मोरबी हादसा: रेस्क्यू ऑपरेशन 5 दिन बाद हुआ बंद, अब तक मिलीं इतनी लाशें

गुजरात के मोरबी में हुए ब्रिज हादसे के बाद जारी रेस्क्यू ऑपरेशन अब रोक दिया गया है. किसी भी शख्स के लापता होने की जानकारी न होने के कारण रेस्क्यू ऑपरेशन रोकने के निर्णय लिया गया. रेस्क्यू ऑपरेशन में जुटे राहत एवं बचाव अधिकारी हर्षद पटेल के मुताबिक अब कोई भी ऐसा शख्स नहीं बचा है, ब्रिज हादसे के बाद जिसकी गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज हो.

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मोरबी हादसा के बाद 5 दिनों तक रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया गया. (File Photo) मोरबी हादसा के बाद 5 दिनों तक रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया गया. (File Photo)

aajtak.in

  • मोरबी,
  • 04 नवंबर 2022,
  • अपडेटेड 5:36 AM IST

गुजरात के मोरबी में 30 अक्टूबर को हुए ब्रिज हादसे के बाद पिछले 5 दिनों से जारी रेस्क्यू ऑपरेशन गुरुवार रात बंद कर दिया गया. रेस्क्यू ऑपरेशन में जुटे राहत एवं बचाव अधिकारी हर्षद पटेल के मुताबिक अब कोई भी ऐसा शख्स नहीं बचा है, ब्रिज हादसे के बाद जिसकी गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज हो. इसलिए सभी जांच एजेंसियों से बातचीत के बाद रेस्क्यू ऑपरेशन बंद करने का निर्णय लिया गया है. 

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ब्रिज गिरने से लेकर अब तक, इन 5 दिनों में 135 लोगों की मौत की पुष्टि की जा चुकी है. भारतीय तटरक्षक बल, भारतीय नौसेना और राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (एनडीआरएफ) के अलावा स्थानीय प्रशासन की मदद से यह रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया जा रहा था.

कब और कैसे गिरा था ब्रिज

गुजरात के मोरबी में मच्छु नदी पर बना सस्पेंशन ब्रिज काफी पुराना था. रविवार का दिन होने के चलते ब्रिज पर काफी तादाद में लोग पहुंच गए थे. भीड़ इतनी ज्यादा थी कि कई परिवार उस पर जाने की हिम्मत भी नहीं जुटा पाए. भीड़ बढ़ने के बाद रविवार की शाम अचानक ब्रिज टूट गया और सैकड़ों लोग सीधे नदी में जा गिरे.

143 साल पुराना था ब्रिज

हादसे के बाद अब तक पुल से जुड़े कई खुलासे हो चुके हैं. सामने आया है कि मोरबी का 765 फुट लंबा और 4 फुट चौड़ा पुल 143 साल पुराना था. इस पुल का उद्घाटन 1879 में किया गया था. इस केबल ब्रिज को 1922 तक मोरबी में शासन करने वाले राजा वाघजी रावजी ने बनवाया था. वाघजी ठाकोर ने पुल बनाने का फैसला इसलिए लिया था, ताकि दरबारगढ़ पैलेस को नजरबाग पैलेस से जोड़ा जा सके.

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ओरेवा ग्रुप ने कराई मरम्मत

राजधानी गांधीनगर से 300 किलोमीटर दूर मच्छु नदी पर बना ये केबल ब्रिज 7 महीने से बंद था. पुल की मरम्मत का काम अजंता मैनुफैक्चरिंग (ओरेवा ग्रुप) को मिला था. ये कंपनी घड़ियां, एलईडी लाइट, सीएफएल बल्ब, ई-बाइक बनाती है. हालांकि, अब ये जानकारी सामने आई है कि अजंता मैनुफैक्चरिंग ने मरम्मत का ठेका किसी दूसरी कंपनी को दे दिया था.

सांसद के 12 रिश्तेदारों की जान गई

हादसे में मारे गए लोगों में ज्यादातर छोटे बच्चे थे. राजकोट से लोकसभा सांसद मोहन कुंदरिया के 12 रिश्तेदार भी इस हादसे में मारे गए. कुंदरिया ने न्यूज एजेंसी को बताया कि हादसे में उनके बड़े भाई के साले की चार बेटियां, उनमें से तीन के पति और 5 बच्चे मारे गए.

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