खूंखार तेंदुए से निहत्था भिड़ गया स्टूडेंट, 10 मिनट चली जंग... जबड़े और पंजे तोड़कर मार गिराया

हिमाचल प्रदेश के सोलन में 18 साल के एक छात्र ने ऐसी बहादुरी दिखाई, जिसे सुनकर हर कोई हैरान है. दूध लेने के लिए खेतों से गुजरते वक्त अचानक एक तेंदुए ने उस पर हमला कर दिया. जान बचाने के लिए छात्र निहत्था ही तेंदुए से भिड़ गया. करीब 10 मिनट तक चले संघर्ष के बाद उसने पत्थरों से वार कर तेंदुए के जबड़े और पंजे तोड़ दिए, जिससे उसकी मौत हो गई. इस दौरान छात्र को कई चोटें भी आईं.

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छात्र ने 10 मिनट में तेंदुए को मार गिराया. (Photo: Representational) छात्र ने 10 मिनट में तेंदुए को मार गिराया. (Photo: Representational)

aajtak.in

  • शिमला,
  • 11 मार्च 2026,
  • अपडेटेड 12:40 PM IST

हिमाचल प्रदेश में सोलन के एक छोटे से गांव में ऐसा दृश्य सामने आया, जिसे सुनकर लोग हैरान रह गए. एक 18 साल का छात्र, जो रोज की तरह दूध लेने के लिए घर से निकला था, अचानक एक खूंखार तेंदुए के सामने पड़ गया. अगले कुछ मिनटों में जो हुआ, वह किसी फिल्मी दृश्य से कम नहीं था... निहत्था युवक तेंदुए से भिड़ गया और करीब 10 मिनट तक चली जंग के बाद उसने पत्थरों से वार कर उस पर काबू पा लिया.

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यह घटना सोलन के अर्की क्षेत्र के सरली गांव की है. गांव के लोग अपने-अपने रोजमर्रा के काम में जुटने लगे थे. इसी दौरान 18 साल का प्रवेश शर्मा घर से दूध लेने के लिए खेतों की ओर जा रहा था. प्रवेश आईटीआई (औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान) का दूसरे साल का छात्र है.

घर से कुछ ही मीटर की दूरी पर वह खेतों के बीच से गुजर रहा था. अचानक झाड़ियों के बीच से कुछ हलचल हुई. इससे पहले कि प्रवेश कुछ समझ पाता, एक तेंदुआ झपटकर उसके सामने आ गया.

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अचानक हुए इस हमले से कोई भी घबरा सकता था. तेंदुए ने सीधे युवक पर हमला कर दिया. लेकिन प्रवेश ने घबराने की बजाय हिम्मत दिखाई. उसने तुरंत तेंदुए के जबड़े पकड़ लिए, ताकि वह उसके गले तक न पहुंच सके.

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तेंदुआ बार-बार उस पर हमला करने की कोशिश कर रहा था, जबकि युवक अपनी पूरी ताकत से उसे रोकने की कोशिश कर रहा था. इस दौरान दोनों के बीच जोरदार संघर्ष शुरू हो गया.

प्रवेश ने बताया कि यह जंग करीब 10 मिनट तक चली. तेंदुआ लगातार अपने पंजों और दांतों से हमला कर रहा था, जबकि युवक खुद को बचाने के लिए पूरी ताकत लगा रहा था. संघर्ष के दौरान प्रवेश को हाथ, कंधे, पैरों, बाजुओं और चेहरे पर कई चोटें आईं.

लेकिन उसने हार नहीं मानी. पास ही पड़े पत्थरों को उठाकर उसने तेंदुए के जबड़ों और पंजों पर लगातार वार करना शुरू कर दिया. वह मदद के लिए जोर-जोर से चिल्लाता भी रहा. धीरे-धीरे पत्थरों से किए गए वारों का असर दिखने लगा. आखिरकार करीब 10 मिनट तक चले इस खतरनाक संघर्ष के बाद तेंदुआ ढेर हो गया.

संघर्ष खत्म होते ही आसपास के लोग मौके पर पहुंच गए. उन्होंने घायल युवक को तुरंत अस्पताल पहुंचाया. उसे अर्की अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां डॉक्टरों ने उसका इलाज किया. हालांकि उसे कई जगह चोटें आई थीं, लेकिन डॉक्टरों ने प्राथमिक उपचार के बाद उसी दिन उसे अस्पताल से छुट्टी दे दी.

इस साहसिक घटना की खबर पूरे इलाके में फैल गई. लोग 18 साल के इस छात्र की बहादुरी की चर्चा करने लगे. वन विभाग के अधिकारियों ने भी युवक की हिम्मत की सराहना की. विभाग की ओर से उसे तत्काल राहत और बहादुरी के सम्मान के तौर पर 5 हजार रुपये की राशि दी गई.

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हालांकि इस घटना ने इलाके में तेंदुओं की बढ़ती गतिविधियों को लेकर चिंता भी बढ़ा दी है. ग्रामीणों का कहना है कि पिछले कुछ समय से इस क्षेत्र में तेंदुओं की मौजूदगी बढ़ गई है.

कुछ दिन पहले ही 6 मार्च को एक बाइक सवार पर भी तेंदुए ने हमला किया था. इसके बाद ग्रामीणों ने वन विभाग से शिकायत कर इलाके में पिंजरे लगाने की मांग की थी. इससे पहले दिसंबर 2025 में मंडी जिले के बल्ह क्षेत्र के चंड्याल, बध्याल और मलवाना गांवों में भी तेंदुओं के हमले की घटनाएं सामने आई थीं. उस दौरान एक व्यक्ति की मौत हो गई थी और नौ अन्य लोग घायल हो गए थे.

ग्रामीणों का कहना है कि जंगलों के आसपास बसे गांवों में अब तेंदुओं की आवाजाही बढ़ती जा रही है, जिससे लोगों में डर का माहौल है. फिलहाल सरली गांव की यह घटना पूरे इलाके में चर्चा का विषय बनी हुई है. लोग एक तरफ इस खतरनाक मुठभेड़ को सुनकर हैरान हैं, तो दूसरी तरफ 18 साल के युवक की हिम्मत की तारीफ भी कर रहे हैं.

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