झारखंड के गढ़वा जिले में कथित तौर पर गलत इंजेक्शन लगाने से दो लोगों की मौत के बाद प्रशासन हरकत में आ गया है. जिले के कांडी प्रखंड में एक नवविवाहिता और एक बच्ची की मौत के मामले ने स्वास्थ्य व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. परिजनों ने इलाज करने वाले कथित चिकित्सकों पर लापरवाही और गलत उपचार का आरोप लगाया है.
मृतकों में नवविवाहिता पूनम और बच्ची ब्यूटी कुमारी शामिल हैं. आरोप है कि दोनों को इंजेक्शन लगाए जाने के बाद उनकी तबीयत बिगड़ गई और बाद में उनकी मौत हो गई. घटना के बाद इलाके में दहशत और गुस्से का माहौल है.
यह भी पढ़ें: गरीब की मजबूरी, अस्पताल की मनमानी... गढ़वा में नवजात को बंधक बनाकर की 1.15 लाख की वसूली
लगातार मिल रही शिकायतों के बाद गढ़वा के उपायुक्त (DC) पीएन मिश्रा स्वयं जांच के लिए मौके पर पहुंचे. उन्होंने पूरे मामले की जानकारी ली और स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति पर नाराजगी जताई.
दवा दुकान में पहुंचे DC, लगाई फटकार
जांच के दौरान उपायुक्त पीएन मिश्रा संबंधित दवा दुकान पर भी पहुंचे. वहां उन्होंने दुकानदार से बातचीत की और कड़े निर्देश दिए. DC ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि जब तक मामले की जांच पूरी नहीं हो जाती और आरोपी गिरफ्तार नहीं हो जाते, तब तक दुकान बंद रखी जाएगी.
उन्होंने कहा कि संबंधित स्थल पर किसी भी प्रकार की दवा बिक्री, चिकित्सकीय परामर्श या उपचार का कार्य नहीं किया जाएगा. यदि निर्देशों का उल्लंघन किया गया तो संबंधित दुकानदार के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी.
मौके पर मौजूद अधिकारियों को निर्देश देते हुए DC ने कहा कि पूरे मामले की जांच ड्रग इंस्पेक्टर द्वारा कराई जाएगी. साथ ही स्वास्थ्य विभाग को भी पूरे प्रकरण की विस्तृत रिपोर्ट तैयार करने के निर्देश दिए गए हैं.
परिजनों से मिले, गिरफ्तारी के दिए निर्देश
उपायुक्त ने मृतक के परिजनों से मुलाकात कर उन्हें सांत्वना दी. उन्होंने शोक संतप्त परिवारों के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त की और निष्पक्ष जांच का भरोसा दिलाया.
मामले की गंभीरता को देखते हुए DC ने संबंधित थाना प्रभारी को प्राथमिकी के आधार पर तत्काल कार्रवाई करने का निर्देश दिया. उन्होंने दवा दुकान संचालक और इलाज करने वाले चिकित्सकों के खिलाफ सख्त कानूनी कदम उठाने तथा गिरफ्तारी सुनिश्चित करने को कहा.
DC पीएन मिश्रा ने कहा कि स्वास्थ्य सेवाओं में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी. आम लोगों को सुरक्षित और बेहतर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराना प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है.
दो इंजेक्शन पर उठे सवाल, डॉक्टर फरार
जानकारी के मुताबिक, मृतकों को मोनोसेफ 500 एमजी (Monocef 500 mg) और जोना बैक्ट 750 एमजी (Zona Bact 750 mg) इंजेक्शन लगाए गए थे. इन्हीं इंजेक्शनों के बाद दोनों की तबीयत बिगड़ने और मौत होने की बात सामने आई है.
परिजनों ने कथित झोलाछाप चिकित्सक डॉ. रंजीत कुमार मेहता और डॉ. उदय नारायण शर्मा पर गंभीर आरोप लगाए हैं. आरोप है कि इनके द्वारा किए गए उपचार के बाद दोनों मरीजों की मौत हुई.
फिलहाल दोनों आरोपी चिकित्सक फरार बताए जा रहे हैं. पुलिस उनकी तलाश में लगातार छापेमारी कर रही है. प्रशासन का कहना है कि जांच रिपोर्ट आने के बाद पूरे मामले में आगे की कार्रवाई की जाएगी.
स्वास्थ्य व्यवस्था पर उठे सवाल
लगातार दो दिनों के भीतर दो मौतों के बाद कांडी प्रखंड के लोगों में भय का माहौल है. ग्रामीणों का कहना है कि क्षेत्र में बिना पर्याप्त जांच और निगरानी के इलाज का काम किया जा रहा है, जिससे लोगों की जान जोखिम में पड़ रही है.
इस घटना ने ग्रामीण इलाकों में संचालित कथित झोलाछाप डॉक्टरों और निजी क्लीनिकों की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं. अब प्रशासन ऐसे मामलों पर सख्त कार्रवाई की बात कह रहा है.
पुलिस और स्वास्थ्य विभाग की संयुक्त जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि मौतों के पीछे गलत इंजेक्शन, चिकित्सकीय लापरवाही या कोई अन्य वजह जिम्मेदार थी. फिलहाल पूरे मामले की जांच जारी है.
सत्यजीत कुमार