अब्राहम के मुताबिक, जंगल के भीतर पानी और भोजन की व्यवस्था करने के बाद मानव-वन्यजीव संघर्ष की घटनाओं में कमी आई है. इसी मॉडल को जिले के अन्य वन क्षेत्रों में भी लागू किया जा रहा है. कोशिश यह है कि जंगल के जीवों को उनकी जरूरत की हर चीज जंगल के अंदर ही मिल जाए, ताकि उन्हें भटकना न पड़े.

कहानी सिर्फ एक डैम की नहीं है. यह उस आइडिया की कहानी है, जिसमें समस्या से लड़ने के बजाय उसकी वजह को समझा गया. गढ़वा में वन विभाग का यह एक्सपेरिमेंट बता रहा है कि कभी-कभी बड़े संकटों का समाधान बड़े इंतजामों में नहीं, बल्कि एक सही आइडिया में छिपा होता है.

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