कांग्रेस को नहीं बुलाया, निर्दलीयों को न्योता... उमर अब्दुल्ला की बैठक ने बढ़ाई राजनीतिक अटकलें

जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने नेशनल कॉन्फ्रेंस के सभी विधायकों और निर्दलीय विधायकों की एक बैठक बुलाई है. कांग्रेस को इस बैठक में आमंत्रित नहीं किया गया है, जिससे राजनीतिक अटकलें तेज हो गई हैं.

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उमर अब्दुल्ला की इस बैठक में स्टेटहुड पर चर्चा हो सकती है. (File Photo: PTI) उमर अब्दुल्ला की इस बैठक में स्टेटहुड पर चर्चा हो सकती है. (File Photo: PTI)

सुनील जी भट्ट

  • श्रीनगर,
  • 03 जून 2026,
  • अपडेटेड 12:16 AM IST

जम्मू-कश्मीर के सियासी गलियारों में अफवाहों का बाजार बेहद गर्म है. हर किसी के जेहन में बस एक ही सवाल है कि आने वाले दिनों में राज्य की राजनीति में क्या होने वाला है? इस नई राजनीतिक हलचल की वजह मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला का एक अचानक लिया गया फैसला है.

दरअसल सीएम उमर अब्दुल्ला ने बुधवार सुबह 10 बजे श्रीनगर में नेशनल कॉन्फ्रेंस के सभी विधायकों और सरकार को समर्थन दे रहे निर्दलीय विधायकों की एक अहम बैठक बुलाई है. ये बैठक उमर अब्दुल्लाह के घर पर होगी.

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नेशनल कॉन्फ्रेंस के उपाध्यक्ष और मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने अपनी पार्टी के सभी विधायकों और चार निर्दलीय विधायकों को पत्र लिखकर इस बैठक में शामिल होने को कहा है. हालांकि, इस बैठक के मुख्य एजेंडे पर अभी तक पूरी तरह सस्पेंस बना हुआ है.

उमर अब्दुल्ला का फरमान: बैठक में आना अनिवार्य

मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने अपने विधायकों को लिखे पत्र में सभी विधायकों को शामिल होने का निर्देश दिया है. उन्होंने लिखा, 'मैं आपको सामूहिक महत्व के मामलों और जन कल्याण से जुड़े मुद्दों पर विचार-विमर्श करने के लिए बुलाई गई बैठक में आमंत्रित करने के लिए लिख रहा हूं. जिन मुद्दों पर चर्चा होनी है, उनकी अहमियत को देखते हुए आपकी मौजूदगी अनिवार्य है, इसलिए कृपया समय पर आए.'

इस बैठक के लिए उमर अब्दुल्ला ने चार निर्दलीय विधायकों को भी खासतौर पर आमंत्रित किया है. इनमें इंदरवाल से विधायक प्यारे लाल शर्मा, थानामंडी से मुजफ्फर खान, बानी से डॉ. रामेश्वर सिंह और सूरनकोट से चौधरी अकरम शामिल हैं.

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कांग्रेस को नहीं मिला न्योता

इस अहम बैठक की सबसे दिलचस्प बात ये है कि इसमें कांग्रेस पार्टी के किसी भी विधायक को आमंत्रित नहीं किया गया है. बता दें कि नेशनल कॉन्फ्रेंस और कांग्रेस ने साल 2024 का विधानसभा चुनाव मिलकर लड़ा था. हालांकि, चुनाव जीतने के बाद कांग्रेस ने सरकार में शामिल न होने का फैसला किया था.

कांग्रेस ने कहा था कि वो उमर अब्दुल्ला सरकार को बाहर से समर्थन देगी, लेकिन जब तक जम्मू-कश्मीर को पूर्ण राज्य का दर्जा वापस नहीं मिल जाता, तब तक वो मंत्रिमंडल में शामिल नहीं होगी.

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'अंदरूनी बगावत' या 'स्टेटहुड' की मांग?

इस बैठक के समय को लेकर भी कई तरह के कयास लगाए जा रहे हैं. कुछ रिपोर्टों के मुताबिक, बैठक में जम्मू-कश्मीर को पूर्ण राज्य का दर्जा दिलाने का मुद्दा सबसे ऊपर रह सकता है. पार्टी का एक धड़ा चाहता है कि उमर अब्दुल्ला सरकार इस मुद्दे पर केंद्र सरकार के खिलाफ आक्रामक रुख अपनाए.

हाल ही में, 6 मई को उत्तरी कश्मीर के तंगमर्ग में एक कॉलेज के उद्घाटन के दौरान उमर अब्दुल्ला ने छात्रों को संबोधित करते हुए कहा था कि वो 'बादल की तरह फटना' चाहते हैं, लेकिन छात्रों का कार्यक्रम होने के कारण वो राजनीति नहीं कर रहे हैं. हालांकि, उन्होंने संकेत दिया था कि वो जल्द ही कोई बड़ा बयान देंगे.

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इसके अलावा, श्रीनगर से नेशनल कॉन्फ्रेंस के सांसद आगा रुहुल्लाह मेहदी और सीएम उमर अब्दुल्ला के बीच राज्य का दर्जा बहाल करने और आरक्षण नीति (जो 50% से अधिक हो चुकी है) जैसे मुद्दों पर लगातार मतभेद की खबरें भी सामने आती रही हैं.

उमर अब्दुल्ला ने विरोधियों को घेरा

बुधवार की बैठक के एजेंडे को लेकर जहां हर कोई कयास लगा रहा है, वहीं मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर एक पोस्ट लिखकर तंज कसा है. उन्होंने विरोधियों पर चुटकी लेते हुए लिखा, 'मुझे ये देखकर बहुत मजा आ रहा है कि जो लोग मेरी बुलाई गई विधायकों की बैठक के बारे में सबसे कम जानते हैं, वो ही सबसे ज्यादा बातें कर रहे हैं. एक बात हमेशा याद रखें - जो जानते हैं वो बोलते नहीं, और जो बोलते हैं वो विपक्ष में बैठते हैं.'

बीजेपी का तीखा हमला: 'गिर जाएगी उमर सरकार'

दूसरी तरफ, जम्मू-कश्मीर विधानसभा में विपक्ष के नेता और वरिष्ठ बीजेपी नेता सुनील शर्मा इस समय श्रीनगर में डेरा डाले हुए हैं. इससे भी राजनीतिक अटकलें और तेज हो गई हैं. मीडिया से बात करते हुए सुनील शर्मा ने उमर अब्दुल्ला सरकार पर तीखा हमला बोला.

उन्होंने भविष्यवाणी करते हुए कहा कि नेशनल कॉन्फ्रेंस की सरकार 'अपने आप ही गिर जाएगी' और उमर अब्दुल्ला ने ये बैठक अपने 'डूबते हुए जहाज को बचाने' के लिए बुलाई है.

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सुनील शर्मा ने कहा, 'मेरी इस भविष्यवाणी को याद रखना. अब्दुल्ला परिवार की आने वाली पीढ़ियों में से भी कोई कभी इस्तीफा नहीं देगा. अब्दुल्ला परिवार मुख्यमंत्री की कुर्सी पर बैठा है. भगवान न करे, अगर कल को जम्मू-कश्मीर को लद्दाख की तरह हिल काउंसिल बना दिया जाए और उमर अब्दुल्ला को केवल एक कार्यकारी पार्षद की पोस्ट मिले, तब भी वो उस पद से इस्तीफा नहीं देंगे.'

बीजेपी नेताओं का ये भी दावा है कि नेशनल कॉन्फ्रेंस के विधायकों का एक बड़ा धड़ा उमर अब्दुल्ला सरकार के कामकाज के तरीके से खुश नहीं है. घाटी में इस बात की भी अफवाहें उड़ रही हैं कि बीजेपी यहां 'ऑपरेशन लोटस' के जरिए तख्तापलट की तैयारी में है.

नेशनल कॉन्फ्रेंस का पलटवार

बीजेपी के इन दावों पर नेशनल कॉन्फ्रेंस ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है और सरकार गिरने की सभी बातों को खारिज कर दिया है. एनसी विधायकों और पार्टी नेताओं का कहना है कि उमर अब्दुल्ला को सभी विधायकों का पूरा समर्थन हासिल है और पार्टी का कोई भी विधायक बगावत नहीं करने वाला है.

जम्मू-कश्मीर विधानसभा में सीटों का गणित

भले ही राजनीतिक गलियारों में सरकार गिरने और बचाने की कई थ्योरी चल रही हों, लेकिन आंकड़ों के लिहाज से उमर अब्दुल्ला सरकार फिलहाल पूरी तरह सुरक्षित और आरामदायक बहुमत में दिख रही है. जम्मू-कश्मीर विधानसभा में कुल 90 सीटें हैं और बहुमत का आंकड़ा 46 है.

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गठबंधन की ताकत

वर्तमान में उमर अब्दुल्ला के पास अपनी पार्टी के 41 विधायक हैं. इसके अलावा उन्हें कांग्रेस के 6 विधायकों का बाहर से समर्थन हासिल है. साथ ही 5 निर्दलीय विधायक (जिनमें से एक स्वतंत्र विधायक सरकार में मंत्री भी हैं) और 1 CPM विधायक भी उनके साथ हैं. इस तरह NC + सहयोगी दलों का कुल आंकड़ा 53 तक पहुंच जाता है, जो बहुमत के आंकड़े (46) से काफी ज्यादा है.

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हालांकि, अगर भविष्य में कांग्रेस और निर्दलीय विधायक अपना समर्थन वापस ले लेते हैं, तभी उमर अब्दुल्ला सरकार संकट में आ सकती है. फिलहाल नेशनल कॉन्फ्रेंस के किसी भी विधायक ने बगावत का कोई संकेत नहीं दिया है, लेकिन बुधवार की इस बैठक पर पूरे राज्य की निगाहें टिकी हुई हैं.

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