गुरुग्राम स्वास्थ्य विभाग ने उत्तर प्रदेश के बिजनौर ज़िले में चल रहे भ्रूण का लिंग पता करने वाले एक गैर-कानूनी रैकेट का भंडाफोड़ किया. इस बात की जानकारी एक पुलिस अधिकारी ने एक न्यूज एजेंसी को दी. स्वास्थ्य विभाग के एक अधिकारी ने शुक्रवार को बताया कि एक सूचना के आधार पर टीम ने छापेमारी की और एक महिला बिचौलिये और गैर-कानूनी तरीके से अल्ट्रासाउंड करने वाले एक व्यक्ति को पकड़ा.
जांच में पता चला है कि गुरुग्राम और आसपास के इलाकों की गर्भवती महिलाओं को भ्रूण का लिंग पता करने के लिए बिजनौर ले जाया जाता था. उन्होंने बताया कि रेनू नाम की एक महिला बिचौलिया इस गैर-कानूनी काम के लिए 25000 रुपये से 40000 रुपये तक लेती थी. सूचना मिलने पर स्वास्थ्य विभाग ने एक विशेष टीम बनाई और एक गर्भवती महिला को डिकॉय कस्टमर (नकली ग्राहक) के तौर पर चुना.
घर में लगाई गई थी पोर्टेबल अल्ट्रासाउंड मशीन
रेनू ने भ्रूण का लिंग पता करने के लिए 25000 रुपये मांगे. ऑनलाइन एडवांस मिलने के बाद डिकॉय कस्टमर को नई दिल्ली से बिजनौर ले जाया गया. जांच के दौरान पता चला कि बिजनौर में एक निजी घर में पोर्टेबल अल्ट्रासाउंड मशीन का इस्तेमाल करके गैर-कानूनी तरीके से अल्ट्रासाउंड किया जा रहा था और भ्रूण का लिंग पता किया जा रहा था.
गुरुग्राम और बिजनौर स्वास्थ्य विभागों की एक संयुक्त टीम ने उस जगह पर छापा मारा और रेनू व अल्ट्रासाउंड ऑपरेटर मनोज कुमार को गिरफ्तार कर लिया. जांच में पता चला कि कुमार के पास अल्ट्रासाउंड करने के लिए ज़रूरी कानूनी योग्यता नहीं थी. स्थानीय पुलिस को मौके पर बुलाया गया और रेनू व कुमार को ज़रूरी कानूनी कार्रवाई के लिए पुलिस के हवाले कर दिया गया.
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