56 मौतें, 200 से ज्यादा घायल और 18 साल का दर्द... अहमदाबाद सीरियल ब्लास्ट केस में 38 आतंकियों की फांसी की सजा बरकरार

गुजरात हाईकोर्ट ने 2008 सीरियल ब्लास्ट मामले में स्पेशल कोर्ट के फैसले को बरकरार रखा है. अदालत ने 38 आतंकियों को दी गई फांसी की सजा और 11 दोषियों की आजीवन कारावास की सजा को कायम रखा. साथ ही कोर्ट ने 56 मृतकों के परिजनों को 10 लाख रुपये और 200 से अधिक घायलों को एक-एक लाख रुपये मुआवजा देने का आदेश भी दिया है.

Advertisement
56 मृतकों के परिजनों को 10 लाख और घायलों को 1 लाख देने का हाईकोर्ट ने आदेश है (File Photo: ITG) 56 मृतकों के परिजनों को 10 लाख और घायलों को 1 लाख देने का हाईकोर्ट ने आदेश है (File Photo: ITG)

अतुल तिवारी

  • अहमदाबाद, गुजरात,
  • 07 जुलाई 2026,
  • अपडेटेड 12:05 PM IST

अहमदाबाद में 2008 में हुए सीरियल बम धमाकों के मामले में गुजरात हाईकोर्ट ने मंगलवार को बड़ा फैसला सुनाया. हाईकोर्ट ने स्पेशल कोर्ट के आदेश पर मुहर लगा दी है. इस मामले में 38 आतंकियों को दी गई फांसी की सजा बरकरार रखी गई है, वहीं 11 आतंकियों की आजीवन कैद की सजा भी बरकरार रहेगी. 

इसके साथ ही हाईकोर्ट ने पीड़ितों को मुआवजा देने का आदेश भी दिया है. धमाकों में मारे गए 56 लोगों के परिवारों को 10-10 लाख रुपये और 200 से ज्यादा घायलों को 1-1 लाख रुपये का मुआवजा दिया जाएगा.

Advertisement

यह पूरा मामला 26 जुलाई 2008 का है, जब अहमदाबाद में एक के बाद एक करीब 70 मिनट के भीतर कुल 21 बम धमाके हुए थे. इन धमाकों में 56 लोगों की जान चली गई थी और 200 से ज्यादा लोग घायल हुए थे. बम को साइकिल पर रखे टिफिन बॉक्स में छिपाया गया था. 

हाईकोर्ट से सीरियल ब्लास्ट मामले में दोषियों को राहत नहीं मिली है (File Photo: ITG)


हमलावरों ने शहर की बसों, बाजारों और अस्पताल तक को निशाना बनाया था. धमाकों के बाद अहमदाबाद और सूरत से भी बम बरामद हुए थे. आतंकी संगठन इंडियन मुजाहिदीन ने इन धमाकों की जिम्मेदारी ली थी. बताया जाता है कि यह धमाके साल 2002 में हुए गुजरात दंगों का बदला लेने के लिए किए गए थे.

यह भी पढ़ें: फांसी की सजा पाए गुनहगारों में से किसी ने फंड इकट्ठा किया तो किसी ने साइकिल पर रखा था बम

Advertisement

इस मामले में सरकार ने 78 लोगों को आरोपी बनाकर 35 अलग-अलग केस दर्ज किए थे, जिनकी सुनवाई के लिए स्पेशल कोर्ट बनाई गई थी. करीब 14 साल की लंबी सुनवाई के बाद फरवरी 2022 में स्पेशल कोर्ट ने अपना फैसला सुनाया था. 

उस समय 49 दोषियों में से 38 को फांसी और 11 को उम्रकैद की सजा दी गई थी, जबकि सबूतों की कमी के चलते 28 लोगों को बरी कर दिया गया था. भारत के न्यायिक इतिहास में यह पहला मौका था जब एक साथ 38 दोषियों को फांसी की सजा सुनाई गई थी. 

ब्लास्ट के बाद वाहन जलकर खाक हो गए (File Photo: ITG)


इस मामले में स्पेशल कोर्ट में 1150 से ज्यादा गवाहों के बयान दर्ज किए गए थे और 8 फरवरी 2022 को 6700 से ज्यादा पन्नों का फैसला सुनाया गया था. स्पेशल कोर्ट के इस फैसले को दोषियों ने हाईकोर्ट में चुनौती दी थी, जिस पर मंगलवार को सुनवाई पूरी होने के बाद हाईकोर्ट ने अपना फैसला सुनाया है.

---- समाप्त ----

Read more!
Advertisement

RECOMMENDED

Advertisement
Latest News in Hindi »