प्रेग्नेंट भैंस के पेट से निकले लोह के 66 टुकड़े, समय रहते सर्जरी से बची जान

हिमाचल प्रदेश के ऊना में नौ महीने की गर्भवती भैंस की जान समय रहते हुई सर्जरी से बच गई. पशु चिकित्सकों ने उसके पेट से 66 नुकीली धातु की वस्तुएं निकालीं, जिनमें कीलें, तार और लोहे के टुकड़े शामिल थे. डॉक्टरों ने पशुपालकों को चारे की अच्छी तरह जांच करने की सलाह दी है.

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प्रेग्नेंट भैंस के पेट से निकले लोह के 66 टुकड़े (Photo: representational image ) प्रेग्नेंट भैंस के पेट से निकले लोह के 66 टुकड़े (Photo: representational image )

aajtak.in

  • ऊना,
  • 14 जुलाई 2026,
  • अपडेटेड 12:44 PM IST

हिमाचल प्रदेश के ऊना जिले से पशु चिकित्सा क्षेत्र का एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है. यहां नौ महीने की गर्भवती भैंस के पेट से ऑपरेशन के दौरान 66 नुकीली धातु की वस्तुएं निकाली गईं. इनमें कीलें, लोहे के तार और धातु के छोटे-छोटे टुकड़े शामिल थे. समय रहते सर्जरी नहीं होती तो इन वस्तुओं से भैंस के पेट और अन्य आंतरिक अंगों को गंभीर नुकसान पहुंच सकता था, जिससे उसकी जान पर भी खतरा मंडरा रहा था.

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यह सफल ऑपरेशन ऊना जिले के ललड़ी स्थित वेटरनरी पॉलीक्लिनिक में किया गया. भैंस के मालिक हरोली उपमंडल के बरेवाल गांव निवासी करनैल सिंह उसे अस्पताल लेकर पहुंचे थे. उन्होंने डॉक्टरों को बताया कि उनकी भैंस पिछले करीब दस दिनों से चारा नहीं खा रही थी. वह बेहद सुस्त हो गई थी और उसकी तबीयत लगातार बिगड़ती जा रही थी.

पशु चिकित्सकों ने भैंस की विस्तृत जांच की. रक्त परीक्षण और अल्ट्रासाउंड के बाद पता चला कि उसके पेट में बड़ी संख्या में मेटल की चीजें मौजूद हैं. जांच रिपोर्ट आने के बाद डॉक्टरों ने बिना देरी किए ऑपरेशन कराने की सलाह दी, क्योंकि भैंस गर्भवती होने के साथ-साथ गंभीर स्थिति में भी थी.

इसके बाद पशु चिकित्सा अधिकारी डॉ. निशांत राणौत के नेतृत्व में डॉ. नवनीत शर्मा, डॉ. शिल्पा राणौत और डॉ. स्टेफनी प्रधान की टीम ने जटिल सर्जरी को सफलतापूर्वक अंजाम दिया. ऑपरेशन के दौरान भैंस के पेट से कुल 66 मेटल की चीजें निकाली गईं. डॉक्टरों के अनुसार, यदि ये कीलें और तार पेट के भीतर और आगे बढ़ जाते तो आंतरिक अंगों को छेद सकते थे, जिससे जानलेवा स्थिति पैदा हो सकती थी.

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सर्जरी के बाद भैंस की हालत में लगातार सुधार हो रहा है. डॉक्टरों ने बताया कि उसे दर्द से काफी राहत मिली है और अगले सात से दस दिनों तक विशेषज्ञों की निगरानी में उसका इलाज जारी रहेगा. साथ ही उन्होंने पशुपालकों से अपील की है कि पशुओं को सूखा चारा, विशेषकर गेहूं का भूसा या अन्य चारा खिलाने से पहले उसकी अच्छी तरह जांच कर लें, ताकि उसमें मौजूद कील, तार या अन्य धातु के टुकड़े अनजाने में पशुओं के पेट तक न पहुंच सकें.

 
 

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