गरीब की मजबूरी, अस्पताल की मनमानी... गढ़वा में नवजात को बंधक बनाकर की 1.15 लाख की वसूली

झारखंड के गढ़वा जिले में एक निजी अस्पताल पर 37 हजार रुपये न देने पर नवजात को बंधक बनाने का गंभीर आरोप लगा है. धुरकी थाना क्षेत्र की रीना देवी को प्रसव के बाद दलाल के जरिए निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां इलाज के नाम पर 1.15 लाख रुपये वसूले गए. आंशिक भुगतान के बावजूद अस्पताल ने बच्चा देने से इनकार कर दिया.

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अस्पताल ने नवजात को सौंपने से किया इनकार.(Photo: Screengrab) अस्पताल ने नवजात को सौंपने से किया इनकार.(Photo: Screengrab)

चंदन कश्यप

  • गढ़वा,
  • 05 फरवरी 2026,
  • अपडेटेड 9:32 PM IST

झारखंड के गढ़वा जिले में निजी क्लिनिक की लापरवाही और मनमानी का एक गंभीर मामला सामने आया है, जहां इलाज के नाम पर गरीब परिवार से लाखों रुपये वसूले गए और बकाया राशि न देने पर नवजात बच्चे को बंधक बना लिया गया. यह मामला धुरकी थाना क्षेत्र के कटहल कला गांव का है, जिसने स्वास्थ्य व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं.

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जानकारी के मुताबिक, कटहल कला गांव निवासी रीना देवी का प्रसव हुआ था. इसके बाद वह इलाज के लिए गढ़वा सदर अस्पताल पहुंची, जहां से वह कथित तौर पर एक महिला दलाल के संपर्क में आ गई. दलाल ने बेहतर इलाज का झांसा देकर रीना देवी को शहर के निजी अस्पताल ‘द न्यू सिटी हॉस्पिटल’ में भर्ती करा दिया.

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इलाज के नाम पर शुरू हुई वसूली

18 जनवरी को महिला को अस्पताल में भर्ती कराया गया. अस्पताल प्रबंधन ने नवजात को अलग-अलग बीमारियां बताकर भर्ती रखा. इलाज के नाम पर पहले 5 हजार रुपये लिए गए, इसके बाद 40 हजार रुपये जमा करने को कहा गया. समय के साथ लगातार पैसों की मांग होती रही और परिजन मजबूरी में रकम जुटाते रहे.

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3 फरवरी को अस्पताल के डॉक्टर भास्कर ने बच्चे को डिस्चार्ज करने की बात कही. इसके लिए परिजनों से 72 हजार रुपये जमा करने को कहा गया. किसी तरह परिजनों ने 36 हजार रुपये की व्यवस्था कर अस्पताल को दिए, लेकिन इसके बावजूद अस्पताल प्रबंधन ने नवजात को सौंपने से इनकार कर दिया.

37 हजार के लिए नवजात को रोके रखने का आरोप

परिजनों का आरोप है कि अस्पताल प्रबंधन 37 हजार रुपये के बकाया के लिए नवजात को बंधक बनाए हुए है. परिजनों ने कहा कि जितनी उनकी औकात थी, उतना पैसा दे चुके हैं. इसके बावजूद बच्चे से मिलने तक नहीं दिया जा रहा है.

वहीं, अस्पताल प्रबंधन का कहना है कि जब तक पूरी राशि जमा नहीं की जाएगी, तब तक बच्चा नहीं दिया जाएगा. अस्पताल के वकील ने दावा किया कि उन्हें इस मामले की जानकारी नहीं है, लेकिन अगर कोई परेशानी है तो उसका समाधान कराया जाएगा.

प्रशासन ने दिए जांच के निर्देश

इस मामले पर सिविल सर्जन डॉ. जॉन एफ. केनेडी ने कहा कि अगर निजी अस्पताल द्वारा ऐसी घटना की पुष्टि होती है तो जांच कर सख्त कार्रवाई की जाएगी. उन्होंने यह भी कहा कि सदर अस्पताल क्षेत्र में सक्रिय दलालों की पहचान कर प्रशासनिक कार्रवाई की जाएगी. सिविल सर्जन के अनुसार, मरीज के परिजन को एंबुलेंस उपलब्ध कराकर बेहतर इलाज के लिए हायर सेंटर भेजा गया है.

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